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भारत की 'प्याज़ कूटनीति', प्रतिबंध के बीच हजारों टन का निर्यात
प्याज़ के निर्यात पर लंबे समय से भारत सरकार ने प्रतिबंध लगाया हुआ है, बावजूद इसके संयुक्त अरब अमीरात जैसे कुछ ऐसे देश हैं, जहां सरकार की अनुमति से प्याज भेजा जा रहा है.
इस वक्त वैश्विक स्तर पर प्याज की कीमतें बढ़ी हुई हैं, लेकिन भारत से ऐसे देशों को सस्ती कीमतों पर प्याज दिया जा रहा है, जिससे किसान और व्यापारी नाराज हैं.
निर्यातकों का कहना है कि एक किलोग्राम प्याज के लिए भारतीय किसानों को 12 से 15 रुपये का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन यही प्याज़ जब यूएई पहुंचता तो वहां इसकी कीमत 120 रुपये प्रति किलोग्राम हो जाती है.
सवाल है कि जब प्याज़ के निर्यात पर प्रतिबंध लगा हुआ है, तो सरकार चुनिंदा देशों को प्याज क्यों बेच रही है? क्या भारत सरकार कूटनीति के लिए अब प्याज का इस्तेमाल कर रही है?
जब से भारत सरकार ने प्याज़ के निर्यात पर रोक लगाई है किसान इसका विरोध करते रहे हैं. घोषणा के बाद किसान महाराष्ट्र में विरोध प्रदर्शन भी किए थे. ट
ये विरोध प्रदर्शन नासिक के लासलगांव, नंदगांव, पिंपलगांव और उमाराने में हुए थे. यही इलाक़ा भारत के प्याज़ उत्पादन का केंद्र है.
राजनीतिक रूप से प्याज़ एक संवेदनशील फसल है. समय-समय पर प्याज़ का दाम महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बनता रहा है.
प्याज़ का चुनाव पर सबसे सीधा असर शायद 1998 में दिखा. माना जाता कि उस साल दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार में प्याज़ की ऊंची क़ीमतों का हाथ था.
देश में प्याज़ की कमी के डर से सरकार ने दिसंबर में इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था.
पिछले महीने सरकार ने इस प्रतिबंध को अगले आदेश तक बढ़ा दिया था. हालांकि राजनयिक चैनलों के जरिए प्याज की मांग को भारत सरकार स्वीकार कर रही है.
प्रतिबंध के बीच यूएई को भेजा प्याज़
द हिंदू अखबार के मुताबिक 1 मार्च को केंद्र केंद्र सरकार ने संयुक्त अरब अमीरात को 14,400 मीट्रिक टन प्याज़ के निर्यात की अनुमति दी थी. इसके साथ ही सरकार ने शर्त रखी थी कि तीन महीने में यह निर्यात 3600 मीट्रिक टन से ज्यादा नहीं हो सकता है.
वहीं पिछले महीने 3000 टन से अधिक प्याज के निर्यात को मंजूरी दी गई है. इसके अलावा वाणिज्य मंत्रालय ने पिछले सप्ताह यूएई को अलग से 10 हजार मीट्रिक टन प्याज की अनुमति दी है.
निर्यात पर पाबंदी के बावजूद यूएई के अलावा भी कई देशों को प्याज़ बेचने की ख़बरें हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के मुताबिक भारत ने 'बांग्लादेश को 50,000 टन, भूटान को 550 टन, बहरीन को 3,000 और मॉरिशस को 1,200 टन प्याज़ के निर्यात' की इजाज़त दी है.
आम तौर पर वैश्विक बाजार में प्याज की कीमतें 30 रुपये से 35 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच रहती हैं. हालांकि हाल के महीनों में यूएई जैसे प्रमुख बाजारों में कीमतें 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं.
इन कीमतों में उछाल इसलिए आया है, क्योंकि भारत, पाकिस्तान और मिस्र ने प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया हुआ है.
द हिंदू अखबार के मुताबिक निर्यातकों को जानकारी मिली है कि हाल ही में 500 से 550 डॉलर प्रति टन के हिसाब से यूएई को प्याज भेजा गया है. अगर भारतीय रुपये में प्रति किलोग्राम प्याज की बात करें तो यह 45 से 50 रुपये के बीच है.
अखबार के मुताबिक भारत से प्याज खरीदने वाले यूएई के आयातकों को 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा हो चुका है.
अनुमान है कि 10 हजार मीट्रिक टन प्याज जब यूएई जाएगा, तो आयातकों को करीब एक हजार करोड़ रुपये का मुनाफा होगा.
प्याज़ खरीदने वालों को फायदा
प्याज का यह निर्यात विशेष रूप से नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (एनसीईएल) के माध्यम से किया जा रहा है. एनसीईएल, सहकारिता मंत्रालय के तहत आने वाली एक सरकारी स्वामित्व वाली संस्था है.
प्याज का निर्यात प्राइवेट प्लेयर नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक सरकार दूसरी सरकार को निर्यात कर रही है. इस प्रक्रिया में प्याज़ मंगवाने वाली सरकार अपने यहां आयातकों के लिए एक कोटा निर्धारित करती है.
ऐसे निर्यात के लिए खरीद एग्री बाजार पोर्टल पर ई-टेंडरिंग के जरिए की जा रही है.
ऐसा माना जा रहा है कि यूएई की तरफ से प्राइवेट प्लेयर प्याज की खरीद में शामिल हैं, वहीं सरकारी एजेंसियां इससे दूर दिखाई दे रही हैं.
हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने सरकार से प्याज निर्यात करने की प्रक्रिया और उसकी कीमतों को तय करने को लेकर स्पष्टता की मांग की है.
नेशनल कॉपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड को लिखे एक ईमेल में एसोसिएशन ने चिंता जाहिर की है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों से कम पर विदेशों में प्याज बेचा जा रहा है.
अखबार के मुताबिक ऐसी जानकारी सामने आई है जिसमें एनसीईएल के अधिकारियों ने व्यापारियों से कहा है कि प्याज निर्यात से जुड़ी प्रक्रिया और उसकी कीमतों उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं, क्योंकि यह एक इंटर-मिनिस्ट्रियल कमिटी की तरफ से तय हो रहे हैं.
प्याज़ का इतिहास
प्याज़ का प्रयोग आज से 4,000 साल पहले भी विभिन्न व्यंजनों में किया जाता था.
यह बात पता चली मेसोपोटामिया काल के एक लेख से जिसे सबसे पहले पढ़ा 1985 में एक फ़्रेंच पुरातत्वविद ने. आज दुनिया के लगभग सभी देशों में प्याज़ की खेती होती है.
चीन और भारत मिलकर दुनिया के कुल उत्पादन (सात करोड़ टन) का क़रीब 45 प्रतिशत पैदा करते हैं.
लेकिन खाने के मामले में ये दोनों दुनिया के शीर्ष देशों में नहीं हैं.
साल 2011 के संयुक्त राष्ट्र के एक अध्ययन के मुताबिक़ लीबिया में हर व्यक्ति साल में औसतन 33.6 किलो प्याज़ खाता है.
दुनिया के ज़्यादातर देशों के व्यंजनों में इसका इस्तेमाल आम है. इसके पीछे की वजह प्याज़ का पौष्टिक होना माना जाता है.
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