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मालदीव के राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू का भारत दौरा रविवार से होगा शुरू, क्या पटरी पर लौटेंगे रिश्ते?
- Author, हिमांशु दुबे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्जू 6 से 10 अक्तूबर के बीच भारत की आधिकारिक यात्रा पर होंगे. भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज़ में ये जानकारी दी.
ये राष्ट्रपति मुइज़्जू की भारत की पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी. इससे पहले वो जून 2024 में प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए भारत आए थे.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रेस रिलीज़ में लिखा है कि यात्रा के दौरान, मुइज़्जू भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आपसी हित से जुड़े द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे. वो बिजनेस इवेंट में हिस्सा लेने के लिए मुंबई और बेंगलुरू भी जाएंगे.
वहीं बीते महीने मालदीव के राष्ट्रपति कार्यालय की प्रमुख प्रवक्ता हीना वलीद ने भी राष्ट्रपति मुइज़्जू की भारत यात्रा की जानकारी दी थी.
हालांकि इसी बीच मालदीव सरकार की दो जूनियर मंत्रियों यानी मरियम शिउना और मालशा शरीफ़ ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया.
ये दोनों वही मंत्री हैं जिन्हें इसी साल जनवरी में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करने के बाद निलंबित कर दिया गया था.
दरअसल, मालदीव में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्जू ने अपने चुनावी अभियान के दौरान ही 'इंडिया आउट' का नारा दिया था. मुइज़्ज़ू को चीन के प्रति झुकाव रखने वाला नेता माना जाता है.
कैसे हैं भारत और मालदीव के संबंध ?
मुइज़्ज़ू के सत्ता संभालते ही भारत के साथ मालदीव के राजनयिक संबंधों में तनाव की स्थिति बन गई थी.
लेकिन ये विवाद तब और बड़ा हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल लक्षद्वीप का दौरा किया था. उन्होंने इसकी कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं और भारतीयों से लक्षद्वीप घूमकर आने की बात भी कही.
इस पर सोशल मीडिया पर मालदीव की बजाय लक्षद्वीप जाने की चर्चा ने ज़ोर पकड़ा.
लेकिन पीएम मोदी की तस्वीरों पर मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिउना ने आपत्तिजनक ट्वीट किए थे. उन्होंने पीएम मोदी को इसराइल से जोड़ते हुए निशाने पर लिया था. उस समय दोनों मंत्रियों को निलंबित कर दिया गया था.
लेकिन मालदीव को इस विवाद की कीमत अपनी अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आधार यानी टूरिज़म सेक्टर में आई सुस्ती से चुकानी पड़ी थी.
मालदीव जाने वाले भारतीयों की संख्या घटी. मालदीव पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक़ जनवरी 2024 में करीब 13 हज़ार भारतीय मालदीव घूमने गए लेकिन ये आंकड़ा 2023 के जनवरी महीने में 17 हज़ार से अधिक था.
इसके बाद मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने मालदीव में मौजूद भारतीय सैनिकों को भी चरणबद्ध तरीके से वापस भारत भेजने का फैसला किया.
लेकिन इसी साल जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार अपने पद की शपथ ली तो मोहम्मद मुइज़्ज़ू भी नई दिल्ली पहुंचे.
भारत और मालदीव के मौजूदा संबंधों पर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रोफेसर हैपीमॉन जैकब ने कहा, "नेपाल और भूटान की तरह ही बीते दशक में भारत के साथ मालदीव के संबंध ज़्यादा पेचीदा हो गए हैं. क्योंकि, चीन ने दक्षिण एशिया में अपना प्रभाव बढ़ा लिया है. हाल ही के घटनाक्रम में बांग्लादेश भी अब भारत के लिए उतना अनुकूल नहीं दिख रहा है."
उन्होंने कहा, "भारत को सोच-समझकर प्रतिक्रिया देनी होगी, क्योंकि चीन अपने पड़ोस में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है. ऐसे में एक ज़िम्मेदार महाशक्ति बनने की आकांक्षा रखने वाले देश को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि वह किस तरह छोटे पड़ोसियों के साथ एक मजबूत साझेदारी बना सकता है."
राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू का ‘इंडिया आउट’ कैंपेन
राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्जू ने मालदीव की सत्ता में आने के बाद भारत से दूरी बनाने के संकेत दे दिए थे.
जैसे, इससे पहले मालदीव में जब भी कोई राष्ट्रपति बनता तो उनका पहला दौरा भारत का होता था. मगर, राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्जू ने पहला विदेश दौरा तुर्की का किया था.
मोहम्मद मुइज़्जू ने मालदीव की सत्ता में आने से पहले इंडिया आउट कैंपेन चलाया था.
मुइज़्जू ने यह वादा किया था कि यदि वह सत्ता में आएंगे तो मालदीव की ज़मीन से भारतीय सैनिकों को हटाएंगे और भारत से व्यापारिक रिश्ते भी संतुलित करेंगे.
