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'नोटंबदी का असर कश्मीर में पत्थरबाज़ी पर नहीं'
- Author, रियाज़ मसरूर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर के लोगों ने रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के बयान पर वहां के लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
पर्रिकर ने कहा था कि 500 और 1000 नोट बंद होने की वजह से घाटी में अमन बहाल हो गया है.
हालांकि समाज के बड़े तबक़े का मानना है कि इस फ़ैसले का चरमपंथी नेटवर्क पर असर पड़ेगा.
श्रीनगर के जाने-माने डॉक्टर साहिब जलाली विश्वास से नहीं कह सकते कि नोटबंदी से चरमपंथियों पर कोई असर होगा या नहीं.
लेकिन वो पर्रिकर के इस मामले को कश्मीर में पत्थरबाज़ी से जोड़ने के ख़िलाफ़ हैं.
उन्होंने कहा, "जानकार लोग बताएंगे कि नए वित्तीय फ़ैसले से आतंकवाद से लड़ने में मदद मिलेगी या नहीं, लेकिन उसे यहां होने वाली पत्थरबाज़ी से जोड़ना ग़लत है."
जलाली ने बीबीसी से कहा, "लड़के इसलिए पत्थर फेंकते हैं, क्योंकि उनके नाते-रिश्तेदार मारे गए हैं या अपाहिज़ बना दिए गए हैं. अगर उनपर होने वाला अत्याचार रुक जाएगा, तो पत्थरबाज़ी भी रुक जाएगी."
एक युवा कारोबारी मसाब अहमद ने बीबीसी से कहा, "हां, मुझे लगता है कि मनोहर पर्रिकर का कहना सही है. करेंसी से जुड़े फ़ैसले ने आतंक में शामिल लोगों के संसाधन सुखा दिए हैं. इससे कश्मीर के हालात में सकारात्मक असर होगा."
यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट सना का कहना है, "अगर पत्थरबाज़ी की वजह पैसा होता, तो मामला कश्मीर के कुछ हिस्सों तक सीमित रहता. लेकिन हमने पूरा कश्मीर सड़कों पर देखा है. ऐसा तब होता है, जब लोगों में गुस्सा हो. उन्हें पैसा देकर ऐसा नहीं कराया जा सकता."
बीते कुछ साल के दौरान कश्मीर में सशस्त्र हिंसा में कमी आई है, लेकिन स्थानीय लोग अब चरमपंथियों से जुड़ने लगे हैं.
एक पुलिस अधिकारी ने बीबीसी को बताया, "आतंकवादी अब पाकिस्तान नहीं जाते. वो अंडरग्राउंड होते हैं, पुलिस से हथियार छीनते हैं और सुरक्षाबलों पर हमले करते हैं."