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कैसे भारत को कह दूँ महान?

रूपा झारूपा झा|मंगलवार, 03 अप्रैल 2012, 17:52 IST

मेरी पाँच साल की बेटी नई क्लास में गई है. नई टीचर और नई-नई बातें भी खूब करती है. स्कूल की दिनचर्या बताते हुए अचानक कहने लगी, आज एक नया गाना सिखाया गया-- भारत सबसे महान है..

ये महान क्या होता है और भारत है क्या महान.... अगर अख़बार पढ़ते हुए उस खबर पर नज़र ना जाती तो शायद टालने के लिए मैं कह ही देती कि हाँ सबसे महान है भारत..

लेकिन जैसे मुँह पर ताले पड़ गए थे.. आप सबने भी पढ़ी होगी वो ख़बर- एक बार फिर कम उम्र की घरेलू नौकरानी के साथ डाक्टर दंपति का दुर्व्यवहार, प्रताड़ना...ख़बर में उस लड़की के हवाले से लिखा था कि उसे भर पेट खाना नहीं दिया जाता था.

चिकोटी काटी जाती थी और उसकी चीख बाहर न पहुँचे इसके लिए मुँह को कपड़े से ठूँस कर बंद किया जाता था... कभी-कभी जूता भी ठूँस दिया जाता था.

"ऐसी घटनाएँ तो छपती ही रहती हैं.. एनजीओ ने बढ़ा-चढ़ा कर रिपोर्ट लिखवाई होगी.. नौकरानियों का तो यही हाल है जिस थाली में खाओ उसी में छेद करो"....

अगर मैंने पिछले पांच साल से एजेंसी के जरिए मेड्स न रखी होती तो शायद पड़ोस की महिलाओं की इन दलीलो को सच भी मान बैठती पर अलोक धन्वा की एक कविता की एक पंक्ति उधार ले सकूँ, मुझे भी मालूम है 'कुलीनता की हिंसा"..

जूलियानी की याद बरबस ही आ गई..

जब मेरे घर एक एजेंट के ज़रिए वो पहली बार आई तो मुझे एक लंबी स्वस्थ लड़की का इंतजार था. जूलियानी बहुत छोटी सी.. दुबली-पतली लड़की थी.. लगता किसी ने उसे बच्ची रहने नहीं दिया और वो बड़ी हो नहीं पाई..

बोलती बहुत धीमे स्वर में.. घर में मदद करने के लिए एक कामकाजी मां के लिए किसी भी तरह की लड़की का मिलना मुँह-मांगे वरदान जैसा होता है..

मैंने सोचा कोई बात नहीं ठीक से खाएगी पिएगी तो स्वस्थ हो जाएगी.. बोलने भी लगेगी..
बोलने तो लगी पर स्वस्थ नही हो पा रही थी. डाक्टरी जांच से पता चला टीबी है. और लंबे अरसे से. मैंने पूछा पहले जहाँ काम करती थी वहां बीमार होती थी..

उसने जवाब दिया जो मैं शायद जानती थी, हाँ थोडा बुखार होता रहता था.. फिर ठीक हो जाता था. कभी डाक्टर के पास नहीं गई.. एक साल में कभी ले नहीं गई मैडम..

इलाज शुरू होने के तुरंत बाद ही वो स्वस्थ होने लगी.. खुश भी रहती थी और फिर एक दिन वो भाग गई.. एक पहचान के लड़के के साथ ...

फिर लौट भी आई दो दिनो बाद.. लड़का शादी-शुदा परिवार वाला था..

उसे लेने एजेंट आया और उससे पहले कि मैं उसे रोकती कस कर उसे तमाचा मारा..
मैं झट से उसे अंदर ले गई. पूछा आगे क्या करना है.. एजेंट के साथ जाना है या घर वापिस जाना है..

आश्चर्य था कि उसका चेहरा एक दम सपाट था..

घर चली जाओ जूलियानी, मै इंतज़ाम कर देती हूं,
नहीं दीदी वहाँ जाकर क्या करना है..
एजेंट के साथ जाओगी..
मन तो नही है.. वो भी मुझसे ज़बरदस्ती करता है..कई बार मना करती हूं फिर भी..
कहता है जीजा साली का रिश्ता है, छेडूंगा..

चुपचाप मेरी तरफ देखने लगी..
कातर दृष्टि से....

मुझे पता था वो जानना चाहती थी कि क्या वो मेरे पास काम करती रह सकती है?

मुझे अपनी छोटी बच्ची की सुरक्षा याद आई, मेरे पीछे बिल्कुल सुनसान मेरा घर फिर किसी का आना जाना शुरू कर दिया इसने तो... लड़की का मामला है किसी बड़ी मुसीबत मे ना पड़ जाउं..

जूलियानी को मेरी खामोशी से मेरे जवाब का अंदाज़ा हो गया होगा..

दुल्हन की तरह सजी जूलियानी झट उठ कर बोली, एजेंट के साथ जाउंगी...

जनवरी की ठंडी और गहरी रात में गुम होती चली गई जुलियानी.. केवल उसके दुपट्टे का गोटा दूर तक झिलमिलाता रहा..

और मुझे याद आई कुलीनता की हिंसा वाली पंक्ति.... अपनी बिटिया को ये कहने में शर्म सी महसूस हुई कि भारत सबसे महान है अगर महान होना कोई पोज़िटिव बात है तो......

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 19:41 IST, 03 अप्रैल 2012 अभिषेक त्रिपाठी:

    आपका ब्लॉग संतुलित है पर मेरा मानना है कि आंशिक तौर पर आचरणहीन या लापरवाह लोगों के लिए भारत की महानता पर शक करना या ऊँगली उठाना उचित नहीं है. यकीन मानिए भारत महानी ही है.ये वैश्विक सत्य है.

  • 2. 20:21 IST, 03 अप्रैल 2012 SRIMAN:

    दुखद

  • 3. 20:22 IST, 03 अप्रैल 2012 अमित गुप्ता:

    एक छोटी सी घटना के बाद मुझको एक भारतीय होने पर बहुत शर्म लगी जब एक इंसान की, वो भी एक बीमार युवती, जो चल नहीं सकती थी और मुसीबत में थी, और साथ में उसका बच्चा, जिसने 4-5 दिन से खाना नहीं खाया था, उस वक्त उसकी मदद के लिए मैंने अपने सांसद से लेकर, राष्ट्रपति भवन तक बात पहुँचाई, मगर वहाँ के एक अधिकारी ने जब कहा कि तुमको मदद करनी हो तो करो, हमें परेशान मत करो, तब मुझे बहुत रोना आया और शर्म भी एक भारतीय होने पर.

  • 4. 20:33 IST, 03 अप्रैल 2012 राहुल:

    ये देश की राजनीति की समस्या है. भारत के बारे में आपकी सोच सही है. मैं एक छात्र हूँ और अभी भारत को जानने की कोशिश कर रहा हूँ.

  • 5. 20:48 IST, 03 अप्रैल 2012 महिपाल सिंह राठौड़:

    सच कहूँ इसने मन को झकझोर कर रख दिया है. बड़ा ही मार्मिक वर्णन किया है आपने.

  • 6. 21:24 IST, 03 अप्रैल 2012 मोहम्मद खुर्शीद आलम, औरंगाबाद, बिहार:

    रूपा जी, कोई देश महान नहीं होता, अपना वतन महान होता है. मैं भारत का हूँ, इसलिए मेरा भारत महान है. अच्छे और बुरे लोग तो हर देश में मौजूद हैं.

  • 7. 22:31 IST, 03 अप्रैल 2012 एस के शुक्ला:

    शायद हर देश, धर्म, समुदाय में लोगों को ये महानता का कचरा जबरन परोसा जाता है.

  • 8. 23:59 IST, 03 अप्रैल 2012 Pradeep Shukla:

    भारत मे ग़रीब परिवार की बच्ची की दशा देखकर मन व्यथित हो जाता है. ग़रीब मां- बाप से बच्चे छीन कर अनेक दरिंदे इनका किसी ना किसी रूप मे शोषण करने की फिराक़ मे रहते है. मानवता जहाँ रोज शर्मसार होती हो वो देश कैसे महान हो सकता है?

  • 9. 00:21 IST, 04 अप्रैल 2012 संदीप कुमार महतो :

    बहुत मार्मिक और दुखद कहानी बयान की आपने...यहाँ बाल प्रताड़ना भी है, जाति प्रथा का दुखद स्वरुप भी , भ्रष्टाचार का भयावह रूप भी है, भुख गरीबी और न जाने क्या क्या, परन्तु फिर भी मेरा मन कहता है की भारत अभी भी महान है. यहाँ अपने बच्चों के एक कौर के लिए माँ बाप भूखे रह जाती हैं, दूसरों के दुःख को देखकर अभी भी आप जैसों का मन तड़प उठता है चाहे वो किसी भी जाति का हो. परिस्थितयों से गरीबी हैं पर मन से गरीब कम हैं, धर्म के नाम पर दंगे भी होते हैं पर यही धर्म के नाम पर त्याग और विश्वास, दया और पवित्रता भी है, इसी जाति प्रथा के बीच राजा राममोहन राय जैसे लोग भी हुए, इसी हिंसा और दंगा के बीच भगवान बुद्ध भी हुए, इसी अज्ञानता और अशिक्षा के बीच विवेकानंद भी. मैं पुराने स्वर्णिम युग की दुहाई नहीं दे रहा हूँ परन्तु इसी उम्मीद पर मेरा मन कहता है की भारत की महानता की जड़ें बहुत मजबूत हैं.

  • 10. 04:50 IST, 04 अप्रैल 2012 Yourhusband:

    क्या आपके लिए काम करना इतना जरुरी है कि आप किसी को भी नौकरानी रख लेंगी.क्या आप घर बैठकर अपने बच्चे को पालपोस नहीं सकती.क्या आप घर का काम झाडु, पोछा और खाना नहीं बना सकती.अगर काम करना इतना ही जरुरी है तो सास, ससुर को रखो, वो बच्चे को देख लेंगे, नौकरानी पर भरोसा करने से तो अच्छा है.

  • 11. 09:32 IST, 04 अप्रैल 2012 CDAS:

    पढ़ कर अच्छा लगा लेकिन ये समसामयिक विषय नहीं था.

  • 12. 12:28 IST, 04 अप्रैल 2012 Deepak Sharma:

    हमारा देश महान था महान है और महान ही रहेगा , उस लड़की को एजेंट के साथ भेज कर शायद आप ने भी गलती की हे.

  • 13. 13:00 IST, 04 अप्रैल 2012 Kapil Batra:

    रुपाजी आपका लेख विरोधाभासी कहानियां बताता है.समाज में जहां अच्छे लोग है वहीं बुरे लोग भी है.शहरी है तो निर्धन भी है और ऐसा हर देश में है.भारत में कोई अपवाद नहीं है.समस्या वहां आती है जब एक बड़ी तस्वीर के तौर पर हमारा समाजिक चरित्र देखा जाता है.समाज में मूल्यों का जिस तरह शोषण हो रहा है उससे चिंता होना स्वाभाविक है.


  • 14. 13:16 IST, 04 अप्रैल 2012 फ़रीद ख़ाँ :

    अराजनीतिक तौर पर लिखा एक राजनैतिक लेख। मार्मिक।

  • 15. 13:46 IST, 04 अप्रैल 2012 Amit Ranjan:

    ये भारत की डर्टी पिचर है.ये मीडिया के लिए एक खबर है और सभ्य माने जाने वाले लोगों के लिए एक बहस का गर्म मुद्दा है और सरकार और उसकी शिक्षा प्रणाली के लिए शर्म की बात है.

  • 16. 13:48 IST, 04 अप्रैल 2012 sanjay:

    रुपाजी मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा.

  • 17. 13:48 IST, 04 अप्रैल 2012 Amit Ranjan:

    बेहद दुखद है ये.

  • 18. 15:05 IST, 04 अप्रैल 2012 Padma Kumari:

    हमारा भारत हमेशा से ही महान रहा है पर आजकल नैतिक मूल्यों का काफी पतन हुआ है.हमारी समाजिक संस्था का ताना-बाना टूट रहा है जिसके चलते लोगों में असुरक्षा की भावना बहुत ज्यादा है.कोई किसी पर विश्वास करने के लिए तैयार ही नहीं है.

