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कर्नाटक की राजनीति में 'हनीट्रैप' का मामला क्या है, जिस पर विधानसभा में मचा हंगामा
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से बीबीसी हिंदी के लिए
कर्नाटक के सहकारिता मंत्री का आरोप है कि उनको 'हनीट्रैप' करने की कोशिश की गई थी, इस आरोप के बाद विधानसभा में हंगामा मच गया.
उनके इस दावे के बाद स्पीकर के आसन तक पहुंचकर विरोध करने की वजह से शुक्रवार को बीजेपी के 18 विधायकों को निलंबित कर दिया गया.
ऐसे में जब गृह मंत्री जी परमेश्वरा ने ये कहा कि जैसे ही सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना औपचारिक रूप से शिकायत करेंगे, तब इस मामले की पूरी जांच कराई जाएगी, इसके बाद बीजेपी विधायक और ज़्यादा आक्रामक हो गए.
गृह मंत्री ने विधानसभा में कहा, "उनके आरोप पर मैं कोई अनुमान नहीं लगा सकता हूं जब तक कि वो अपनी शिकायत में सबकुछ साफ़ नहीं कर देते है."
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मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने भरोसा दिलाया है कि जांच से कोई भी बच नहीं पाएगा. हालांकि इसके बाद भी विधानसभा में हंगामा ख़त्म नहीं हुआ.
विपक्षी दलों का हंगामा
विपक्षी दल बीजेपी और जेडीएस के विधायकों ने वेल में आकर हंगामा किया. मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के बजट भाषण के बाद वित्त विधेयक पास न हो, इसके लिए काग़ज़ फाड़े और वे स्पीकर के आसन पर चढ़ गए.
इसी दौरान वित्त विधेयक को सत्तारुढ़ पार्टी के सदस्यों के साथ ध्वनि मत से पारित करा लिया गया.
हंगामे के दौरान ही बीजेपी विधायकों ने अपनी नई मांग की. मांग है कि सरकार एक करोड़ तक के सार्वजनिक ठेकों में अल्पसंख्यकों के लिए प्रस्तावित 4 फ़ीसदी आरक्षण वाले विधेयक को वापस ले.
सिद्दारमैया के पिछले मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान ऐसी ही आरक्षण की व्यवस्था अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ी जातियों के लिए की गई थी.
अब इस प्रस्ताव में मुसलमान, ईसाई, जैन, सिख आदि अल्पसंख्यक समूहों को आरक्षण की व्यवस्था पर बीजेपी ने बजट को 'हलाल बजट' कहा है.
हालिया मामले में निलंबन की घटना का असामान्य पहलू ये भी है कि कर्नाटक विधानसभा के इतिहास में पहली बार 18 सदस्य छह महीने की अवधि के लिए निलंबित किए गए हैं.
राजन्ना का क्या है कनेक्शन?
इससे पहले राजनीतिक गलियारों में गुरुवार को तब हलचल मच गई जब ये बात फैली कि कुछ मंत्रियों को 'हनीट्रैप' में फंसाने की कोशिश की गई है.
ऐसे में बीजेपी विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने सदन में खड़े होकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि विधायकों के बीच किस तरह की चर्चा चल रही है.
राजन्ना ने यतनाल को जवाब देते हुए कहा कि उन्हें 'हनीट्रैप में फंसाने की कोशिश की गई'. साथ ही उन्होंने ये भी दावा किया कि यह सिर्फ़ उन्हें ही नहीं बल्कि बीजेपी नेताओं के साथ भी ऐसी कोशिश की गई.
वो सिर्फ़ यहीं नहीं रुके उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए ये भी दावा कर दिया कि 'राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर 48 और मामले हैं.'
राजन्ना ने गृह मंत्री से गहन जांच की मांग करते हुए कहा कि 'सदन की गरिमा' को सुरक्षित रखा जाना चाहिए. गृह मंत्री परमेश्वरा ने राजन्ना से कहा कि अगर वो लिखित अनुरोध दें तो गहन जांच का आदेश देने के लिए तैयार हैं.
विधानसभा में इस बयान से थोड़ा पहले ही लोक निर्माण विभाग मंत्री सतीश जारकीहोली ने पत्रकारों से कहा था कि इस तरह की घटनाएं बीते दो दशकों से हो रही हैं. उन्होंने कहा, "कांग्रेस, बीजेपी और जेडीएस हर पार्टी में इसके पीड़ित हैं."
सतीश जारकीहोली बीजेपी विधायक रमेश जारकीहोली के भाई हैं. बीजेपी सरकार में मंत्री रहे रमेश ने तब अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था जब महिला के साथ उनकी एक कथित आपत्तिजनक सीडी सार्वजनिक हुई थी.
राजन्ना ने विधानसभा में बयान में कहा, "कर्नाटक सीडी की राजधानी बन चुकी है."
बीजेपी नेता और एमएलसी सीटी रवि ने सवाल किया है कि 'हनीट्रैपिंग का किंगपिन कौन है?'
किस तरह का राजनीतिक खेल जारी है?
बीते महीने से जारी इन बयानों के बाद से राजनीतिक हलकों में ये भी चर्चाएं हैं कि ये सब सत्तारुढ़ कांग्रेस पार्टी के अंदर टकराव को भी दिखाता है.
लेकिन इन बयानों में ये भी चर्चा की बात है कि इनमें बीजेपी नेताओं के नाम भी लिए जा रहे हैं.
नाम न सार्वजनिक करने की शर्त पर एक पूर्व विधायक ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "ये एक राजनीतिक खेल है जो सभी पार्टियों पर असर डाल रहा है. यह कांग्रेस की अंदरूनी कलह हो सकती है, लेकिन इसका असर बीजेपी पर भी समान रूप से पड़ रहा है. ये मत भूलिए कि बीजेपी तक में गुटबाज़ी बहुत है."
हालांकि, बीजेपी नेताओं ने मुख्यमंत्री के इस्तीफ़े की मांग की है.
विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने कहा है, "वो (मुख्यमंत्री सिद्दारमैया) अपने मंत्रियों को सुरक्षित नहीं रख सकते हैं. उन पर कैसे राज्य के लोगों को सुरक्षित रखने के लिए भरोसा किया जा सकता है."
विधायकों के निलंबन के बाद बीजेपी और जेडीएस विधायकों ने विधानसभा से राज भवन तक मार्च किया. विधायकों ने गवर्नर थावरचंद गहलोत से अपील की कि सार्वजनिक ठेकों में 'मुसलमानों को' आरक्षण देने वाले क़ानून को वो अनुमति न दें.
बीजेपी कर्नाटक के अध्यक्ष बीवाई विजेंद्र ने पत्रकारों से कहा कि 'मुख्यमंत्री को मुस्लिम लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए फ़ंड की व्यवस्था करने की जगह हिंदू लड़कियों को लव जिहाद से बचाने के लिए फ़ंड की व्यवस्था करनी चाहिए.'
कांग्रेस ने साफ़ किया है कि '4.09 लाख करोड़ के बजट में से सिर्फ़ एक फ़ीसदी या 4000 करोड़ अल्पसंख्यकों को आवंटित किए गए हैं.'
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित