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नंगों के लिए नियम

राजेश प्रियदर्शीराजेश प्रियदर्शी|रविवार, 24 जुलाई 2011, 18:54 IST

'हम्माम में सब नंगे हैं', इस मुहावरे के साथ ही अक्सर बहस ख़त्म हो जाती है, कोई दूध का धुला नहीं है इसलिए बहस बंद करके दोबारा हम्माम में डुबकी लगाने को बेहतर समझा जाता है.

ब्रिटेन में'ट्रिपल पी' यानी प्रेस, पुलिस और पॉलिटिक्स के रिश्तों को लेकर छिड़ी बहस भी इस निष्कर्ष तक पहुँची कि हम्माम में सब नंगे हैं.

कंज़रवेटिव प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने फ़ोन हैकिंग के एक अभियुक्त को अपना मीडिया सलाहकार बनाया, इससे पहले वाले लेबर प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन उसी अभियुक्त के मालिक को पिछले दरवाज़े से अपने घर बुलाते थे, उनसे पहले वाले लेबर प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर आधी दुनिया पार करके रुपर्ट मर्डोक से मिलने ऑस्ट्रेलिया गए थे.

भारत से अलग बात ये है कि ब्रिटेन की संसद में, प्रेस में और लोगों के बीच बहस अब भी जारी है, बंद नहीं हुई है.

ब्रिटेन में कई लोग तो अब इस बहस से ऊब रहे हैं, ख़ास तौर पर ऐसे लोग जिन्हें लगता है कि वे हम्माम में नहीं हैं, यह सिर्फ़ कुछ नंगों का मसला है.

बहरहाल, ब्रिटेन में अभी कोशिश ये हो रही है कि हम्माम के नियम दुरुस्त कर लिए जाएँ. जो सुझाव आ रहे हैं वे कुछ इस तरह के हैं-

पुलिस, प्रेस और नेता के हम्माम अलग-अलग होने चाहिए.

हम्माम में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए यानी वहाँ आने-जाने वाले नंगों के नाम रजिस्टर में दर्ज होने चाहिए.

हम्माम का इस्तेमाल सिर्फ़ नहाने के लिए होना चाहिए, नौकरी दिलाने, सौदे पटाने या छिपकर दुसरों की बातें सुनने के लिए नहीं.

हम्माम में कौन किसकी पीठ रगड़ सकता है और किसकी नहीं, इसके नियम तय होने चाहिए.

एक जज साहब को हम्माम की सफ़ाई, साबुन, तौलिए, तेल-पानी की समीक्षा का काम सौंपा गया है, हम्माम को नंगों के भरोसे नहीं छोड़ा जा रहा जैसा कई देशों में होता है.

एक ज़रूरी सुझाव ये भी आ रहा है कि सिर्फ़ हम्माम को ही हम्माम की तरह इस्तेमाल करना चाहिए, पूरे देश को हम्माम नहीं बनाना चाहिए.

ये चेतावनी भी दी जा रही है कि किसी भी संस्था-व्यवस्था-सरकार के हम्माम बनने में देर नहीं लगती अगर वहाँ पिछले दरवाज़े से नंगों की आवाजाही शुरू हो जाए.

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 20:25 IST, 24 जुलाई 2011 naval joshi:

    बेहतरीन ब्लॉग, सफाई से किया गया पोस्टमार्टम ।

  • 2. 21:37 IST, 24 जुलाई 2011 hemant kumar:

    क्या खूब कहा है, सब जगह एक जैसा ही हाल है, बस थोड़ा अंतर तरीक़े का है.

  • 3. 21:43 IST, 24 जुलाई 2011 himmat singh bhati:

    इसमें ज्यादा सोचने वाली क्या बात है, हम्माम का एक ही दरवाज़ा होना चाहिए और उसमें सीसी टीवी कैमरा लगा देना चाहिए.

  • 4. 02:56 IST, 25 जुलाई 2011 Ajeet S Sachan:

    ये एक ऐसी सीख है कि अगर हम गलत चीज़ को रोक नहीं सकते तो उसके करने के लिए सही नियम बना दिया जाए.कुछ चीज़ों जिनको की रोक नहीं पा रहे है उनपर क़ानून बना कर उनके होने देने की निगरानी रख दी जाए. जैसे देह व्यापार को क़ानूनी मान्यता देने पर विचार किया जाए.भ्रष्टाचार को क़ानूनन नियमित किया जाए.सम्मान के नाम पर होने वाली मौत के लिए क़ानूनी मान्यता दे देनी चाहिए.

  • 5. 09:29 IST, 25 जुलाई 2011 vivek kumar pandey:

    यहां तो हमाम के बहार भी सब नंगें है.