  • 19. 15:20 IST, 04 अप्रैल 2012 singh:

    देश मां की तरह महान होती है.अगर औलाद गलत काम करे तो मां की महानता कम नही होती .रूपा जी , आप आपनी बेटी को बताए मेरा भारत महान है. ये भी बताए कि भारत को महान कैसे बनाना है.

  • 20. 17:54 IST, 04 अप्रैल 2012 indrajeet sharma:

    हमें किसी महान देश की तुलना किसी छोटी सोच से नहीं करनी चाहिए. भारत हमेशा से ही महान है और रहेगा.

  • 21. 17:55 IST, 04 अप्रैल 2012 Himanshu Dwivedi:

    बहुत ही बढ़िया लिखा है. बस शीर्षक सही नहीं दिया. इंसानियत के इस स्याह चेहरे से किसी देश विशेष का कोई लेना-देना नहीं है. विश्व में कई जगह ऐसे हालात रह चुके हैं और आज भी हैं. गुलाम प्रथा जितनी अन्य देशों में रही है उतनी भारत में नहीं. गाली इस तरह के इनसानों को दीजिये, पूरे देश को कोसने की कोई जरूरत नहीं हैं.

  • 22. 18:07 IST, 04 अप्रैल 2012 anuj:

    रूपा जी आपकी भूमिका भी कुछ अच्छी नहीं रही इस प्रकरण में.

  • 23. 21:02 IST, 04 अप्रैल 2012 Shuchi:

    रूपा जी, यह सच है कि हमारे देश में कुछ समस्याएँ हैं लेकिन फिर भी भारत महान है. अच्छाई और बुराई तो हर समाज में होती है लेकिन अगर हम सब इनसान संकल्प ले लें तो समय के साथ सब नहीं तो कुछ एक बुराइयों को तो समाज से हटा ही सकते हैं.

  • 24. 22:47 IST, 04 अप्रैल 2012 Mukesh Sakarwal:

    कोई देश अपने-आप में महान नहीं होता. उसके नागरिक उसे महान बनाते हैं. और मुझे नहीं लगता कि भारत में ऐसे महान नागरिक अब बचे हैं.

  • 25. 23:25 IST, 04 अप्रैल 2012 akash mishra:

    आपके ब्लॉग को लम्बे समय से पढ़ता आ रहा हूँ. इस ब्लॉग ने मुझे अन्दर तक झकझोर दिया है.

  • 26. 23:46 IST, 04 अप्रैल 2012 pramod kumar :

    रूपा जी ये तो दिल्ली की बात है. आप या किसी और को नौकरानी की जरूरत है इसलिए परिस्थितियों से समझौता करना पड़ता है. मैं आज से कुछ साल पहले रांची गया था. शादियों का मौसम था. बारात सड़क पर जा रही थी. अचानक मैंने देखा कि एक औरत अपनी पीठ पर बच्चा बांधे थी और अपने सिर पर ट्यूब लाइट लेकर चल रही थी जिसकी रोशनी से बारातियों के चेहरे दमक रहे थे. हाय री विडंबना.

  • 27. 02:12 IST, 05 अप्रैल 2012 पंकज झा.:

    यह मानवता की समस्या है, किसी देश की नहीं. कृपया ऐसी घटनाओं को देश के महान होने या न होने से न तौलें.

  • 28. 07:57 IST, 05 अप्रैल 2012 Sushil :

    गांधी जी ने कहा था घृणा करनी है तो पाप से करो, पाप करने वाले से नहीं. इसलिए देश को दोष देना ठीक नहीं है. देश हमारा महान था, महान है और महान ही रहेगा. हमें बस इस पाप को खत्म करना है.

  • 29. 08:00 IST, 05 अप्रैल 2012 डा० उत्सव कुमार चतुर्वेदी:

    फैज़ साहब का ये शेर कुत्तों के लिए है, मगर इंसानों पर उससे भी ज्यादा सही बैठता है.
    ''ये मज़बूर मख़लूक गर सर उठाएं, तो इनसान हर सरकशी भूल जाएँ,
    या चाहे ज़माने को अपना बना लें, ये आकाओं की हड्डियाँ तक चबा लें.''

