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फ़ूड सेफ़्टी डेः ये सात चीज़ें खाते हैं तो हो जाइए सावधान
राजेश पिदगाड़ी
बीबीसी तेलुगू संवाददाता
हाल ही में आंध्र प्रदेश में एक प्राइवेट कॉलेज की 26 लड़कियों को उल्टी आने, सिर दर्द और चक्कर आने की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था.
ये कॉलेज अनंतपुरम ज़िले के बुक्कारायसमुद्रम में है.
इन छात्राओं ने बीमार होने से पहले वाली रात में कॉलेज के हॉस्टल में खाना खाया था, जिसके बाद उन्हें फूड पॉयज़निंग हो गई थी.
इससे पहले आंध्र प्रदेश के ही श्रीकाकुलम ज़िले के टेक्कली में भी 29 छात्राओं को फूड पॉयज़निंग की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था.
ये सभी लड़कियां पिछड़े वर्ग की छात्राओं के लिए बने हॉस्टल में रह रही थीं.
खाद्य सुरक्षा दिवस
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक़, पूरी दुनिया में हर साल औसतन 16 लाख लोग फूड पॉयज़निंग का शिकार होते हैं, या ख़राब खाना खाकर बीमार पड़ते हैं.
और, दुनिया भर में प्रदूषित खाने से हर दिन औसतन 340 बच्चों की जान चली जाती है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन, हर साल 7 जून को ‘खाद्य सुरक्षा दिवस’ यानी वर्ल्ड फ़ूड सेफ़्टी डे के रूप में मनाता है.
आइए खाने पीने की उन चीज़ों के बारे में जानते हैं, जिनसे फ़ूड पॉयज़निंग हो सकती है और, हम इनसे कैसे बच सकते हैं.
इन खानों से रहें सावधान
अमरीका के सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक़ आम तौर पर, पका, कम पका या कच्चा मांस, वो सब्ज़ियां जो ठीक से धोई नहीं जातीं, कच्चा दूध और दूध से बने उत्पाद, लंबे समय तक रखे गए अंडे, वो मछलियां जिन्हें ठीक से साफ़ नहीं किया गया हो, गंदा अंकुरित अनाज, लंबे वक़्त तक रखा हुआ गुंधा आटा..ये वो चीज़ें हैं जिनके सेवन से फ़ूड पॉयज़निंग हो सकती है.
आइए इन सबके बारे में विस्तार से जानते हैं.
1. कच्चा मांस
जब कोई कम पका या कच्चा मांस खाता है, तो उसके फूड पॉयज़निंग के शिकार होने का ख़तरा बढ़ जाता है. क्योंकि, इसमें कैम्पिलोबैक्टर नाम के कीटाणु (बैक्टीरिया) होते हैं.
कई बार कच्चे या अधपके मांस में ईसर्शिया कोलाई, साल्मोनेला और क्लॉस्ट्रिडियम परफ्रिंजेस नाम के बैक्टीरिया भी पाए जाते हैं.
इसीलिए, सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन ये सुझाव देता है कि कच्चे मांस को कभी धोना नहीं चाहिए.
CDC के मुताबिक़, “कच्चा मांस धोने से उसमें मौजूद बैक्टीरिया आस-पास के बर्तनों में फैल जाते हैं. इससे पूरी रसोई संक्रमित हो सकती है.” सीडीसी का कहना है कि मांस ठीक से पकाया जाए, तो उसके बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं.
CDC का सुझाव है कि अगर खाने के बाद खाना बच जाए, तो उसे दो घंटे के भीतर फ्रिज में रख देना चाहिए.
सीडीसी के मुताबिक़, अगर गोश्त को फ्रिज में रखना है, तो उसे टुकड़ों में काटकर रखना चाहिए. इससे वो जल्दी ठंडा होगा और उसके बैक्टीरिया की तादाद बढ़ने की रफ़्तार धीमी हो जाएगी.
खाद्य विशेषज्ञ डॉक्टर प्रतिभा लक्ष्मी कहती हैं कि, “कच्चा या अधपका मांस खाने से सिस्टीसरकोसिस जैसी बीमारियां होने का ख़तरा रहता है. इसीलिए, हमेशा सिर्फ़ पका हुआ गोश्त ही खाना चाहिए.”
वहीं, मांस से बने फ़ास्ट फ़ूड को ठीक से पकाए बग़ैर खाने से भी फूड पॉयज़निंग की समस्या होती है.
डॉक्टर आरएसबी नायडू कहते हैं कि, “आप रेस्तरां में और सड़कों के किनारे बिकते हुए जो कबाब और टिक्के देखते हैं, वो ठीक से पके हुए नहीं होते. इस गोश्त को इस तरह से नहीं पकाया गया होता कि उसके अंदर के सारे कीटाणु मर जाएं. इसीलिए, ये सब खाने अक्सर ही फूड पॉयज़निंग की वजह बनते हैं.”