सितंबर 2023 में मालदीव में राष्ट्रपति चुनाव हुए थे.
इसमें विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार मोहम्मद मुइज़्जू की जीत हुई थी. वह राष्ट्रपति बनने से पहले मालदीव की राजधानी माले के मेयर थे.
उन्होंने नवंबर 2023 में मालदीव के आठवें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी.
मालदीव और भारत के संबंधों में बदलाव
भारत और मालदीव के संबंधों के मामले में जिंदल स्कूल ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स में स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल इनिशिएटिव विभाग के डीन प्रोफेसर (डॉ.) मोहन कुमार इसका दूसरा पहलू बताते हैं.
वह कहते हैं, "एक साल पहले मालदीव के साथ संबंधों को लेकर भारत ने जिस तरह की परिस्थितियों का सामना किया था, उनमें अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. एक बार फिर भारत और मालदीव के संबंध रास्ते पर लौटते दिख रहे हैं. यह दोनों देशों के लिए एक अच्छा संकेत है."
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्जू के बदले रवैये को लेकर प्रोफेसर मोहन कुमार कहते हैं, "मालदीव को यह बात समझ आ चुकी है कि यदि भारत के साथ उसके संबंध बिगड़ते हैं, तो इसका मालदीव पर बुरा असर पड़ेगा."
"यही वजह है कि मालदीव ने अब अपनी रणनीति में बदलाव किया है. अब उसकी कोशिश भारत और चीन के अलावा बाकी देशों के साथ भी संतुलन स्थापित करते हुए आगे बढ़ने की है, ताकि उसके हितों का नुक़सान न हो. क्योंकि, समय के साथ-साथ मालदीव को यह अहसास हो चुका है कि भारत से संबंध पूरी तरह ख़त्म करके उसको किसी भी तरह से फायदा नहीं होने वाला है."
हिंद महासागर का क्या कनेक्शन है?
भारत और मालदीव के संबंधों के बीच हिंद महासागर में चीन की बढ़ती दिलचस्पी को लेकर प्रोफेसर कुमार कहते हैं, "हिंद महासागर में चीन की बढ़ती दिलचस्पी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है. दरअसल, यह चीन की बड़ी रणनीति का हिस्सा है. क्योंकि, हिंद महासागर का इलाका भारत के व्यापारिक हितों के लिहाज से महत्वपूर्ण है."
हिंद महासागर में भारत का अहम समुद्री पड़ोसी देश है मालदीव. भारत की रणनीति के लिहाज से मालदीव की भौगोलिक स्थिति बहुत अहम है.
मालदीव हिन्द महासागर के बड़े समुद्री रास्तों के पास स्थित है. इन्हीं रास्तों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार होता है. खाड़ी के देशों से भारत में ऊर्जा की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है.
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, भारत के व्यापार का 50 फ़ीसदी हिस्सा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में केंद्रित है. हिंद महासागर में भारत का 90 फ़ीसदी कारोबार होता है.
हिंद महासागर में भारत और मालदीव के अलावा चीन की बढ़ती दिलचस्पी को लेकर वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश पुरोहित कहते हैं, "एशिया में चीन हमेशा से भारत को एक बड़ी चुनौती के रूप में देखता आया है. यही वजह है कि चीन अक्सर भारत को किसी न किसी तरह से घेरने की कोशिश करता रहता है."
"हिन्द महासागर में बढ़ती रुचि भी इसी रणनीति का हिस्सा है. दरअसल, चीन इसके तहत हिंद महासागर के आसपास के देशों में बंदरगाहों और बुनियादी ढांचे का निर्माण करना चाहता है, ताकि समय आने पर वह इनका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर सके."
‘मालदीव संबंधों को सामान्य करना चाहता है’
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्जू के भारत की आधिकारिक यात्रा पर आने से पहले वहां की दो मंत्रियों के इस्तीफ़ा देने के मामले पर अखिलेश पुरोहित कहते हैं, "प्रधानमंत्री मोदी पर विवादित टिप्पणी करने वाली मालदीव सरकार की दो मंत्रियों का इस्तीफ़ा देना और इसके बाद राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्जू का भारत का आधिकारिक दौरा करने की बात कहना, कोई संयोग नहीं है. बल्कि यह साफ़ संदेश है कि मालदीव अब भारत के साथ संबंधों को सामान्य करना चाहता है."
हालांकि, उनकी ये यात्रा भारत के लिए किस तरह से ज़रूरी है?
इसके जवाब में पुरोहित कहते हैं, "मालदीव की आय का बड़ा हिस्सा टूरिज़म पर बेस्ड है. लेकिन, जब मालदीव के मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी, तब सोशल मीडिया पर मालदीव के ख़िलाफ़ जो माहौल बना था, उससे मालदीव को आर्थिक तौर पर बड़ा नुक़सान हुआ था."
"मालदीव फिर वैसी स्थिति का सामना नहीं करना चाहता है. यही कारण है कि वो भारत के साथ संबंधों को सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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