  • 30. 09:40 IST, 05 अप्रैल 2012 माधव शर्मा:

    गौरवपूर्ण भारतीय इतिहास और परंपराएँ देश की महानता को स्पष्ट करती हैं. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कामकाजी भारतीय तबके को कदम-कदम पर कई समझौते करने पड़ते हैं. आधुनिक दौर की परिस्थितियों ने लड़के-लड़कियों को समय से पहले ही बड़ा कर दिया है. जूलियनी का उदाहरण भी उसी कड़ी का एक हिस्सा है. मन न होते हुए भी उसे मजबूरन उसी रास्ते पर लौटना पड़ा. आज के व्यस्त भारतीय समाज के पास इन सब बातों के लिए फुर्सत नहीं है सिवाय बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की जद्दोजहद के.

    नोखा जोधा, नागौर, राजस्थान

  • 31. 16:24 IST, 05 अप्रैल 2012 anupam:

    दुनिया में किस देश में ऐसी घटनाएं नहीं होतीं. अगर फिर भी वे देश महान हो सकते हैं तो भारत क्यों नहीं.

  • 32. 17:03 IST, 05 अप्रैल 2012 Rajesh Singh:

    देश में कैंसर से होने वाली 42 फीसदी मौतों की वजह तंबाकू है. महिलाओं में यह आंकड़ा 18.3 फीसदी है. फेफड़े की कैंसर की अपेक्षा मुख कैंसर का अनुपात लगभग दोगुना है. भारत के ग्रामीण और शहरी इलाकों को मिलाकर बात करें तो वार्षिक लगभग 1,20,000 ( 84,000 पुरुषों में और 36,000 महिलाओं में ) मौतें तंबाकू की वजह से होती हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारी सरकार आईटीसी ( पूर्व नाम. इम्पेरियल टोबैको कंपनी) के साथ मिलकर मौत का धंधा करती है. आपको बता दें कि जितनी मौतें तंबाकू की वजह से होती हैं उतनी मौतें देश में आतंकवादी कार्रवाइयों में भी नहीं होती. एक बात और कि अफगानिस्तान में अलकायदा जो कि एक आतंकी संगठन है वो अफीम की खेती से धन उगाहता हैं और हमारी सरकार तंबाकू से बने उत्पादों से धन उगाहती है. सवाल यह है कि जब तक हमारी सरकार आई.टी.सी जैसी कंपनियों के साथ मिलकर मौत का धंधा करती रहेगी तब तक भारत को महान कैसे कहा जा सकता है ?

  • 33. 18:14 IST, 05 अप्रैल 2012 ajay:

    भारत वाकई महान है.

  • 34. 23:45 IST, 05 अप्रैल 2012 Anil Yadav:

    आप जैसे महिला हैं तो भारत कभी महान नहीं हो सकता. आपने खुद लिखा है कि आपका एजेंट आपकी नौकरानी का यूं शोषण करता था. फिर भी आपने उसको किसी संस्था में भेजने और एजेंट को सजा दिलाने के बारे में नहीं सोचा. आपको लगता था कि नौकरानी जहां भी जाए ये सब तो होगा ही, शायद इसीलिए एजेंट के साथ जाने दिया. एक पत्रकार होने का धर्म भी आपने नहीं निभाया. क्या इसे खुला सच मान कर आप चुप रहीं.

  • 35. 09:45 IST, 06 अप्रैल 2012 जय प्रकाश पाठक :

    नमस्कार. किसी देश के महान होने की कौन-कौन कसौटियां हैं? भारत महान कैसे है ? यदि नहीं है तो इसे कैसे महान बनाएँ?

  • 36. 14:04 IST, 06 अप्रैल 2012 avinash:

    एक विनम्र निवेदन है अपने घर के काम स्वयं करें, बच्चों को भी ऐसी ही शिक्षा दें. देश हमसे बनता है. हम जैसे होंगे वैसा ही देश भी होगा.

