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यशवंत सिन्हा ने बीजेपी छोड़ने की घोषणा की
पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने शनिवार को पटना में भारतीय जनता पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी. वो पहले से ही पार्टी से नाराज़ चल रहे थे.
पटना में आयोजित एक कार्यक्रम में सिन्हा ने कहा कि वो आज से बीजेपी से सभी तरह के संबंधों को ख़त्म करते हैं. इसके साथ ही उन्होंने सक्रिय राजनीति से भी संन्यास लेने की घोषणा कर दी.
पटना में चल रहे राष्ट्रीय मंच के एक कार्यक्रम में उन्होंने यह घोषणा की. उन्होंने कहा, "लंबे अरसे से भारतीय जनता पार्टी के साथ जो मेरा संबंध है आज मैं वो संबंध विच्छेद कर रहा हूँ."
उन्होंने अपने फैसले की मूल वजह ये बताई की आज देश मे लोकतंत्र खतरे में है.
पटना में मौजूद मनीष शांडिल्य के मुताबिक भाजपा छोड़ने की घोषणा ने ठीक पहले यशवंत सिन्हा ने कहा, "मेरा दिल आज भी देश मे लोकशाही की चिंता में धड़कता है. चार साल पहले मैंने राजनीति से सन्यास लिया था और आज दलगत राजनीति से सन्यास ले रहा हूँ. अब मैं किसी भी दल का सदस्य बनने नहीं जा रहा. अब मैं अपने साथियों के साथ मिलकर देश में लोकतंत्र बचाने के लिए जबरदस्त आंदोलन चलाऊंगा."
उन्होंने आगे कहा कि आगे से मेरे जीवन का हर पल इसमें जाएगा कि देश मे लोकतंत्र की खैरियत कैसे रहे. लोकशाही है तो देश है, लोकशाही है तो हम हैं, लोकशाही है तो हमारी स्वतंत्रता है.
राष्ट्र मंच के कार्यक्रम में पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में राजद के तेजस्वी यादव, कांग्रेस की रेणुका चौधरी, आप के संजय सिंह और आशुतोष और रालोद के जयंत चौधरी सहित कई नेता मौजूद हैं.
हालांकि केंद्र की मोदी कैबिनेट में यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा अब भी मंत्री हैं.
भारत सरकार में कई सालों तक एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में अलग-अलग पदों पर काम करने वाले यशवंत सिन्हा 1984 में जनता पार्टी में शामिल हुए थे.
साल 1996 में उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में काम किया. इसके बाद बीजेपी की सरकार में वह वित्त मंत्री बने. इसके अलावा उनके पास विदेश मंत्रालय का पोर्टफोलिया भी रहा.
पीएम मोदी का समर्थन
बीबीसी हिन्दी से ख़ास बातचीत में उन्होंने कहा था, 'मैंने ही भाजपा के पीएम उम्मीदवार के रूप में मोदी का समर्थन किया था. ये भी कहा था कि अगर ऐसा किया गया तो हम ज़ोरदार जीत दर्ज करेंगे.''
''बाद में दूसरे नेताओं ने भी यही बात कही और उन्हें पीएम उम्मीदवार बनाया भी गया. ऐसा ही हुआ, हम जीते भी. और तो और उस समय मेनिफ़ेस्टो बनाने में मैं शामिल रहा था और मोदी ने बतौर पीएम उम्मीदवार और पद संभालने के बाद मेनिफ़ेस्टो को गौर से देखा भी था.''
सिन्हा ने कहा, ''हमने बहुत सारे वादे किए थे. और अब जब पीछे मुड़कर देखता हूं तो व्यक्तिगत रूप से दुख होता है क्योंकि इनमें से कई वादे हम पूरे नहीं कर पाए हैं.''
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