विलुप्त हुआ 'पहाड़ों का गहना' जंगल में एक गुप्त जगह पर फिर लौटा

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- Author, जॉर्जियाना रन्नार्ड
- पदनाम, बीबीसी जलवायु और विज्ञान संवाददाता
जंगलों में विलुप्त हो चुके एक पौधे को अब एक बार फिर युनाइटेड किंगडम में लगाया गया है. इस पौधे की सुरक्षा के लिए हम ये नहीं बता सकते कि इसे किस जगह लगाया गया है.
देखने में ये सिर्फ एक छोटा पौधा है, लेकिन ब्रिटेन में ख़तरे में बनी हुई छह प्रजाति में से ये एक है और आपको कहीं न कहीं इसे बचाने की शुरुआत करनी होगी.
जिस वक्त जानेमाने हॉर्टिकल्चरिस्ट (बागवानी विशेषज्ञ) रॉबी ब्लैकहॉल-माइल्स ने इस पौधे को इसकी मूल भूमि को वापस लौटाया, उस वक्त हम वहीं थे.
रॉबी से मेरी पहली मुलाक़ात उनके लुप्तप्राय होने वाले पौधों के लिए बनी नर्सरी में हुई थी. उनकी नर्सरी उत्तरी वेल्स के एक शांत हिस्से में स्थित थी.
उस नर्सरी में वो जो रखते हैं वह इतना मूल्यवान है कि वो उसका बीमा भी नहीं करा सकते.
वो मुझसे कहते हैं कि इस बारे में कितना बताना है इसे लेकर मैं सावधान रहूं क्योंकि इस तरह के दुर्लभ और ख़ास पौधों के लिए अभी भी एक आकर्षक बाजार है. इन पौधों को अक्सर हज़ारों पाउंड के बदले अवैध रूप से बेचा जाता है.
एक गमले की तरफ इशारा करते हुए वो कहते हैं, "दुनिया में उनमें से केवल 30 पेड़ ही बचे हैं."
रॉबी की नर्सरी

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हमारे चारों ओर पौधों की ट्रे, फर्श पर मिट्टी के थैले और थैलों में नए उगते और फलते-फूलते पौधे हैं. इन पौधों के लिए तापमान बहुत गर्म, बहुत ठंडा या वातावरण बहुत सूखा न हो, इसकी जांच के लिए छत पर थर्मामीटर लटकाए गए हैं.
रॉबी लंबे कद के व्यक्ति हैं जो एथलीट की तरह दिखते हैं. वो बेहद उत्साह से बात करते हैं.
जब मैंने इस रिपोर्ट पर रिसर्च का काम शुरू किया तो बॉटेनिकल सोसाइटी के दस्तावेज़ों में रॉबी का नाम बार-बार उभर रहा था. ब्रिटेन में ऐसे बहुत कम लोग हैं जो पौधों के बारे में इतनी जानकारी रखते हैं.
रॉबी जब छोटे थे तो वो जानवरों को बचाना चाहते थे. कुछ वक्त उन्होंने मॉडलिंग भी की. बाद में उनका झुकाव बॉटनी यानी पेड़ पौधों से जुड़े विज्ञान की तरफ हुआ. अब वो संरक्षण के काम में लगी एक चैरिटी, प्लांटलाइफ़ के लिए काम कर रहे हैं.
वो कहते हैं, "अगर आप ब्रिटेन में जैव विविधता के बारे में एक पहेली की तरह सोचते हैं, तो इसके सभी टुकड़े वास्तव में महत्वपूर्ण हैं, लेकिन कुछ टुकड़े गायब हैं."
नेशनल ट्रस्ट और नेचुरल रिसोर्स वेल्स के साथ काम करते हुए उनका लक्ष्य कुछ हद तक जैव विविधता को बहाल करने में मदद कहना और एरीरी या स्नोडोनिया में विलुप्त हो चुके रोज़ी सैक्सिफ्रे़ज नाम के एक पौधे को वापस उगाना है. इस पौधे को वो 'पहाड़ों का गहना' कहते हैं.
रोज़ी सैक्सिफ्रे़ज ओर पहाड़ियां