  • 37. 14:11 IST, 06 अप्रैल 2012 SHABBIR KHANNA,RIYADH,SAUDIA ARABIA:

    रूपा जी भारत महान है सिर्फ बेईमानी में. आपका लेख बहुत दर्द भरा है और ये एक कड़वा सच भी है. ये बेईमान नेताओं और अधिकारियों वाला महान भारत है.

  • 38. 16:18 IST, 06 अप्रैल 2012 bhanwar:

    आपकी कहानी पढ़ने के बाद भारत को महान कतई नहीं कहा जा सकता. ऐसी कई कहानियाँ रोज़ाना बनती हैं. भारत महान था ये माना जा सकता है, शायद आगे जाकर भी महान बन जाए, लेकिन अभी जो भारत है उसमें मुझे कोई महानता नज़र नहीं आती. ऐसी सच्ची और साहसी लेख के लिए धन्यवाद.

  • 39. 16:29 IST, 06 अप्रैल 2012 Kpsb:

    भारत तो महान है पर भारतीय नहीं.

  • 40. 19:01 IST, 06 अप्रैल 2012 himmat singh bhati:

    बच्चे को नहाने के बाद माताएँ काला टीका लगाती हैं, ठीक यही हालत कुछ भारत की भी है. इसे आज़ादी के समय काला टीका नहीं लगाया इसलिए बार-बार नज़र लग जाती है, महान बनने की कोशिश नाकामयाब हो जाती है. कुछ जतन तो करना चाहिए जिससे बच्चे ये ना पूछें कि भारत महान कैसे है या कैसे बनेगा.

  • 41. 19:23 IST, 06 अप्रैल 2012 yogesh dubey:

    आपने बहुत सुंदर लेख लिखा है. हो सकता है कुछ लोग देश को शर्मिंदा करनेवाला काम करते हैं, मगर हम सबको मिलकर - मेरा भारत महान - बनाना चाहिए.

  • 42. 19:39 IST, 06 अप्रैल 2012 R.P.Pandey:

    इस हिसाब से दुनिया में एक भी देश ऐसा नहीं है जिसे महान कहा जाए.

  • 43. 20:19 IST, 06 अप्रैल 2012 Ambuj Kumar:

    बचपन से मैं भी सुनता आया हूँ कि भारत एक महान देश है. पर आज तक समझ में नहीं आया कि कैसे है. महान होने का मापदंड क्या है? मेरे हिसाब से एक महान देश में तीन चीज़ो की कमी नहीं होनी चाहिए – रोटी, कपड़ा और मकान. हम बात करते हैं महानता की पर भारत के किसी भी शहर में, गाँव तो भूल जाइए, आपको साफ़ पानी तक नसीब नहीं है. तो सिर्फ़ परमाणु बम बना कर महानता कैसे आ सकती है.

  • 44. 09:15 IST, 07 अप्रैल 2012 ऋजुवान:

    जो महान होते हैं उन्हें अपने आप को 'महान' कहने की कोई जरूरत नही होती. अगर कोई कहता है तो बात उल्टी ही होगी.

  • 45. 13:56 IST, 07 अप्रैल 2012 राजेश:

    मैंने भी बचपन में पढ़ा था कि भारत एक महान देश है लेकिन आज तक मैंने इसकी महानता नहीं देखी. शायद हमारे नेताओं ने हमें महानता देखने लायक ही नहीं छोड़ा.

  • 46. 18:45 IST, 07 अप्रैल 2012 ckhan:

    रूपा जी आपका ब्लॉग बहुत दिनों के बाद आया पर मानवीय पहलुओं को उजागर करते हुए. अब हमारी संस्कृति की गिरावट होने लगी है. आपके विचारों के लिए धन्यवाद.

  • 47. 22:22 IST, 14 अप्रैल 2012 NIKHIL AGARWAL:

    वाह क्या बात है? चलो हम सब मिलकर भारत को गाली दें. एक देश को महान बनाते हैं, इसमें रहननेवाले लोग. चलो मिलकर एक दूसरे को गाली दें.

