चोरी की बीमारी
कुछ समय पहले एक पाकिस्तानी समाचार पत्र में खबर प्रकाशित हुई थी कि पाकिस्तान के विभिन्न ऐयरपोर्ट्स से पाकिस्तानी इंटरनेशनल एयरलाइन की लगभग एक हज़ार ट्रॉलियाँ गायब हो गई, जो यात्रा सामान ढोने के लिए इस्तेमाल करते हैं.
ताज़ा गुल यह खिला कि ब्रिटेन की ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस ने पीआईए को एक पत्र लिख कर सूचित किया है कि एयरलाइन के कुछ कर्मचारी होटल में रहते हुए गिलास, तौलिया, शैम्पू, टूथ पेस्ट जैसी वस्तुएँ भी अपने साथ ले जाते हैं और दुकानों से छोटी मोटी वस्तुएँ गायब करने की कोशिश करते हुए पकड़े भी गए हैं.
ब्रिटेन की पुलिस ने इस रुझान को खत्म करने के लिए ज़रुरी कदम उठाने का अनुरोध किया है और पीआईए प्रशासन का कहना है कि वह इन घटनाओं की जाँच कर रही है.
क्लेप्टोमैनिया (छोटी-मोटी वस्तुएँ चुराने की आदत) एक मनोवैज्ञानिक बीमारी है. मरीज को अक्सर यह एहसास नहीं होता है कि वह जो कर रहा है असल में नैतिक अपराध है. कहा जाता है कि ढाई से पाँच प्रतिशत आबादी इस रोग से ग्रस्त होती है और किसी भी वर्ग के किसी भी व्यक्ति को क्लेप्टोमैनिया की समस्या हो सकती है.
बादशाह जॉर्ज पंचम की रानी मैरी के बारे में कहा जाता है कि वह गहनों की काफी शौकीन थी मगर क्लेप्टोमैनिया से भी ग्रस्त थी. जब वह कभी अंगूठी या नेकलेस चुपके से अपने बैग में रखी लेती तो दुकानदार इस घटना को अनदेखा कर देता और रानी के नौकर खामोशी से रकम अदा कर देते.
लगभग तीस साल पहले पाकिस्तान की एक महिला वरिष्ठ राजनीतिज्ञ भी लंदन के एक डिपार्टमेंटल स्टोर से अंडरगार्मेंटस हैंड बैग में ले जाते हुए रोक ली गई थी.
विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने अपने अनुभव बताते हुए मुझे बताया कि फ़ाइव स्टार होटलों के कमरों में पर्दों और बिस्तर की चादरों से जूते साफ करने और कालीन पर शराब उड़ेलने की शिकायतों की तरफ़ हम ध्यान नहीं देते.
लेकिन सरकारी प्रतिनिधिमंडल में एक न एक क्लेप्टोमैनिक राजनीतिज्ञ, अधिकारी या पत्रकार जरूर होता है जो मामूली सस्ती वस्तुएँ गायब करने के कारण सरकारी अधिकारियों के लिए शर्मिंदगी का कारण बनता है.
क्लेप्टोमैनिया बीमारी का इलाज संभव है लेकिन जिस देश को क्लेप्टोक्रेसी (चोरों का शासन) जैसी बीमारी हो जाए तो उसका कोई मनोवैज्ञानिक इलाज नहीं.
क्लेप्टोक्रेसी ऐसी प्रणाली को कहते हैं जिसमें शासन वर्ग और उसके अधिकारी अंधे होकर सरकारी खजाना बाँट कर खाएं और चोरी पर सीना जोरी करते हुए लूटे हुए धन के बल पर अपनी राजनीतिक शक्ति बढ़ाते चले जाएं.
मुश्ताक सब्जी वाले के अनुसार, यहां दो तरह के लोग हैं. वह जिन्हें मौका मिल गया. वह जिन्हें मौका नहीं मिला. फुल स्टॉप ...

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कुछ मज़ा नहीं आया. लगता है कि यह वुसतुल्लाह ख़ान द्वारा नहीं लिखा गया. उनके भूत ने लिखा . पंच लाइन कुछ ख़ास नहीं है.
खान साहब ये बीमारी, खासकर क्लेप्टोक्रेसी तो हिंदुस्तान में भी है. लगा ही नहीं कि आप किसी और मुल्क की बात कर रहे हैं. चलिए खैर कितनी भी दुश्मनी क्यों न हो जाए, चोरी चाकरी जैसी हरकतों में हम दोनों मुल्क अभी एक ही लेवल पर हैं और एक दूसरे के साथी हैं!!
वुसतुल्लाह ख़ान के व्यंग्य बाण हमेशा की तरह लाजवाब.
सही कहा आपने मगर या बीमारी पाकिस्तान में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में फैली हुई है.
क्या खूब लिखा है जनाब. बहुत बढ़िया. आफ़रीन. किंतु जनाब आपने उम्मीद की जाती है कि कि आपकी कलम जनकल्याण का पौधा ही सींचेगी. इसलिए कृपया कुछ होमवर्क करें कि भारत और पाकिस्तान में लोगों ने हथियारों और सेना पर कितने अरब-खरब डॉलर ख़र्च किए हैं और अमरीका की जी हुजुरी की है. ये पैसा भारत पाकिस्तान के जनकल्याण में लगता तो कैसी तस्वीर होती.
जनाब वुसतुल्लाह ख़ान साहब, क्लेप्टोमैनिया तो मैंने सुना था लेकिन क्लेप्टोमेसी जैसे शब्द की जो खोज आपने की है इसके लिए आप को बहुत मुबारकबाद. भ्रष्टाचार हिंदुस्तान और पाकिस्तान के संदर्भ में इतना भोथरा हो गया है कि इसके उन्मूलन के नाम पर लोग दुकानदारी चलाने लगे हैं. अब तो शायद क्लेप्टोमेसी का इलाज हॉस्पिटल में ही संभव हो सकेगा. इस तरह के कैप्सूल और सुइयों की खोज करनी होगी जो इस संक्रमित बीमारी को कंट्रोल कर सके और एशिया के इन दोनों देशों को इस बीमारी से निजात दिला सके जिसके चलते दोनों देशों का वजूद खतरे में पड़ गया है.
यह बीमारी देश-समाज की सारी सीमाएं तोड़कर हर तबके में मौजूद है. शासन के स्तर पर यह गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी है. इसका इलाज है, मिस्र में हुआ है, लीबिया में हुआ अब पाकिस्तान की बारी भी हो सकती है.
जनाब जबसे मानव सभ्यता है समाज ऐसे ही चल रहा है, चूँकि हम आज के जमाने में हैं इसलिए आज हम त्रस्त हैं, सौ साल पहले लोक कुछ अलग तरह की समस्या से त्रस्त रहे होंगे और आनेवाले सौ साल बाद समस्या कुछ और होगी. पर होगी जरूर. क्यों...क्योंकि मानव बुद्धिजीवी प्राणी जो ठहरा.
बीमारी के लिए डॉक्टर को दिखाना चाहिए. क्या ऐसे डॉक्टर इस देश में हैं.