किस्मत और करिश्मे का खेल
इन दिनों ब्रिटेन में सब लोग नेशनल लॉटरी की बातें कर रहे हैं क्योंकि एक टीवी शो में लॉटरी का इनामी नंबर बताकर एक चमत्कारी व्यक्ति ने सबको हैरत में डाल दिया है.
मैं भी कभी-कभार ब्रिटेन की नेशनल लॉटरी का एक टिकट ख़रीद लेता हूँ, एक पाउंड में यह सपनों की दुनिया की सैर का टिकट है.
मैं तो यही सोचकर टिकट ख़रीदता हूँ कि लॉटरी निकलने का चांस फ़िफ़्टी-फ़िफ्टी है, या तो लॉटरी निकल आएगी या नहीं निकलेगी, दोनों बातों की बराबर-बराबर संभावना है. दोस्तों के साथ पाँच मिनट की परिचर्चा होती है कि अगर जैकपॉट निकल आया तो क्या-क्या करेंगे, एक पाउंड वसूल हो जाता है.
लंदन में मेरे एक बुज़ुर्ग सहकर्मी कहा करते थे कि "एक टिकट ले लिया करो, दरवाज़ा बंद नहीं रखना चाहिए, ये भी कोई बात हुई कि ऊपरवाला तुम्हारा भला करना चाहे और तुम उसे मौका ही न दो."
ब्रितानी लॉटरी पर शोध करने वाले गणितज्ञ बताते हैं कि अगर आप हर सप्ताह एक पाउंड का टिकट ख़रीदते रहें तो 2 लाख 70 हज़ार साल बाद आपका नंबर आ सकता है.
किसी के लॉटरी का जैकपॉट जीतने का चांस डेढ़ करोड़ में एक है यानी अगर आप डेढ़ करोड़ पाउंड के टिकट ख़रीद लें तो शायद एक करोड़ पाउंड का ईनाम निकल आए. अगर ऐसा न हो तो लॉटरी चलाने वाली कंपनी दिवालिया न हो जाए.
ब्रिटेन में लॉटरी का जैकपॉट जीतने के लिए एक से लेकर 49 के बीच छह नंबर चुनने होते हैं. बीबीसी टीवी पर नेशनल लॉटरी ड्रॉ का सीधा प्रसारण होता है, सब कुछ बहुत पारदर्शी होता है.
इन छह नंबरों का सही अंदाज़ा लगाने पर ही जीतने की संभावनाएँ टिकी हैं, कोई अपने प्रिय लोगों के जन्मदिन की तारीख़ें चुनता है तो कहीं छह लोग मिलकर एक-एक नंबर चुनते हैं, कहीं लोग हर सप्ताह नंबर बदलते हैं, कई ऐसे हैं जो बरसों से एक ही नंबर पर दाँव लगा रहे हैं...
मैं अक्सर कहा करता था कि जितने बाबा-सिद्धपुरुष-तांत्रिक-मांत्रिक टाइप लोग हैं उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे नेशनल लॉटरी के इनामी छह नंबर पहले से बता दें. जिसने ब्रिटेन के राष्ट्रीय टेलीविज़न नेटवर्क पर दावे के साथ ये कारनामा कर दिखाया है वह ख़ुद को इल्यूज़निस्ट-माइंडरीडर-माइंड कंट्रोलर बताता है.
जादूगर हैरी हुडिनी के प्रशंसक 37 वर्षीय डैरेन ब्राउन ने चैनल फ़ोर के एक टीवी कार्यक्रम में लॉटरी ड्रॉ से पहले कागज़ पर छह नंबर लिखकर रख दिए, लॉटरी ड्रॉ का प्रसारण बीबीसी पर उसके बाद हुआ, पता चला कि उन्होंने छहों नंबर सही लिखे थे, इसके बाद भारी हंगामा मच गया. ब्राउन के इस कारनामे को लगभग 30 लाख लोगों को टीवी पर देखा.
ब्राउन अपने कारनामे को एक 'ट्रिक' बताते हैं, अगले दिन फिर एक कार्यक्रम हुआ जिसमें उन्होंने बताया कि 24 लोगों के एक समूह को नंबर का अंदाज़ा लगाने का काम देकर उसमें गुना-भाग करके इनामी नंबर तक पहुँचे लेकिन अनेक गणितज्ञों ने उनकी थ्योरी को सरासर बकवास और गणित के सिद्धांतों के प्रतिकूल बताकर खारिज कर दिया.