  • 48. 22:00 IST, 15 अप्रैल 2012 रवि तहिलियानी:

    कोई भी देश अपने लोगों से महान बनता है, उनके चरित्र से महान बनता है, ये सच है कि आज देश में ईमानदार लोगों की अपेक्षा बेईमानो की संख्या ज्यादा है.. तो क्या हुआ अगर दीया बहुत छोटा है अँधेरे का मुकाबला तो कर ही सकता है.! मेरा देश महान था, महान है और महान ही रहेगा.. जय हिंद !!

  • 49. 12:32 IST, 16 अप्रैल 2012 mony:

    मैं भी ऐसे अनुभव से कई बार गुजरी हूँ जब भारत को महान कहने पर हिचकिचाहट हुई. विदेश में बस जाने पर अब अपने देश से प्यार ज़रूर बढ़ गया है लेकिन उसकी इज्जत दिन पर दिन घट रही है औऱ उसके लिए हम आम जनता ही ज़िम्मेदार हैं.

  • 50. 21:32 IST, 18 अप्रैल 2012 डॉ. शरद वर्मा:

    मेरा सभी से अनुरोध है कि कृपया 'अमरकांत ' की 'बहादुर' कहानी भी पढ़ लें.

  • 51. 12:23 IST, 22 अप्रैल 2012 vinod bhatt:

    अपने देश में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि हम समाधान की ओर नहीं सोचते हैं! समस्या के स्तर पर कुछ नहीं होने वाला! दरअसल हमें यह सिखाया ही नहीं जाता. स्कूल में सिर्फ़ बहस करना और मुद्दे उछालना, वाद विवाद! यही कारण हैं कि हम उम्र भर समस्या ही सोचते रहते हैं, समाधान नहीं!

  • 52. 17:13 IST, 24 अप्रैल 2012 Neeta Kumari, Behat , Jhanjharpur, Bihar:

    रूपा जी मैं अपने भारत को महान क्यों ना कहूँ यदि गलत आचार से, गंदे आचरण से, महान ना कहूँ तो क्या इसकी अच्छाई से इसे अच्छा भी ना कहूँ. मैं भी अपने शिक्षक के मुँह से पाँच साल की उम्र से ही भारत को हमेशा महान कहते सुना है, तो क्या उन्हें गलत ठहरा दूँ? भारत की जिन अच्छाइयों को दिखाते हुए उसे महान कहा जाता है, उसे झुठला दूँ?
    मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत नहीं. आपने जूलियन को साथ क्यों नहीं रखा जब आपका मन था तो भी? क्यों नहीं आपने अपने आपसे कहा कि जिस तरह मेरी बेटी है उसी तरह इसका भी खयाल रखूँ? जब महिला ही किसी महिला का साथ नहीं दे सकती तो बाकी लोगों से क्या अपेक्षा रखी जाए. यदि सारा समाज, सारा देश इन गंदगियों को दूर नहीं करेगा तो क्या कभी ये देश महान बन पाएगा जिसकी लालसा लिए हम सब जी रहे हैं?

  • 53. 14:01 IST, 25 अप्रैल 2012 दीपेंद्र:

    रूपा जी आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा. आपने बहुत दिनों के बाद लिखा. कभी मिथिला के बारे में भी कुछ लिखिए.

  • 54. 10:46 IST, 01 मई 2012 Anshu Singh:

    भारत महान है और रहेगा.

  • 55. 11:02 IST, 07 मई 2012 ravi keshri:

    सच में आपकी बात सच है कि भारत में अभी भी बहुत सारे लोगों को खाना और शिक्षा नहीं मिलती है. कहीं न कहीं हम सभी लोग जिम्मेदार हैं. पर हमारा देश महान है और महान रहेगा.

  • 56. 12:13 IST, 12 मई 2012 नौशाद खान:

    मैं रूपा जी की बात से पूरी तरह संतुष्ट हूँ.

  • 57. 19:41 IST, 19 मई 2012 Dhirendra Mishra:

    हम सब भारतवासी हैं, इसलिए भारत महान है.

  • 58. 02:06 IST, 21 मई 2012 धीर झा:

    यह सच है कि हमारे देश में कुछ समस्याएँ हैं लेकिन फिर भी भारत महान है. अच्छाई और बुराई तो हर समाज में होती है.

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