चीन को टक्कर देने के लिए ट्रंप को क्यों पड़ी ऑस्ट्रेलिया की ज़रूरत?

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- Author, नताली शेरमन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने रेयर अर्थ और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई बढ़ाने के मक़सद से एक समझौता किया है.
यह क़दम ट्रंप प्रशासन की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वो इस क्षेत्र में चीन के वर्चस्व को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है.
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने कहा कि इस समझौते से "फ़ौरन शुरू किए जा सकने वाले" 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर के खनन और इससे जुड़े प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
इन प्रोजेक्ट्स से रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया की माइनिंग और प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ेगी.
समझौते के तहत दोनों देश अगले छह महीनों में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में एक अरब डॉलर के प्रोजेक्ट्स में निवेश करेंगे.
यह जानकारी दोनों देशों के बीच हुए समझौते में दी गई है.
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अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया इन मुद्दों पर ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौर से ही साथ काम कर रहे हैं, लेकिन अल्बनीज़ ने कहा कि नया समझौता साझेदारी को अगले स्तर तक ले जाएगा.
सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच कई अरब डॉलर के पनडुब्बी समझौते (एयूकेयूएस) पर भी टिप्पणी की और कहा कि यह "पूरी रफ़्तार से आगे बढ़ रहा है."
इस साल की शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते की समीक्षा करने की बात कही थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह उनकी "अमेरिका फ़र्स्ट" नीति के मुताबिक़ है.
इससे यह चिंता पैदा हुई थी कि ऑस्ट्रेलिया पनडुब्बी के अपने पुराने बेड़े को बदलने के लिए अमेरिकी पनडुब्बियाँ (सबमरीन्स) नहीं ख़रीद पाएगा.
लेकिन सोमवार को जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या ऑस्ट्रेलिया को पनडुब्बियाँ मिलेंगी, तो उन्होंने कहा, "हाँ, उन्हें मिलेंगी."
रेयर अर्थ मिनरल्स पर चीन का दबदबा

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फ़िलहाल दुनियाभर में रेयर अर्थ मिनरल्स की माइनिंग में चीन का क़रीब 70 फ़ीसदी और प्रोसेसिंग में 90 फ़ीसदी हिस्सा है.
ये खनिज रक्षा उपकरणों से लेकर कंप्यूटर चिप्स, फ़ोन और कारों तक में इस्तेमाल होते हैं.
अमेरिकी कंपनियाँ इन खनिजों के लिए बड़े पैमाने पर चीन पर निर्भर हैं.
इस साल चीन ने नए अमेरिकी टैरिफ़ और अमेरिका से तनावों के जवाब में इसकी सप्लाई पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की.
इसके बाद से अमेरिकी कंपनियों के सामने इसे लेकर ख़तरा पैदा हो गया है.
अब अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया से समझौता किया है. ऑस्ट्रेलिया के पीएम अल्बनीज़ ने कहा कि यह समझौता निवेश को रफ़्तार देने पर केंद्रित है.
ख़ासतौर पर तीन तरह के प्रोजेक्ट्स में, जिनमें ऑस्ट्रेलिया में प्रोसेसिंग के क्षेत्र में अमेरिकी निवेश भी शामिल है.
दोनों देशों ने रेयर अर्थ मिनरल्स की क़ीमत तय करने, प्रोजेक्ट्स की मंज़ूरी की प्रक्रिया और खनिज क्षेत्र की कंपनियों और प्रोजेक्ट्स की बिक्री की सरकारी समीक्षा के नियमों पर मिलकर काम करने पर भी सहमति जताई है.
अमेरिका ने पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में हर साल 100 टन उत्पादन क्षमता वाली गैलियम रिफ़ाइनरी बनाने में निवेश करने और अपने एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक के ज़रिए 2.2 अरब अमेरिकी डॉलर की फ़ंडिंग से अहम मिनरल्स प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने की अलग से घोषणा की है.
ऑस्ट्रेलिया में अहम खनिजों का बड़ा भंडार

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पिछले कुछ महीनों में ट्रंप प्रशासन अमेरिका की कंपनी एमपी मटीरियल्स, कनाडा की कंपनी ट्रिलॉजी मेटल्स और लिथियम अमेरिकाज़ जैसी कंपनियों में निवेश की घोषणा कर चुका है.
इनके प्रोजेक्ट्स अमेरिका में हैं. इसके बदले अमेरिकी सरकार ने इन कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल की है.
ट्रंप और अल्बनीज़ की बैठक से पहले 'लिनास रेयर अर्थ्स' जैसी अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में उछाल आया.
लिनास को कुछ साल पहले अमेरिकी रक्षा विभाग से एक कॉन्ट्रैक्ट मिला था और वह टेक्सस में एक प्रोजेक्ट पर काम कर रही है.
व्हाइट हाउस ने जो फ़्रेमवर्क जारी किया है, उसमें इस समझौते के संबंध में सीमित जानकारी दी गई है, जो उसके लिए इस मुद्दे की संवेदनशीलता को दिखाता है.
ऑस्ट्रेलिया महत्वपूर्ण खनिजों का प्रमुख स्रोत है, लेकिन अमेरिका की तरह वह भी चीन पर निर्भर है.
चीन इन खनिजों की प्रोसेसिंग का सबसे बड़ा केंद्र है. इसके बाद ही ऐसे खनिजों का इस्तेमाल किया जा सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
