वेबसाइट्स, ब्लॉग्स, ट्विटर, यूट्यूब, अख़बार, टीवी...हर जगह 'ब्राउन बाबा' के 'परावैज्ञानिक' चमत्कार की चर्चा हो रही है. वैज्ञानिक, गणितज्ञ, पत्रकार, लॉटरी चलाने वाले-ख़रीदने वाले, टीवी ट्रिक्स के विशेषज्ञ, यहाँ तक कि जादूगर भी सर खपा रहे हैं कि यह कमाल कैसे हुआ.
लोग ये भी पूछ रहे हैं कि अगर वे लॉटरी नंबर पहले से बता सकते हैं तो ख़ुद क्यों नहीं ईनाम जीतते? डैरेन ब्राउन ने ब्रितानी ही नहीं, पुरी दुनिया के अक्लमंद लोगों को चुनौती दे डाली है कि वे उनके 'ट्रिक' का राज़ बताएँ. इतने वैज्ञानिकों-गणितज्ञों और प्रबुद्ध लोगों को चक्कर में डालकर पहले से ही करोड़पति ब्राउन को जो सुख मिल रहा होगा वह लॉटरी जीतने से कहीं बड़ा नहीं है?

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इस रिपोर्ट ने हमारे मस्तिष्क में हलचल पैदा कर दी है. वाक़ई राजेश साहब, आपकी लेखनी में रस है. मैं सब कुछ भूल कर आपकी लेखनी को दाद देता हूँ.
राजेश जी, ऐसा महसूस हुआ आप के इस लेख को पढ़ कर जैसे आप शायद लॉटरी बेचने का प्रसार कर रहे हैं. जैकपॉट या किसी अन्य लॉटरी से भला बीबीसी हिंदी के श्रोता का क्या वास्ता है. आप इस लेख में जो भी कहना चाह रहे हैं वह समाज से बहुत दूर है. अगर आप ज़हरीली शराब या दि्ल्ली के स्कूल में हुए हादसे पर लिखते तो बहुत अच्छा होता. लॉटरी के प्रचार से हमें क्या फ़ायदा होगा. हम तो इस लॉटरी तक पहुँच भी नहीं सकते हैं.
राजेश जी, लंदन में सचमुच हंगामा मचा हुआ है, आपने ब्रिटेन के लोगों के बारे में बड़े दिलचस्प ढंग से बताया. खन्ना जी को बताना है कि नेशनल लॉटरी का प्रचार करने की जरूरत नहीं है, लाखों लोग उसका टिकट खरीदते हैं, खन्ना जी भी खरीद सकते हैं नेशनल लॉटरी की वेबसाइट पर जाकर, और हाँ लॉटरी से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा चैरिटी के काम में लगाया जाता है.
लॉटरी पर वाक़ई ये अच्छी टिप्पणी है. मैं इन सारी बातों से एक बात का दावा कर सकता हूँ कि फ़ायदा हो न हो पर लॉटरी कंपनी की चाँदी कटती रहे. जहाँ तक बात ब्राउन की है तो वे लॉटरी कंपनियों की नींदें हराम कर सकते हैं.
मत कर हाथों की लकीरों पर भरोसा इतना,
तक़दीर तो उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते...