  • 6. 11:48 IST, 25 जुलाई 2011 SHABBIR KHANNA,RIYADH,SAUDIA ARABIA:

    राजेशजी दोबारा इस मुद्दे पर लिखने का मौका मिले तो खुलासा किया जाएगा कि हमाम में सब नंगें है का मतलब क्या होता है.

  • 7. 12:03 IST, 25 जुलाई 2011 Vinay:

    आपका ब्लॉग ये समझाने के लिए काफ़ी है कि सब जगह अंधेरगर्दी है और अब पूरी दुनिया ही हमाम बन चुकी है.

  • 8. 12:19 IST, 25 जुलाई 2011 ZIA JAFRI:

    राजेशजी जो पकड़ा गया वो चोर है.फ़ोन हैकिंग कोई नई बात नहीं है पहले भी ऐसी घटनाएं होती रही है और आगे भी होती रहेगी चाहे कितने भी नियम बना ले.नंगों को किस बात की शर्म.

  • 9. 15:22 IST, 25 जुलाई 2011 उमेश कुमार यादव:

    राजेश जी, इस बार बात कुछ जमी नहीं. शायद शब्दों का अकाल पड़ गया है.

  • 10. 15:24 IST, 25 जुलाई 2011 उमेश कुमार यादव:

    राजेश जी, इस बार बात कुछ जमी नहीं। शायद शब्दों का अकाल पड़ गया है। आप कुछ कहना चाहते थे पर शायद अंग्रेज सरकार की नौकरी ने कलम बांध दी।

  • 11. 20:38 IST, 25 जुलाई 2011 BHEEMAL Dildar Nagar:

    प्राचीन भारत में लगभग सभी राज्यों में एक नियम था कि ब्राह्मण को प्राणदंड देना वर्जित था, आज के युग में कानून कुछ इस तरह का होना चाहिए कि नेताजी और सरकारी अधिकारी जो कुछ भी करें उनके हज़ार खून माफ़ होने चाहिए. वैसे वास्तव यह पहले से ही चल रहा है.

  • 12. 22:31 IST, 25 जुलाई 2011 himmat singh bhati:

    यहाँ भी नंगे हैं लेकिन मीडिया को दिखाई नहीं देते, यही कारण है कि भारत में नंगों की ख़बरें नहीं दिखती तो फिर नियम कायदे कैसे बन सकते हैं.

  • 13. 23:45 IST, 25 जुलाई 2011 SHAHNAWAZ ANWAR SINTU, SAHARSA BIHAR :

    फालतू लेख है, हम्माम और साबुन का कितनी बार प्रयोग करेंगे, इससे ऊब गए.

  • 14. 14:44 IST, 26 जुलाई 2011 BINDESHWARPANDEY BHU:

    महोदय! हमारा भारत अब ब्रिटेन से किसी मामले में कम नहीं है .हमारे यहाँ हम्माम के नियम इतने उदार है कि नंगाधिपतियों को ससम्मान महापंचायत में आमंत्रित किया जा रहा है. राजेश जी ज़रा सोचिये कि हम्माम का नियम बनाएगा कौन ??? नंगे ही न ? और जब नंगे नंगों के लिए नियम बनायेंगे तो अल्पसंख्यक होने के नाते उन्हें आरक्षण भी मिलेगा ना? आपने ब्लॉग के अंत में लिखा है कि किसी भी संस्था-व्यवस्था-सरकार के हम्माम बनने में देर नहीं लगती अगर वहाँ पिछले दरवाज़े से नंगों की आवाजाही शुरू हो जाए. किंतु हमारे यहाँ तो स्थिति ठीक उसके उलट है. ऐसी विपदा का हल क्या आपके पास है.

  • 15. 16:53 IST, 26 जुलाई 2011 Gaurav:

    क्या बात है, नंगे सिर्फ़ नहाने का काम करते तो ठीक था, पर यहाँ तो कुछ और ही कहानी है. वाक़ई पूरा देश एक साथ नंगा हो गया है या पूरा देश हम्माम बन गया है. नेताओं की तरह चश्मों पर कपड़े चढ़ाने से कुछ नहीं होगा, पूरा तन ढंकना होगा.

  • 16. 18:30 IST, 26 जुलाई 2011 vikas sharma:

    जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है, ना सिर्फ़ इस ब्लाग की बल्कि राजेश प्रियदर्शी की हर प्रस्तुति की. बहुत शुक्रिया.

  • 17. 20:07 IST, 26 जुलाई 2011 kailash chandra:

    यह सचमुच एक बेहतरीन आर्टिकल है और शब्दों का इस्तेमाल बहुत असरदार तरीक़े से किया गया है.

  • 18. 16:48 IST, 28 जुलाई 2011 Pramod Baghel:

    धो डाला !!!!अब सब कुछ क्लियर है

  • 19. 22:59 IST, 30 जुलाई 2011 chandan kumar:

    ये बहुत बढ़िया ब्लॉग है.

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