You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कश्मीर के अख़बारों में भारत के रवैये की निंदा
- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- पदनाम, ख़बरों की रिपोर्टिंग और विश्लेषण
कश्मीर के अख़बार उड़ी में हुए चरमपंथी हमले के बाद भारत सरकार के रवैये की आलोचना कर रहे हैं.
भारत ने 18 सितंबर को उड़ी में हुए चरमपंथी हमले के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराया है. इस हमले में 18 सैनिकों की मौत हो गई थी.
भारत और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के अख़बार मानते हैं कि भारत को पहले अपने घर को दुरुस्त करना चाहिए और फिर दूसरों पर उंगली उठानी चाहिए.
भारत प्रशासित कश्मीर के अख़बार
अंग्रेज़ी भाषा का अख़बार राइज़िंग कश्मीर कहता है, "अपनी-अपनी राजनीतिक विचारधाराओं से हटकर सभी कश्मीरी मानते हैं कि भारत सरकार कश्मीर मसले को लेकर कभी गंभीर नहीं रही है. इसीलिए वो विभिन्न पक्षकारों के साथ सार्थक संवाद से बचती रही है."
कश्मीर टाइम्स ने 19 सितंबर के अपने संपादकीय में लिखा, "उड़ी हमला कश्मीर मसले से 'असफल और अपर्याप्त तरीके से निपटने' के एक प्रतिबिंब की तरह है."
अख़बार आगे लिखता है कि, "ऐसा सोचना मूर्खतापूर्ण होगा कि भारत उड़ी मामले पर संयुक्त राष्ट्र महासभा या किसी अन्य फ़ोरम में अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति बटोरने में क़ामयाब रहेगा."
पाकिस्तानी कश्मीर के अख़बार
पाकिस्तानी कश्मीर के अख़बारों ने उड़ी हमले के बाद भारत के रुख की निंदा की है.
मीरपुर के उर्दू अख़बार शाहीन ने लिखा है, "भारत कश्मीर में हो रही बर्बरता से लोगों का ध्यान हटाने के लिए उड़ी के बहाने नए हथकंडे अपना रहा है.
मुज़फ़्फ़राबाद के उर्दू अख़बार मुहासिब ने 20 सितंबर के संपादकीय में लिखा, "ऐसे लोगों से क्या उम्मीद की जा सकती है जिनके बच्चे अंधे होकर अस्पतालों में पड़े हैं और जिनका भविष्य क़ब्रों में दफ़्न है."
(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की ख़बरें ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं.)