You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
किसान आंदोलन के चलते हरियाणा की खट्टर सरकार पर मंडराता संकट
- Author, सत सिंह
- पदनाम, रोहतक से, बीबीसी हिंदी के लिए
पंजाब से उठा किसान आंदोलन हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान समेत अन्य राज्यों में पहुंच गया है. देशभर के किसान दिल्ली की सीमा पर लाखों की संख्या में बैठ गए हैं. केंद्र सरकार के लिए जहां किसान आंदोलन मुसीबत बन गया है वहीं हरियाणा की भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार के सामने भी ख़तरा उत्पन्न हो गया है.
हरियाणा में 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा पूर्ण बहुमत तो नहीं पा सकी लेकिन उसने दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी यानी जजपा के 10 विधायकों के समर्थन से हरियाणा में सरकार बना ली.
जजपा को ग्रामीण इलाक़ों में वोट मिला था जो किसान मज़दूरों का वर्ग माना जा रहा है. किसान आंदोलन को लेकर हरियाणा सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं.
इसको लेकर सबसे ज़्यादा ख़तरा दुष्यंत चौटाला की पार्टी जजपा पर उत्पन्न हुआ. दुष्यंत चौधरी ख़ुद को चौधरी देवीलाल के असली वारिस बताते हुए किसान नेता के तौर पर हरियाणा में आगे बढ़ने लगे थे लेकिन अब किसान आंदोलन में जजपा का मौन धारण करना कहीं ना कहीं किसानों में ग़ुस्से का कारण बन गया है.
हालांकि दुष्यंत चौटाला के छोटे भाई दिग्विजय चौटाला ने कहा कि केंद्र सरकार और किसानों की मीटिंग पर हमारी ख़ास नज़र है और वो अगला फ़ैसला उसके बाद लेंगे. अपनी पार्टी जजपा को देवी लाल के उसूलों पर चलने वाली पार्टी कहकर दिग्विजय ने कहा कि कुछ भी हो जाये किसानो के हक़ में खड़े मिलेंगे.
अभी मौजूदा गठबंधन सरकार को एक साल पूरा ही हुआ है. उधर पंजाब से आए किसानों पर सिंघु बॉर्डर पर आंसू गैस के गोले और ठंडे पानी की बौछार की गई जिसको देखकर हरियाणा का किसान वर्ग ख़ासकर ग्रामीण इलाक़ों में खट्टर सरकार को लेकर नाराज़गी देखने को मिल रही है.
क्या करेंगे दुष्यंत चौटाला?
जींद ज़िला में जजपा का गठन हुआ था, वहां की खापों ने एक मीटिंग करके जजपा विधायकों से मिलकर भाजपा से गठबंधन तोड़ने का प्रेशर बनाने की बात कही है. खाप की मीटिंग में फ़सल और नस्ल बचाने की मुहीम में पंजाब के किसानों का साथ देने की अपील के साथ भाजपा को सबक़ सीखने की बात पर भी फ़ैसला हुआ.
बिनाइन खाप के नफ़े सिंह नैन ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि जो जो किसानों के वोट से विधायक बनकर सरकार में हिस्सेदारी किये बैठे हैं उन सबसे वो मिलेंगे और भाजपा खट्टर सरकार से समर्थन वापस लेने के लिए कहेंगे ताकि पंजाब के किसानों पर हुए अत्याचार का हिसाब किया जा सके.
दुष्यंत चौटाला, जींद के उचाना सीट से विधायक बनकर उप-मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं, वहीं उनकी माँ नैना चौटाला दादरी के बाढड़ा सीट से विधायिका हैं. दादरी के निर्दलीय विधायक सोमवीर सांगवान ने खापों के दबाव में चेयरमैन की कुर्सी से इस्तीफ़ा देने के बाद सरकार से अपना समर्थंन वापिस लेने की घोषणा की है.
बीबीसी से बात करते हुई, सोमवीर सांगवान ने कहा कि सरकार में हिस्सेदारी सबको अच्छी लगती है लेकिन किसान पर अत्याचार से समाज में काफ़ी रोष है और उसी के चलते उसने सरकार से समर्थन वापस लिया है.
"अगर किसान रहेगा तो राजनीति भी चलती रहेगी लेकिन जब किसान ही परेशान है तो उसे सरकार में रहने का कोई अधिकार नहीं". दादरी की सांगवान और फोगट खाप किसान आंदोलन को समर्थन दे चुकी है और दिल्ली बॉर्डर पर उनके साथ जा कर बैठ गयी हैं.
सोमवीर सांगवान को लेकर दिग्विजय चौटाला ने कहा कि किसानों के पक्ष में खड़ा होना अच्छी बात है. जजपा के राज्य अध्यक्ष निशान सिंह ने कहा कि पार्टी ने केंद्र से अपील की है कि किसानों की समस्या का हल किया जाए और उनकी एमएसपी की माँग जायज़ है.
निशान सिंह ने कहा, "हमारा मानना है कि किसानों की केंद्र सरकार से बातचीत में हल निकल आएगा. अगर ऐसा नहीं होता है तो फ़ैसला उसके बाद ही लिया जाएगा."
जजपा के हल्का अध्यक्ष विजय मंदोला बताते हैं कि किसानों ने उन पर दबाव बना रखा है कि जजपा पार्टी खुलकर किसानों के समर्थन में आए और उसी को लेकर वो पूर्व सांसद और जजपा के सर्वेसर्वा अजय चौटाला के पास सिरसा गए थे.