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ब्रिटेन के जंगलों में आख़िरी बार रोज़ी सैक्सिफ्रे़ज को साल 1962 में देखा गया था. उस समय ये पौधा एरीरी में किम आइडवाल नेचर रिज़र्व में देखा गया था.
मैं उस जगह को देखना चाहता था. रॉबी और नेशनल ट्रस्ट के रेंजर राइस वेल्डन-रॉबर्ट्स मुझे और मेरे सहयोगी को किम आइडवाल लेकर गए.
झील के चारों ओर घुमावदार रास्तों पर चलकर हम टिल डू नाम की जगह पर पहुंचे. इस जगह को अंग्रेजी में अशुभ रूप में डेविल्स किचन यानी शैतान की रसोई कहा जाता है.
रास्ते में चलते हुए रॉबी हर कुछ कदम पर रुककर उन दुर्लभ पौधों की तरफ इशारा करते जो जिंदा रहने में कामयाब रहे थे.
ये संयोग की बात थी कि मैं इन रास्तों पर पहले भी चल चुकी थी. हालांकि इन पहाड़ों पर पत्थरों के बीच बनी दरारों पर चढ़ने के लिए संघर्ष करते वक्त मुझे उन चट्टानों के नीचे फैल रहे पौधों की क़ीमती प्रजातियों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

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रोज़ी सैक्सिफ्रे़ज का नाम विलुप्त हो चुके पौधों की लिस्ट में रखा गया है, लेकिन कुशल पर्वतारोही रॉबी ने फिर एक बार इसकी पड़लात की.
पहाड़ी की सीधी चट्टानों की ओर इशारा करते हुए वो कहते हैं, "मैं छह साल तक गर्मियों के दिनों में वहां रस्सियों के सहारे जाकर इस बात की जांच करता रहा हूं कि कहीं हम ग़लत तो नहीं."
वो कहते हैं, "रोज़ी सैक्सिफ्रे़ज ब्रिटेन का उतना ही मूल निवासी है जितना आप सोच सकते हैं."
ये उन पहाड़ी पौधों के परिवार का हिस्सा है जो हिम युग के दौरान उत्तरी ब्रिटेन के जम जाने पर भी पनपे थे. फिर जब ग्लेशियर पिघले तो रोज़ी सैक्सिफ्रे़ज उस वतावरण में भी पनपते रहे.
लेकिन बेहद नाज़ुक दिखने और अपने सुंदर फूलों के कारण पौधे इकट्ठा करने वालों का ध्यान इस पौधे की तरफ गया. विक्टोरियन्स ख़ासकर इस पौधे को अपने निजी कलेक्शन के लिए चुना करते थे.
चारागाहों का ख़राब प्रबंधन भी एरीरी में इस पौधे की कम होती गई संख्या के लिए ज़िम़्मेदार था.
इसकी संख्या तेज़ी से कम होती गई और फिर वो वक्त भी आया जब यूके की मुख्यभूमि से ये ग़ायब हो गया.
1962 में जब अचानक दिखा पौधा

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इस कहानी की अगला हिस्सा एक लोक कथा जैसा है. 1962 में डिक रॉबर्ट्स नाम के एक टीचर और कंज़र्वेशनिस्ट एक स्कूल ट्रिप पर किम आइडवाल आए हुए थे.
उन्होंने रास्ते में बहकर आया एक पौधा उठा लिया और अपनी जेब में रख लिया. उन्हें उस वक्त ये नहीं यह पता नहीं था कि यह कौन-सा पौधा है. वो इस पौधे को घर ले गए और इसे अपने बगीचे में लगा दिया.
आज के दौर में पूरे ब्रिटेन की मुख्यभूमि में मिलने वाले रोज़ी सैक्सिफ्रे़ज की असल जड़ें इसी छोटे पौधे से जुड़ी हैं. इस एक पौधे ने भविष्य की पीढ़ियों के लिए पौधों की एक पूरी प्रजाति को बचाया.
लगभग एक दशक पहले रॉबी को देखभाल के लिए इस पौधे का एक टुकड़ा यानी एक कटिंग दी गई थी.
रॉबी कहते हैं, "मैं खुद को खुशनसीब समझता हूं कि मुझे डिक रॉबर्ट्स की विरासत के हिस्से के साथ काम करने का मौक़ा मिला."
किसी ऐसी प्रजाति को बचाए रखना मुश्किल होता है जो मूल प्रजातियों के आनुवंशिक वंशज के साथ हो.
अधिकांश मामलों में संबंधित प्रजातियों का ही इस्तेमाल किया जाता है. उदाहरण के तौर पर- ब्रिटेन में बीवर की प्रजाति को वापिस लाने के के लिए यूरोपीयन बीवर का इस्तेमाल किया गया था.
पौधे के अपने हाथों में लिए रॉबी कहते हैं, "यह उस मूल वेल्श पौधे की कटिंग की कटिंग की कटिंग से लिया गया है.
डिक रॉबर्ट्स के एरीरी में आने के बाद के दशकों में, ब्रिटेन में प्रकृति में नाटकीय रूप से बदलाव आया.
छह में से एक प्रजाति के विलुप्त होने का ख़तरा है. बीते 30-40 सालों में 19 फ़ीसदी ऐसी प्रजातियों को हमने खो दिया है जिन्हें निगरानी में रखा गया था. इससे ब्रिटेन धरती के सबसे अधिक नेचर-डिप्लीटेड देशों में से एक बन गया है.
इस पौधे से क्या बदलेगा?

