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26/11 मुंबई हमला: पाकिस्तान में कहां तक पहुंची जांच?
- Author, जान्हवी मुले
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मुंबई में हुए 26/11 के चरमपंथी हमले के 13 साल बीत चुके है. इस हमले को लेकर पाकिस्तान में भी मामला दर्ज हुआ था, लेकिन उसमें कोई प्रगति नहीं हुई.
26 नवंबर 2008 को भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक चरमपंथी हमला हुआ. इस हमले में 160 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी और इसने पूरे देश को दहला दिया था.
हमले की जांच के दौरान भारत ने आरोप लगाया कि हमले के तार पाकिस्तान से जुड़े थे. भारत ने इस हमले के लिए लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के संस्थापक और इससे जुड़े धर्मार्थ संगठन जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद की गिरफ़्तारी की मांग की थी.
भारत ने इस संबंध में पाकिस्तान को कई डोजियर भेजे. इसके आधार पर पाकिस्तान में सात लोगों को अभियुक्त बनाया गया.
लेकिन 26/11 के हमलों के सिलसिले में किसी भी मुख्य अभियुक्त पर न तो मुक़दमा चलाया गया और न ही उसे दोषी ठहराया गया.
पाकिस्तान की अदालत में क्या हुआ था?
इस मामले में ट्रायल रावलपिंडी के अदियाला जेल कोर्ट में शुरू हुआ था. इस संबंध में भारत और पाकिस्तान की ओर से परस्पर विरोधी दावे किए गए थे.
भारत ने कहा है कि बार-बार सबूत देने के बावजूद पाकिस्तान ने अभियुक्तों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की है. जबकि पाकिस्तान का कहना है कि भारत ने कोई ठोस सबूत नहीं दिया.
इस संबंध में बचाव पक्ष के वकील रिजवान अब्बासी ने बीबीसी को बताया था कि भारत ने केवल ऐसे डोजियर (फाइलें) उपलब्ध कराए थे जिनका सबूत के तौर पर अदालत में कोई मूल्य नहीं था. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि भारतीय गवाहों को मुक़दमे के लिए पाकिस्तान नहीं भेजा गया था.
उन्होंने बताया, "इस मामले में कोई सबूत नहीं है, केवल आरोप हैं. पाकिस्तान ने भारत से 24 गवाह भेजने का अनुरोध किया था. भारतीय गवाहों को अक्सर तलब किया जाता था. विदेश मंत्रालय को पत्र लिखे गए हैं. इस मामले में पक्ष रखने के लिए ज़िम्मेदारी के तौर फोकल पर्सन नियुक्त किया गया था. लेकिन भारत की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है कि गवाह आएंगे या नहीं."
मार्च 2012 और अक्टूबर 2013 में, एक पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने सबूत इकट्ठा करने के लिए भारत का दौरा किया. हालांकि, अब्बासी ने दावा किया कि पहला दौरा असफल रहा और दूसरे दौरे के दौरान भारत ने गवाहों से बात करने की अनुमति नहीं दी.
लोक अभियोजक अकरम कुरैशी ने भी देरी के लिए भारत को ज़िम्मेदार ठहराया. "भारत की लापरवाही के चलते मामला मजबूत नहीं हो पाया. भारत ने हमें महत्वपूर्ण सबूत नहीं सौंपे हैं."
भारत में मामले से जुड़े भारत के वरिष्ठ लोक अभियोजक उज्जवल निकम ने बीबीसी को बताया कि इस संबंध में भारत की स्थिति क्या है.
उन्होंने बताया, "हमारे गवाह वहां नहीं जाएंगे, क्योंकि उनकी जान को ख़तरा हो सकता है. यदि वे यहां आना चाहते हैं, वास्तव में आतंकवाद से लड़ना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है."
उन्होंने यह भी कहा, 'हमने पाकिस्तान सरकार को सबूत भेज दिए थे. हमने कहा था पाकिस्तान के न्यायिक आयोग को भारत आने दें. तब वे यहां आए थे और उन्होंने चार से पांच गवाहों से जिरह की थी."
इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता शुमैला जाफ़री कहती हैं कि दोनों देशों ने इसी तरह के आरोप दोहराए हैं. नतीजतन, पाकिस्तान में 26/11 के हमलों के कथित साजिशकर्ताओं के ख़िलाफ़ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.
इस मामले के मुख्य अभियुक्तों के ख़िलाफ़ भी कोई क़दम नहीं उठाया गया.
हाफ़िज सईद अब कहां है?
मुंबई हमलों के बाद, लश्कर-ए-तैयबा के नेता हाफ़िज सईद और इसके सह-संस्थापक जकीउर रहमान लखवी पर मुकदमा चलाने की मांग की गई थी.
हाफिज सईद इस समय लाहौर की भारी सुरक्षा वाली कोट लखपत जेल में बंद है. पाकिस्तान की चरमपंथरोधी अदालत ने 2020 में मनी लॉन्ड्रिंग के तीन मामलों में हाफ़िज सईद को पांच, पांच और 15 साल की सजा सुनाई है.
हाफ़िज सईद को अमेरिका 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी' करते हुए उसके बारे में जानकारी देने पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित किया था.
अमेरिका में 9/11 के हमलों के बाद से कई बार हाफ़िज को पाकिस्तान में उनके घर पर नज़रबंद रखा गया है, लेकिन कोई मामला दर्ज़ नहीं किया गया.
मुंबई हमलों से पहले, भारत ने हाफ़िज सईद पर भारतीय संसद पर 2001 के हमले और 2006 के मुंबई बम विस्फोटों के पीछे होने का आरोप लगाया था.
लेकिन यह भी पता चला कि उसके पाकिस्तानी सेना के कुछ अधिकारियों के साथ घनिष्ठ संबंध थे और इसीलिए सईद पर मुक़दमा नहीं चलाया जा रहा था.
इस बीच, 2018 में, चरमपंथियों के वित्तीय मामलों और मनी लॉन्ड्रिंग पर नज़र रखने वाली संस्था फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF)ने पाकिस्तान को एक ग्रे सूची में रखा.
इसके बाद जुलाई 2019 में अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण आतंकवादी गतिविधियों को वित्तीय मदद देने के आरोप में हाफ़िज को गिरफ़्तार किया गया था. पिछले साल सईद को मनी लॉन्ड्रिंग के अलग अलग मामलों में पांच, पांच और 15 साल की सजा सुनाई गई थी.
जकीउर रहमान लखवी के साथ क्या हुआ?
मुंबई हमलों के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने जकीउर रहमान लखवी को भी 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी' घोषित किया था. लखवी को मुंबई हमले के कुछ ही दिनों बाद सात दिसंबर, 2008 को गिरफ़्तार किया गया था.
अप्रैल, 2015 में लखवी को जमानत पर रिहा किया गया था. हाफ़िज सईद के बाद, लखवी पर चरमपंथी गतिविधियों की फंडिंग करने का आरोप लगाया गया था.
लखवी पर मेडिकल डिस्पेंसरी चलाने और चरमपंथी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने का आरोप था. जनवरी 2021 में कोर्ट ने लखवी को तीन साल जेल की सजा सुनाई थी.
अमेरिकी विदेश विभाग ने उस समय ट्वीट किया था कि मुंबई हमलों के लिए भी लखवी को भी ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.
26/11 को वास्तव में क्या हुआ था?
10 चरमपंथी हमलावरों ने समुद्र के रास्ते मुंबई में प्रवेश करने के बाद लियोपोल्ड कैफे, सीएसएमटी स्टेशन, दो पांच सितारा होटल ताज और ओबेरॉय और नरीमन हाउस पर हमला किया.
चरमपंथियों और पुलिस के बीच क़रीब 60 घंटे से अधिक समय तक संघर्ष चलता रहा. इस संघर्ष में हेमंत करकरे, अशोक कामटे, विजय सालस्कर के अलावा हेड कांस्टेबल तुकाराम ओम्बले और एनएसजी कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन सहित 160 से अधिक लोग मारे गए थे.
10 हमलावरों में से केवल अजमल कसाब को ज़िंदा पकड़ा गया. कसाब को पुणे की यरवदा सेंट्रल जेल में 21 नवंबर, 2012 को फांसी दी गई.
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