2. बिना धुली हुई सब्ज़ियां
ताज़ा हरी सब्ज़ियां खाने के कई फ़ायदे हैं. हालांकि कई बार ये सब्ज़ियां कई तरह की बीमारियों और संक्रमण की वजह बन जाती हैं.
कच्ची सब्ज़ियों में ई. कोलाई, साल्मोनेला और लिस्टेरिया जैसे बैक्टीरिया हो सकते हैं. कच्ची सब्ज़ियों के खेत से रसोई तक पहुंचने के दौरान हर जगह इनके बैक्टीरिया से संक्रमित होने का ख़तरा बना रहता है.
कई बार, हरी सब्ज़ियां रसोई की गंदगी से भी संक्रमित हो जाती हैं.इसीलिए, हरी कच्ची सब्ज़ियों को ठीक से धो लेने के बाद ही खाना चाहिए.
डॉक्टर प्रतिभा लक्ष्मी कहती हैं , “ये बात भी बेहद अहम है कि जो सब्ज़ियां आप खाते हैं, वो उगाई कहां जाती हैं?”
वो कहती हैं कि, “आजकल सब्ज़ियों की खेती बेहद असुरक्षित माहौल में की जाती है. उन पर कई तरह के कीटनाशक छिड़के जाते हैं. इसीलिए, सब्ज़ियों और फलों को नमक डले हुए पानी में अच्छे से धोने के बाद ही इस्तेमाल करना चाहिए. वरना उनसे एलर्जी या संक्रमण होने का ख़तरा हमेशा बना रहता है.”
डॉक्टर आरएसबी नायडू भी डॉक्टर प्रतिभा की बात से सहमत हैं.
वो कहते हैं, “हमें मुख्य रूप से साफ़-सफ़ाई के बारे में बात करनी चाहिए. हम अक्सर ये ख़बर सुनते हैं कि लोगों को पानी पूरी खाने के बाद फूड पॉयज़निंग हो गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. इसकी सबसे बड़ी वजह साफ़ सफ़ाई की कमी होती है."
"या तो ये सब बेचने वाले उन सब्ज़ियों को ठीक तरह से साफ़ नहीं करते, जिनका इस्तेमाल वो करते हैं. या फिर जहां वो पकाते हैं, वो जगह साफ़ नहीं होती."
"ये भी हो सकता है कि पानी पूरी या चाट बेचने वाला ख़ुद अपनी भी साफ़-सफ़ाई का ख़याल न रखता हो. इससे भी संक्रमण फैलता है.”
3. कच्चा दूध और दुग्ध उत्पाद
ग़ैर पाश्चुराइज़्ड दूध और उससे बनी चीज़ों से भी फूड पॉयज़निंग का ख़तरा होता है.
ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि कच्चे दूध में ई. कोलाई, कैंपिलोबैक्टर, क्रिप्टोस्पोरिडियम, लिस्टेरिया और साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं.
इस तरह के दूध से बनी आइसक्रीम और दही भी नुक़सानदेह हो सकते हैं.
दूध को पाश्चुराइज़ करने या फिर उसे उबालने से उसमें मौजूद बैक्टीरिया ख़त्म हो जाते हैं.द
दूध को गर्म करने से पौष्टिक तत्वों में कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता है.
डॉक्टर प्रतिभा लक्ष्मी कहती हैं कि कच्चा दूध पीने से आंत की टीबी होने का ख़तरा भी बहुत होता है.
वो कहती हैं कि, “बहुत से लोग कहते हैं कि दूध, कच्चा ही पीना चाहिए. वो इसके पक्ष में बच्चों के मां का दूध पीने की मिसाल देते हैं.
"हालांकि, मां के दूध और किसी जानवर के दूध में अंतर होता है.गाय या भैंस दुहने वाले ने साफ़-सफ़ाई का कितना ख़याल रखा था. उसने हाथ साबुन से धुले थे या नहीं. उसने किस तरह के बर्तन में दूध दुहा था? दुहने के बाद दूध को कहां रखा गया था? ये बातें काफ़ी मायने रखती हैं. इसीलिए, बेहतर यही होता है कि दूध को गर्म करने के बाद ही पिया जाए”
4. कच्चे अंडे
कच्चे अंडों में साल्मोनेला बैक्टीरिया होते हैं. ये बैक्टीरिया अंडे में तब भी मौजूद हो सकते हैं, जब वो एकदम साफ़ दिख रहा हो और उसके छिलके में कोई दरार न पड़ी हो.
इसीलिए, जानकार सलाह देते हैं कि पाश्चुराइज़्ड या उबले अंडे ही इस्तेमाल करने चाहिए. CDC सलाह देता है कि अंडे को तब तक उबाला जाना चाहिए, जब तक उसकी सफ़ेदी और ज़र्दी, दोनों सख़्त न हो जाएं.
सीडीसी की सलाह है कि अंडों को फ्रिज में रखते वक़्त फ्रिज का तापमान अंडों के हिसाब से सेट करना चाहिए.