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मैंने बांगोर विश्वविद्यालय में कंज़र्वेशन की प्रोफ़ेसर जूलिया जोन्स को किम आइडवाल आमंत्रित किया. मैं उनसे पूछना चाहती थी कि इस एक छोटे से पौधे को इकोसिस्टम में वापस लाने से कितना अंतर आ सकता है.
सच ये है कि कंज़र्वेशन बेहद जटिल काम है और अकेले ये पौधा यूके की प्रकृति को नहीं बदल सकता. इसके लिए और काम की ज़रूरत है जिसमें जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और इंसान के लिए ज़मीन के बढ़ते इस्तेमाल से पौधों के उगने की जगह को बचाना शामिल है.
हालांकि प्रोफे़सर जोन्स का कहना है कि इस पौधे को फिर से वापस लाना एक संकेत है कि हमें और काम करने की ज़रूरत है और "ये याद दिलाता है कि हमने कितना कुछ खोया है."
पौधों को वापस प्रकृति में लाने के काम को कम ही तवज्जो मिलती है, अधिकांश काम जानवरों को वापस लाने में चला जाता है. यूके में इसका सबसे जानामाना उदाहरण बीवर या व्हाइट टेल्ड सी-ईगल है, जो आम तौर पर लोगों को पौधों की तुलना में अधिक उत्साहित करता है.
कुछ वैज्ञानिक "पेड़ पौधों के प्रति इंसान के अंधेपन" की बात करते हैं. वो कहते हैं कि लोग अपने आस-पास के पौधों को महत्वपूर्ण जीवों के रूप में नहीं देखते, बल्कि हमारे इको सिस्टम में दवाओं के लिए में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद वो इन्हें बस वॉलपेपर के रूप में देखना चाहते हैं.
प्रकृति को पौधा लौटाना

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कुछ दिन पहले आख़िरकार वो दिन आ गया जब दस साल की मेहनत का नतीजा सामने आना था.
एरीरी में एक रोज़ जब बारिश हो रही थी तो एक गुप्त जगह पर कुछ लोग इकट्ठा हुए. इनमें रेंजर राइस वेल्डन-रॉबर्ट्स भी शामिल थे जो पौधों में दिलचस्पी रखने वाले कलेक्टर्स पर नज़र रखे हुए थे.
वो कहते हैं, "उम्मीद है कि वो दिन भी आएगा जब ये पौधा दुर्लभ नहीं रह जाएगा और इसे देखने आने वाला हर व्यक्ति इसकी खूबसूरती की तारीफ़ कर सकेगा."
रॉबी ब्लैकहॉल-माइल्स के लिए ये एक बेहद महत्वपूर्ण पल है. वो कहते हैं कि वो रोज़ी सैक्सिफ्रे़ज पर नज़र रखना जारी रखेंगे.
लेकिन 60 साल तक खे़ती के ज़रिए जीवित रहने वाला ये पौधा क्या बाहर के पर्यावरण में जीवित रह पाएगा?
वो अपनी कार से पौधों के टोकरे लेकर आते हैं.
जब मैंने इसे पहले देखा था उस वक्त के बाद से ये काफी बदल गया है. घने पत्तों से निकलकर फैले लंबे तने, पांच पंखुड़ियों वाले एक सफेद फूल को थामे हुए हैं.
रॉबी कहते हैं, "मुझे ये फूल बहुत पसंद हैं - मानो ये आपको देखकर चमकने लगे हों."
एक नदी पार करने के बाद रॉबी नीचे झुककर ज़मीन पर लगी घास साफ़ करते हैं और मिट्टी खोदना शुरू करते हैं.
मिट्टी हटाकर वो उसके नीचे पत्थर पर चोट करते हैं और कहते हैं, "यह ठीक है - लैटिन में सैक्सिफ़्रेज का अर्थ है चट्टान को तोड़ने वाला."
कुछ मिनटों के बाद, पहाड़ के ये नन्हे गहने वापस अपनी मूल धरती पर में वापस आ गए.
रॉबी बेहद इमोशनल नज़र आ रहे हैं. वो कहते हैं कि ये उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण पल है जब वो अपने देश में, जिस पर्यावरण से वो प्यार करते हैं उसे कुछ लौटा रहे हैं.
वो कहते हैं, "वेल्श में एक शब्द है एडफेरियाड, जिसका मतलब है पुनर्स्थापन या पुनरुद्धार. आज मैं सातवें आसमान पर हूं."
अतिरिक्त रिपोर्टिंग: ग्विंडाफ़ ह्यूग्स
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