उन्होंने कहा, "मैं बाक़ायदा टाइम लेकर और कुछ किसानों को साथ लेकर अजय चौटाला से मिलने सिरसा गया था और जैसे ही मैंने ये कहा कि जजपा को किसानों के साथ मिलकर साथ आना चाहिए और इस सरकार से अपना समर्थन वापस लेना चाहिए. उन्होंने मुझे बाहर निकाल दिया ये बोलकर कि पार्टी का फ़ैसला वो ख़ुद करेंगे", विजय ने आरोप लगाया. विजय ने कहा कि शाम तक उनको पार्टी से बाहर निकलने का पत्र जारी जारी करवा दिया गया.
जजपा की मुश्किलें
दुष्यंत चौटाला की जजपा के भाजपा को समर्थन देने के कुछ समय पश्चात ही पार्टी के नारनौंद विधायक राम कुमार गौतम ने पार्टी से बग़ावत शुरू कर दी थी. अनेको बार खुलकर पार्टी के शिर्ष नेता दुष्यंत चौटाला को सारे मंत्रालय ख़ुद तक ही सीमित रखने का आरोप लगाया था. कई बार मनाने के प्रयास पर भी राम कुमार गौतम ने दुष्यंत चौटाला के ख़िलाफ़ खुलकर बोलने से परहेज़ नहीं किया. हिसार के बरवाला विधायक और पार्टी के नेता जोगी राम सिहाग ने किसानों के तीन कृषि क़ानूनों के चलते चेयरमैन का पद अस्वीकार कर दिया.
जोगी राम सिहाग ने बताया, "जब तक तीन कृषि क़ानूनों के अंदर सुधार नहीं किया जाता मैं कोई पद कैसे स्वीकार कर सकता हूँ." पार्टी के टोहाना विधायक देविंदर बबली भी कई बार सरकार के ख़िलाफ़ अपना विरोध दर्ज करवा चुके हैं.
लॉकडाउन में हुए शराब घोटाले और रजिस्ट्री घोटाले को लेकर कई सवाल दुष्यंत चौटाला पर उठे थे क्योंकि दोनों मंत्रालय आबकारी और राजस्व उनके पास थे.
वोट किसका, सपोर्ट किसी को?
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस पार्टी से विपक्ष के नेता भूपिंदर सिंह हुडा ने कहा कि 2019 में हरियाणा में बेमेल सरकार बनी. जजपा को भाजपा के ख़िलाफ़ जनादेश मिला जिसका दुष्यंत चौटाला ने सम्मान नहीं किया और भाजपा से कुर्सी के ख़ातिर समझौता कर लिया.
उन्होंने कहा, "जिनका वोट लिया था उनसे पूछा भी नहीं और सिर्फ़ कुर्सी बचाने के लिए सरकार में बैठ जाने से लोग नाराज़ भी हैं और परेशान भी हैं. लोगों की भावना इस सरकार के ख़िलाफ़ हैं."
ये पूछने पर कि क्या कांग्रेस पार्टी को हरियाणा में सरकार बनाने का मौक़ा मिल सकता है, इस पर हुडा ने कहा, 'बड़ा सवाल किसान का है. उनका समाधान होना चाहिए बाक़ी जो भी होगा वो देखा जाएगा.'
भाजपा के आईटी सेल मेंबर राजबीर रोहिल्ला को प्रधान मंत्री मोदी भी ट्विटर पर फॉलो करते हैं. उनका कहना है कि किसानों को इस हाल में देखना बहुत ही पीड़ादायक और एमएसपी की लिखित गारंटी होनी ही चाहिए. यह पूछने पर कि क्या भाजपा-जजपा सरकार को ख़तरा पैदा हो गया हैं तो उन्होंने कहा सरकार को कोई ख़तरा नहीं हैं क्योंकि दुष्यंत के पास दूसरा विकल्प नहीं है.
उन्होंने कहा, "हरियाणा में भाजपा से दूसरा विकल्प कांग्रेस के भूपिंदर हुडा हैं जिनके पास 31 सीटें हैं लेकिन जाट नेता होने के कारण दुष्यंत का उनके साथ जाकर सरकार बनाने का जोख़िम उठाना महंगा पड़ सकता हैं."
हालांकि हरियाणा बीजेपी के एक बड़े नेता ने कहा कि सबसे बड़ी मुश्किल इस बात की है कि गांव स्तर पर लोग दिल्ली आंदोलन में पहुंचने लगे हैं और खाने पीने की चीज़ें किसान आंदोलन में पहुंचाने लगे हैं.
हरियाणा भाजपा के मीडिया इंचार्ज राजीव जैन ने कहा कि गठबंधन सरकार पूरी तरह सुरक्षित हैं और उसको कोई ख़तरा नहीं है. जहां तक किसानो की बात हैं केंद्र सरकार किसानों की बात एमएसपी पर मान लेगी.
उन्होंने कहा, "सरकार टूटने जैसी बातें विपक्ष के लोग उठाते हैं पर हमारी सरकार पूरी तरह सुरक्षित है."
वैसे 90 सदस्यी हरियाणा विधानसभा में बीजेपी के 40 विधायक हैं, दुष्यंत चौटाला के पास 10 विधायक हैं जबकि कांग्रेस के पास 31 विधायक हैं. राज्य में निर्दलीय विधायकों की संख्या सात है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)