कौन से वो देश हैं जहां रहना किसी का भी ख़्वाब हो सकता है?

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- Author, लिंडसे गैलोवे
- पदनाम, बीबीसी ट्रैवल
अक्सर लोग ये कहते सुने जाते हैं कि देश में सब कुछ ठीक नहीं है. रहना मुश्किल हो गया है. सुविधाओं की कमी है. सरकार अच्छी नहीं है. अफ़सर ख़राब हैं. तालीम और अच्छे रहन-सहन का इंतज़ाम नहीं.
इन शिकायतों के बरक्स सवाल ये उठता है कि वो कौन से देश हैं जहां रहना किसी का भी ख़्वाब हो सकता है? वो कौन से देश हैं, जहां ज़िंदगी शानदार है. आसान है. बेहतरीन सुविधाओं से लैस है?
चलिए आज आप को ऐसे ही कुछ देशों की सैर पर ले चलते हैं.

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डेनमार्क
उत्तरी ध्रुव के क़रीब स्थित डेनमार्क तीन नॉर्डिक देशों में से एक है. बाक़ी के दो देश हैं स्वीडन और नॉर्वे. तीनों ही देशों में जीवन स्तर और रहन-सहन बेहद ऊंचे दर्जे का है.
यहां आपको बिजली-पानी, स्कूल और अच्छे अस्पतालों की फिक्र करने की ज़रूरत ही नहीं. सारी सुविधाएं शानदार हैं. यहां सियासी उठा-पटक भी बहुत कम होती है. किसी भी बुनियादी सुविधा के पैमाने पर डेनमार्क नंबर वन पाया गया है.
जर्मनी से डेनमार्क आकर बसीं एनी स्टीनबाख कहती हैं कि सिर्फ़ अपने नागरिकों के लिए ही नहीं, डेनमार्क बाहर से आकर बसने वालों के लिए भी जन्नत है. पढ़ाई, सेहत और सुरक्षा के लिहाज से डेनमार्क विदेशियों को भी वही सुविधाएं देता है, जो अपने नागरिकों को देता है.
डेनमार्क में अगर आप बीमार पड़ गए हैं, तो आपको बस अपने बॉस को बता देना है. एनी बताती हैं कि जर्मनी में तो इसके लिए आपको डॉक्टर का सर्टिफिकेट देना होता है.
दूसरे यूरोपीय देशों के मुक़ाबले डेनमार्क महंगा ज़रूर है, मगर यहां मिलने वाली सुविधाओं से इसकी भरपाई हो जाती है. एनी बताती हैं कि डेनमार्क के लोग बहुत मिलनसार होते हैं. आप डेनमार्क के लोगों से घुलना-मिलना चाहते हैं, तो बस उन्हें दावत पर बुला लीजिए. बाक़ी का काम अपने आप हो जाएगा.

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न्यूज़ीलैंड
न्यूज़ीलैंड और इसका क़रीबी देश ऑस्ट्रेलिया रहने के लिहाज़ से शानदार देश हैं. इंसानी तरक़्क़ी के हर पैमाने पर ये खरे उतरते हैं. यहां लोगों को हर तरह की सुविधाएं अधिकार की तरह मिलती हैं.
न्यूज़ीलैंड दुनिया का पहला देश था, जिसने महिलाओं को वोटिंग का अधिकार दिया था. न्यूज़ीलैंड ने 1883 में अपनी महिलाओं को मताधिकार दिया था. पूरे देश से लोग एक पर्चे पर ये मांग करते हुए एक-दूसरे से जुड़ते गए. जैसे-जैसे दस्तख़त बढ़े, अर्ज़ी की लंबाई भी बढ़ती गई. आज ये अर्ज़ी न्यूज़ीलैंड के एक म्यूज़ियम में रखी है.
न्यूज़ीलैंड में अगर आप अकेले रहते हैं तो सरकार आपका हर ख़याल रखती है. फिर चाहे आप अकेले मां हों या पिता. छात्र हो या बच्चे. या फिर बुजुर्ग. बुजुर्गों का तो न्यूज़ीलैंड में बहुत ज़्यादा ख़याल रखा जाता है. यहां जब भी कोई 65 बरस का होता है, तो सरकार उसको नियमित रक़म पेंशन के तौर पर देना शुरू कर देती है. भले ही वो न्यूज़ीलैंड का नागरिक हो, या विदेशी. उसके पास संपत्ति हो या बेघर. उसने पैसे कमाए हों या नहीं.

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कनाडा
अमरीका और उसका पड़ोसी देश कनाडा, दोनों ही ऊंचे रहन-सहन के लिए जाने जाते हैं. इंसान की तरक़्क़ी की तमाम सुविधाएं यहां मौजूद हैं. सरकार आम लोगों का बहुत ख़याल रखती है.
लेकिन, कनाडा अपने पड़ोसी अमरीका से जीवन स्तर के मामले में आगे है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि अमरीका के मुक़ाबले ये देश शांत है. यहां हिंसक घटनाएं बहुत कम होती हैं. यहां महिलाओं को अमरीका के मुक़ाबले ज़्यादा अधिकार हैं. थर्ड जेंडर और समलैंगिकों को भी यहां अमरीका के मुक़ाबले ज़्यादा स्वीकार किया गया है.
टोरंटो शहर में रहने वाली आलिया बिकसन के पास अमरीका और कनाडा, दोनों देशों की नागरिकता है. वो कहती हैं कि कनाडा के लोग बहुत ईमानदार और इंसाफ पसंद होते हैं. वो बाहर से आने वाले को पहले अपने पैमाने पर मापते-तौलते हैं. फिर कनाडा के लोग बाहरी लोगों को स्वीकार करते हैं.