राजेश जी वाह क्या बात है. अब देखना यह है कि सर्वप्रथम कौन सा हिन्दी टेलीविजन चैनल इस ताजा - तरीन विषय की नक़ल करने की पहल करता है. वैसे हमारे यहाँ यह विषय नया नहीं है. आज भी आप सब्ज़ी मंडी से लेकर बड़े बाजारों तक में आसानी से साईकल पर लॉटरी टिकिट बिकते देख सकते हैं. अभी भी कुछ चैनल लॉटरी के लक्की विजेता घोषित करते हैं, लेकिन इस बार तरीका थोडा बदला हुआ है. रही बात डैरेन ब्रोउन की तो यह साहब तो पहले ही स्वीकार कर चुके हैं कि इस ट्रिक को अमली जामा देने के लिए उन्हें एक साल की महेनत करनी पडी है. दुनिया में बहुत से काम सब करते हैं लेकिन कुछ लोग अलग सोच के मालिक, उन्हीं कार्यों को थोडा हटके करते हैं. डैरेन साहब भी वैसी श्रेणी में आती हैं. वैसे इस ट्रिक में मंच के पीछे का खेल ,समय का हेर- फेर , मीडिया ट्रिक ,या नंबरों वाली गेंदों से छेड़छाड़ आदि कारकों का समायोजन लगता है. मुझे लौटरी में कोई बुराई नजर नहीं आती आखिरकार यह हमारे आर्थिक पिरामिड को संतुलित बनाए रखने में मददगार जो है. अत्याधिकता तो किसी भी तत्व की हानिकारक है. यह जो तथाकथित सिद्धपुरुष, तांत्रिक बाबा ,त्रिकाल दर्शी बाबा हैं ये बेचारे क्या कुछ करेंगें इनकी दुकान तो कुछ मीडिया चैनलों द्वारा ही चलाई जा रही है. सुबह- शाम ,किसी भी दिन , त्यौहार, के आने से पहले ही दर्शकों को अनर्गल ,अलूल -फिजूल बातें करके बहकाते रहते हैं. यह बीमारी हमारे यहीं नहीं है हमारे विदेशों में रहने वाले भारतीयों की बदौलत यह बाबा लोग दुनिया के हर हिस्से में विद्यमान हैं. कुछ साल पहले जब इंग्लैंड में एक पंजाबी सामुदायिक रेडियो स्टेशन और स्थानीय पंजाबी अखवार ने इनके विरूद्व अभियान छेड़ा था तब इन बाबाओं द्वारा रेडियो स्टेशन को अभद्र, असांस्दीय भाषा का प्रयोग करते इनके अंधभक्तों को सुनाया गया था, लेकिन क्या हो सकता आपसे और हमसे ही तो समाज बनता है.
राजेश जी वाक़ई आप किसी भी सब्जेक्ट पर अच्छा लिखते हैं. आपकी इसी महारत को हम दाद देते हैं और बीबीसी की वेबसाइट को दिन में एक बार ज़रूर देख लेते हैं. आप लंदन में बैठे बैठे ही पूरी दुनिया का विश्लेषण बड़ी बारीकी से करते हैं. आपने सही कहा कि लौटरी लोगों को एक मिनट के लिए अपनों से अलग कर सपनों की दुनिया में ले जाता है. उस एक मिलियन पाउंड में उन लाखों लोगों का एक एक पाउंड लगा होता है जो लाखों के सपने देखकर एक पाउंड का टिकट खरीदते हैं. भाई इस लॉटरी की कमाई से मेहनत की मामूली कमाई ही बेहतर है जिसमें दूसरों के बारे में सोचने की ज़रूरत नहीं है और चैन की नींद आती है. वैसे कभी किसी ने सोचा है कि ये तांत्रिक बाबा या अन्य बाबा अपने कौन से कौशल के ज़रिए लोगों को अपना भक्त बनने पर मजबूर कर देते हैं. क्या कभी कोई ऐसा दिन आएगा कि सबकी बुनियादी ज़रूरतें पूरी होंगी, पता नहीं उस लॉटरी में तो मेरा नंबर अब भी मैच नहीं कर रहा है.
बहुत अच्छा.
बीबीसी को इस तरह के ब्लाग छापने से बचना चाहिए. अगर बीबीसी ऐसी बात लिखेगी तो उसमें और जादू टोने वालों में क्या अंतर रह जाएगा. जहाँ तक नंबर पहले बताने की बात है तो यह असंभव है, ऐसा हो नहीं सकता. जो ऐसा सोचता है वह मूर्ख है.
अजीब बात है कि मैं लिखता हूँ तो आप पब्लिश नहीं करते, राजेश जी ने जो भी लिखा पढ़कर मज़ा आ गया.
राजेश जी आप बियर पीते हैं, लॉटरी खेलते हैं यानी आप वे सारे काम करते हैं जिन्हें अनैतिक समझा जाता है, लेकिन आप इतनी लोकप्रिय वेबसाइट पर लिखते हैं, यह इस बात का सबूत है कि घोर कलयुग आ गया है जिसमें वही रास्ता दिखाता है जो खुद अंधा हो. चारों ओर पतन है फिर पता नहीं लोग सिर्फ़ नेताओं को क्यों कोसते हैं. लिखने से पहले आप खुद को सुधारिए. एक शराबी और जुआरी सच लिखने का दावा नहीं कर सकता. जो सच लिखने का दावा करता है उसे लालच और बुराइयों से दूर रहना चाहिए.