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जब मैं 'काका' से मिला...

ज़ुबैर अहमदज़ुबैर अहमद|गुरुवार, 19 जुलाई 2012, 21:12 IST

कई साल पहले जब मैं राजेश खन्ना से उनके घर मिलने गया तो वो अपनी लुंगी कस रहे थे और बाल काले कर रहे थे. दिल्ली आए उन्हें कुछ ही हफ्ते हुए थे - नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने. मैं एक छोटे शहर का रहने वाला अदना सा रिपोर्टर.

मेरे सामने उनकी छवि थी एक बड़े सुपर स्टार की लेकिन सिल्क लुंगी और बनियान में लिपटे राजेश खन्ना एक साधारण आदमी नज़र आ रहे थे. उनके इर्द गिर्द युवा कांग्रेस के नेता चक्कर लगाया करते थे जिनपर उन्हें बिलकुल भरोसा नहीं था. वो खुद को दिल्ली में तनहा महसूस करते थे.

मैंने पूछा अब भी आप खुद को तनहा महसूस करते हैं तो उन्होंने कहा सियासत अभिनेताओं की समझ से बाहर की चीज़ है. उनकी निजी ज़िन्दगी की अनिश्चित्ता उनकी सियासी ज़िन्दगी में भी दिखती थी.

एक बार युवा कांग्रेस के नेताओं के कहने पर वो दिल्ली के तिलक मार्ग पर धरना देने बैठ गए, उनकी मांग थी वो दिल्ली पुलिस कमिश्नर से बात करना चाहते हैं. सड़क पर ट्रैफिक जाम हो गया. मैं महसूस कर रहा था की वो अपने इस फैसले से खुश नहीं हैं.

उन्होंने मेरे कान में कहा क्या मैं ठीक कर रहा हूँ. मैंने कहा नहीं. तो वो वहां से फौरन उठ गए और सामने तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन जा कर अपनी मांग दोहराई. सन 2004 में जब मेरा तबादला मुम्बई हुआ तो इत्तफाक से मैं उनका पड़ोसी बन गया.

उनकी कोठी आशिर्वाद से हर रोज़ गुज़रता था और सोचता था क्या आज हमारी मुलाक़ात हुई तो वो हमें पहचानेंगे. और एक दिन हमारी मुलाक़ात हुई उनके घर पर और उन्होंने मुझे पहचान लिया. बिलकुल उसी अंदाज़ में मुझसे मिले जैसे दिल्ली में हम मिला करते थे. खुल कर.

दिल्ली की सियासत के अखाड़े में वो एक अनाड़ी खिलाडी थे. मेरी पहली मुलाक़ात के दौरान ही ट्रिपुल 5 सिगरेट फूंकते हुए उन्होंने कहा था वो यहाँ तनहा महसूस कर रहे हैं. वो सुपर स्टार के अपने स्टेटस के कारण अपनी दुनिया में रहना पसंद करते थे. तन्हाई से उनका चोली दामन का साथ था. लेकिन सबसे हंस कर गरमजोशी से मिलते थे.

मुझसे खुल कर बातें करते थे. पता नहीं मुझ पर उनके भरोसे का कारण किया था. शायद उन्हें मालूम था कि हमारी बातें किसी खबर का रूप धारण नहीं करेंगी. मुझे उनसे मिल कर हमेशा महसूस हुआ उन्हें एक ऐसे साथी की तलाश है जिस पर वो पूरी तरह से विश्वास कर सकें. उनसे मेरी आखिरी मुलाक़ात वर्ष 2009 में हुई थी. उस समय वो काफी दुबले और कमज़ोर नज़र आ रहे थे. लेकिन पहले से भी ज्यादा तनहा. शायद तन्हाई ही उन्हें मार गई.

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 18:37 IST, 20 जुलाई 2012 Mohd Anis:

    जुबैर जी आप राजेश खन्ना जी से दिल्ली में मिले और भाग्य ने आप को उनका पडोसी मुंबई में बना दिया और जैसा आप ने लिखा है कि जब फिर आप मिले तो खन्ना साहब ने आप को पहचान लिया यह वाकई फख्र की बात है , आज हम गर्व से कह सकते हैं कि जो बुलंदी खन्ना साहब को हासिल थी वो सब के नसीब में नहीं है आज भी राजेश खन्ना जी हम सब के बीच बहुत आदर से याद किये जायेंगे , सजल नेत्र से एक बार फिर खन्ना साहब को भावभीनी विदाई .ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे

  • 2. 10:31 IST, 21 जुलाई 2012 BHEEMAL Dildarnagar:


    मैं राजेश खन्ना जी को ह्रदय की अनंत गहराई से एक भलामानुस / प्रेम की तस्वीर समझता रहा , मैंने चुपके-चुपके उनकी आराधना देखी और उस उम्र में उऩकी दीवानगी छा गयी , एक हूक सी उठती है ... उफ़ !. इतने अच्छे प्रेम खन्ना के बारे मैं लिखने की हिम्मत ही नहीं मुझमे . शायद ... सिर्फ शायद .. खुशवंत सिंह जी का एक नोवेल है ( औरतें ) पढ़ कर प्रेम खन्ना को आप लोग समझ सकेगें .

  • 3. 15:10 IST, 21 जुलाई 2012 yogesh dubey:

    जुबैर जी , ब्लॉग के लिए धन्यवाद. काका बेहद अच्छे अभिनेता थे.मैने उनकी बहुत सी फिल्में देखी है.परमेश्वर उनकी आत्मा को शांति दे.

  • 4. 20:57 IST, 21 जुलाई 2012 janak dangol:

    उफ्फ .... तन्हाई ने आखिर सुपरस्टारको हमेशा के लिए सुला दिया.

  • 5. 10:26 IST, 22 जुलाई 2012 gaurava mishra:

    जब कोई कोमल ह्रदय भावुक इन्सान सफलता और शोहरत की सीढ़ी चढ़ता जाता है तब उसकी अपेक्षाएं अपनों से समाज से सदैव सकारात्मकता की बन जाती है. वो ये भूल जाता है कि उसे सफलता, इज्जत, शोहरत लोगो की अपेक्षाए पूरी करने पर ही मिली है. यह परिस्थिती बेहद नाजुक होती है. ऐसे में जब उसका दिल अपनों से टूटे या विश्वास को ठेस लगे तब वह जीवन के मायने समझने में अकेला पड़ जाता है. ऐसे ही इंसानों में से एक थे महान कलाकार सुपरस्टार स्वर्गीय राजेश खन्ना जी. मेरी श्रधांजलि उनको.

  • 6. 12:10 IST, 22 जुलाई 2012 jitendra joshi:

    जुबैर जी, आपको राजेश जी के साथ कई बार रहने का मौका मिला. मुझे लगता है कि एक पत्रकार होने के नाते अगर आप उनके तन्हा जिंदगी के पहलुओं को दुनिया के सामने लाते तो कम से कम उस दौर के लोग जिन्होंने राजेश खन्ना के साथ काम किया था,.उन्हे कम से कम याद तो आती. शायद गुमनामी का दौर कुछ तो कम होता!

  • 7. 12:14 IST, 22 जुलाई 2012 jitendra joshi:

    ईश्वर उनकी आत्मा को शांती दे !

  • 8. 00:43 IST, 25 अगस्त 2012 हर्षद खंदारे:

    शायद तन्हाई ही उन्हें मार गई.
    अनके अभिनय से भी उनकी तनहाई झलकती थी.
    एक सुपरस्टार का व्यक्तिगत जीवन कितना तन्हाई भरा हो सकता है, राजेश खन्ना जी उसका एक उदाहरण हैं. मगर उनकी इसी अदाकारी ने हमारे दिलों पर प्यार भरा राज किया है. उनकी जगह हमारे दिलों से कभी भी मिटाई नहीं जा सकती है.

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