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जापान
एशिया में जापान सबसे तरक़्क़ीयाफ़्ता मुल्क़ है. यहां का जीवन-स्तर बहुत से पश्चिमी देशों से बेहतर है. यहां क़ानून का सब लोग ईमानदारी से पालन करते हैं, जापान के स्कूल दुनिया भर के सबसे अच्छे स्कूलों में से एक हैं. सरकार सब को पढ़ाई का इंतज़ाम करती है. यहां के लोग बहुत सफ़ाई पसंद भी हैं.
यहां के सरकारी नियम भी आम लोगों की सुविधा का खयाल रखते हुए ही बनाए जाते हैं. हालांकि जापान में मेडिकल सुविधाएं महंगी हैं. क्योंकि इन्हें लोगों की आमदनी के हिसाब से तय किया गया है. मगर बीमार पड़ने पर अगर आप डॉक्टर के पास जाएंगे, तो जापान में लुटने का डर नहीं होता.

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बोत्सवाना
अफ्रीका यूं तो पिछड़ा हुआ महाद्वीप माना जाता है. मगर इस महाद्वीप का एक देश ऐसा है, जो तरक़्क़ी के हर पैमाने पर खरा उतरता है.
यहां जीवन स्तर बहुत शानदार है. लोग सुखी हैं. उन्हें ज़िंदगी की हर सुविधा मिलती है. सरकार आम नागरिकों का ख़याल रखती है. अपराधियों से बोत्सवाना में सख़्ती से निपटा जाता है. यही वजह है कि यहां शिकारियों से निपटने वाले दस्ते का दायरा हर साल बढ़ता जाता है.
90 के दशक में बोत्सवाना दूसरे अफ्रीकी देशों की तरह ही अराजकता का शिकार था. सरकारी अफ़सर भ्रष्टाचार में सिर से पांव तक डूबे हुए थे. तब सरकार ने भ्रष्टाचार से निपटने के लिए आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय बनाया. इसका एक ही काम था. भ्रष्ट नेताओं और अफ़सरों को पकड़कर जेल में डालना.
अच्छी बात ये है कि बोत्सवाना में मिलने वाले हीरों से होने वाली आमदनी हर नागरिक में बराबरी से बंटती है. यहां आम लोगों और प्रेस को पूरी आज़ादी हासिल है. बोत्सवाना के लोग छुपकर बातें करना और कोई भी काम दूसरों से नज़र बचाकर करना कतई पसंद नहीं करते.
यहां स्वास्थ्य का भी बहुत ध्यान रखा जाता है. 500 या ज़्यादा आबादी वाले हर गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होता है. एड्स से निपटने के लिए भी यहां जांच और इलाज के पूरे इंतज़ाम हैं.
बोत्सवाना की आमदनी का बड़ा ज़रिया टूरिज़्म है. दिलचस्प बात ये है कि यहां पर्यटन से होने वाली आमदनी को क़ुदरती माहौल के संरक्षण में ही ख़र्च किया जाता है.

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चिली
लैटिन अमरीकी देश चिली अपने पड़ोसी देशों के मुक़ाबले एकदम अलग है. यहां के स्कूल और कॉलेज बेहतरीन हैं. लोगों को बुनियादी शिक्षा मुफ़्त मिलती है. यहां हर नागरिक की सेहत का ख़याल सरकार रखती है. चिली की सरकार लैटिन अमरीका की सबसे भ्रष्टाचार मुक्त सरकार है.
अमरीका से आकर चिली में बसने वाले पीटर मर्फी लुइस कहते हैं कि यहां कारोबार शुरू करना काफ़ी आसान है. अफसरशाही शुरू में भले ही आपको मुश्किल पैदा करने वाली लगे. मगर आपके पास ज़रूरी दस्तावेज़ हैं, तो आपको कुछ हफ़्ते में कारोबार करने की इजाज़त मिल जाएगी.
एक और बात जो चिली के बारे में बहुत अच्छी है कि यहां की सड़कें और बिजली-पानी की सुविधाएं बहुत अच्छी हैं. हाइवे इतने शानदार हैं कि पूछिए मत.
आपको यहां पर मेडिकल की सुविधाएं भी बहुत कम क़ीमत पर मिल जाएंगी. चिली की राजधानी सैंटियागो में दुनिया का सबसे बड़ा शहरी पार्क है. ये मेट्रोपॉलिटन पार्क 1780 हेक्टेयर में फैला हुआ है.
चिली के लोग, विदेशियों से ज़रा कम ही घुलते-मिलते हैं, तो अगर आपका इरादा वहां बसने का है, तो इस मोर्चे पर थोड़ी मशक़्क़त करनी होगी.
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