जहां तक मुमकिन हो ताज़े अंडे ही इस्तेमाल किए जाने चाहिए.
डायटीशियन नीता दिलीप कहती हैं कि, “कई बार बहुत दिनों तक रखे रहने से अंडे टूट जाते हैं. ऐसे अंडे खाने से कई तरह के संक्रमण हो जाते हैं. इसलिए बेहतर यही है कि अंडे ख़रीदते वक़्त उनकी तारीख़ देख ली जाए और जहां तक संभव हो ताज़े अंडे ही इस्तेमाल किए जाएं.”
5. कच्ची मछली
कच्ची मछलियों में बैक्टीरिया के साथ साथ कई तरह के वायरस भी होते हैं. इसलिए अगर मछली को कच्चा ही खाया जाए तो कई तरह की बीमारियां होने या फिर कई बार जान तक जाने का डर होता है.
इसीलिए, CDC सलाह देता है कि मछली को अच्छे से धोकर औरपकाकर ही खाना चाहिए.
इसी तरह प्रॉन के बारे में CDC की सलाह है कि ‘प्रदूषित पानी में पैदा होने वाले प्रॉन में नोरोवायरस हो सकते हैं. इसीलिए, उनको ठीक से धोकर, तब तक पकाया जाना चाहिए, जब तक उनकी कच्ची बदबू ख़त्म न हो जाए.’
इसी तरह, डॉक्टर प्रतिभा लक्ष्मी कहती हैं कि, “मछलियां ख़रीदते वक़्त लोगों को बेचने वाले से हमेशा ये पता करना चाहिए कि उन्हें कहां से पकड़ा गया था.”
वो कहती हैं कि, “इन दिनों मछलियों को प्रदूषित और गंदे माहौल में पाला जाता है. ऐसी मछलियां खाने से कई तरह के संक्रमण हो सकते हैं."
"कच्ची मछली तो कभी खानी ही नहीं चाहिए. यही बात मछलियों से बनी दवा पर भी लागू होती है. मछलियां कैसे पाली जाती हैं? उन्हें पकड़ने वाले अपनी साफ़-सफ़ाई का कितना ख़याल रखते हैं? इन बातों का ध्यान रखना चाहिए.”
6. अंकुरित अनाज
अंकुरित अनाज आपकी सेहत के लिए बहुत अच्छे होते हैं. वो हल्की गर्मी और नमी में तैयार होते हैं. हालांकि, ऐसे माहौल में बैक्टीरिया भी बड़ी तेज़ी से पनपते हैं.
इसका नतीजा ये होता है कि कई बार स्प्राउट में साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया हो सकते हैं.
डॉक्टर प्रतिभा लक्ष्मी कहती हैं कि अंकुरित अनाजों के मामले में हमें इन बातों का ध्यान रखना चाहिए: जैसे कि, स्प्राउट कब से रखे हुए थे? वो खुली हवा में कितनी देर रहे थे?
वो कहती हैं कि, “स्प्राउट को पानी में बहुत देर तक नहीं भिगोना चाहिए. इसी तरह उन्हें बंद जगहों पर भी लंबे वक़्त तक नहीं रखा जाना चाहिए. जिस जगह हवा की आवाजाही अच्छी होती है, वहां पर स्प्राउट में बैक्टीरिया पनपने का डर कम होता है.”
7. बासी गुंथा आटा
गेहूं का आटा हो या किसी और तरह का, उसे गूंथकर रखने से कई तरह के बैक्टीरिया पनप सकते हैं. इसीलिए, CDC की सलाह है कि कच्चे गुंथे आटे को फ़ौरन ही इस्तेमाल करना चाहिए.
उसे गूंथकर अगले दिन इस्तेमाल कभी नहीं करना चाहिए.
डायटीशियन नीता दिलीप कहती हैं कि, “आटा जितना ताज़ा गुंथा हुआ होगा, उतना ही सेहतमंद होगा. सब्ज़ियां हों या गुंधा आटा, उन्हें किचन में बहुत देर तक नहीं रखा जाना चाहिए. क्योंकि जैसे जैसे वक़्त बीतता है उनमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं."
"इसलिए रखे हुए गुंथे आटे से संक्रमण फैलने का ख़तरा अधिक होता है.”
इसके साथ साथ, इस बात का भी ख़याल रखना चाहिए कि बैक्टीरिया या फूड पॉयज़निंग के डर से साफ़-सफ़ाई का ख़याल सनक की तरह सिर पर सवार न हो.
डॉक्टर प्रतिभा लक्ष्मी कहती हैं कि, “बैक्टीरिया हमारे लिए हमेशा ख़राब ही नहीं होते. वो हमारी इम्युनिटी यानी बीमारियों से लड़ने की ताक़त बढ़ाते हैं. हमारे पेट में बहुत से बैक्टीरिया होते हैं. वो हमें कई जानलेवा संक्रमणों से बचाते हैं.”
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