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ये हैं ब्रिटेन की 'न्यूक्लियर पावर' के रखवाले
पुलिस से आपका सामना कई बार हुआ होगा. आप कितनी तरह की पुलिस के बारे में जानते हैं?
सिविल पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, मिलिट्री पुलिस... और कुछ?
दिमाग़ पर बहुत ज़ोर डालने पर भी किसी और तरह की पुलिस का ख़याल नहीं आता.
मगर ब्रिटेन में एक और तरह की पुलिस फ़ोर्स आजकल काम कर रही है. ये है एटमी पुलिस, या सिविल न्यूक्लियर कॉन्स्टेबुलरी, जिसे ब्रिटेन में सीएनसी (CNC) के नाम से जाना जाता है.
ब्रिटेन की इस पुलिस फ़ोर्स की ज़िम्मेदारी वहां के एटमी पॉवर हाउस की सुरक्षा करना है.
सिविल न्यूक्लियर कॉन्स्टेबुलरी
ब्रिटेन में इस वक़्त कुल 14 एटमी पावर स्टेशन काम कर रहे हैं. जहां न्यूक्लियर एनर्जी पैदा की जाती है. यहां पर बेहद संवेदनशील और ख़तरनाक एटमी पदार्थ होता है, जो किसी ग़ैरवाजिब हाथ में पड़ जाने पर पूरी दुनिया के लिए ख़तरा साबित हो सकता है.
इसीलिए ब्रिटेन के एटमी पावर प्लांट की निगरानी के लिए सिविल न्यूक्लियर कॉन्स्टेबुलरी या एटमी पुलिस की स्थापना की गई.
2001 में अमरीका में 9/11 के आतंकी हमले के बाद वहां के सभी एटमी ठिकानों की सुरक्षा बेहद सख़्त कर दी गई थी.
सभी एटमी ठिकानों पर हथियारबंद सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे. वॉशिंगटन के न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट के मुताबिक़ अमरीका के एटमी ठिकानों पर इससे पहले इतनी तगड़ी सुरक्षा नहीं होती थी.
इसकी बड़ी वजह दुनिया भर में बढ़ती चरमपंथी घटनाएं हैं. जैसे फ्रांस में 2015 के पेरिस हमले के बाद वहां के सभी न्यूक्लियर प्लांट की सुरक्षा कई गुना बढ़ा दी गई.
अमरीका पर आतंकी हमले के बाद ब्रिटेन में भी सभी एटमी ठिकानों की सुरक्षा बढ़ाई गई है. इसी के लिए 2005 में सीएनसी या सिविल न्यूक्लियर कॉन्स्टेबुलरी की स्थापना की गई.
एटमी पुलिस के गठन से पहले ब्रिटेन के एटमी प्लांट की निगरानी का ज़िम्मा एटॉमिक एनर्जी अथॉरिटी कॉन्स्टेबुलरी के हाथ में हाथ.
हालांकि वो भी एटमी पावर प्लांट की निगरानी नहीं करते थे.
इसकी शुरुआत 2005 में एटमी पुलिस या सीएनसी की स्थापना से हुई.
इस ब्रिटिश फोर्स में काम करने वालों को लगातार बेहद सख़्त ट्रेनिंग से गुज़रना होता है. ताकि किसी भी ख़तरे से वो आसानी से निपट सकें.
इसकी बड़ी वजह ये भी है कि कुछ सालों पहले एटमी पुलिस की निगरानी में भी सुरक्षा में सेंध लगी थी. एक गन ग़ायब हो गई थी. एक एटमी प्लांट की चाभी खो गई थी, जिसके बाद सुरक्षा का घेरा और तगड़ा करना पड़ा.
सीएनसी के पुलिसकर्मी लगातार एटमी प्लांट की गश्त करते हैं. इस दौरान उनका सामना कई बार आम लोगों से भी होता है. ये बड़ा मुश्किल वक़्त होता है.
ब्रिटेन में आम तौर पर हथियारबंद पुलिसकर्मी नहीं देखने को मिलते. अमरीका की तरह ब्रिटेन में गन-कल्चर नहीं है. इंग्लैंड और वेल्श को मिलाकर क़रीब दो लाख पुलिसवाले हैं.
इनमें से दस हज़ार के आस-पास पुलिसवालों को ही हथियारों की ट्रेनिंग और हथियार रखने को मिले हैं, लेकिन एटमी पुलिस के हर मुलाज़िम के पास हथियार होते हैं.
इन्हें न सिर्फ़ हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है. बल्कि किसी बड़े आतंकी हमले से निपटने के लिए भी हर वक़्त तैयार किया जाता है.
जब एटमी पावर प्लांट के आस-पास विरोध-प्रदर्शन होते हैं, तब इन पुलिसवालों के लिए मुश्किल ज़्यादा होती है. क्योंकि स्थानीय लोग उनके हथियार रखने पर भी ऐतराज़ जताते हैं.
एटमी पुलिसवाले कहते हैं कि वो स्थानीय लोगों से बातचीत करके, उन्हें अपनी ज़िम्मेदारी समझाकर विवाद को निपटाने की कोशिश करते हैं. अक्सर बात बन जाती है.
सिविल न्यूक्लियर कॉन्स्टेबुलरी के सदस्य न्यू्क्लियर मैटीरियल को यहां से वहां लाने-ले जाने के दौरान भी साथ जाते हैं. क्योंकि इस दौरान भी एटमी पदार्थ की चोरी का डर होता है. ये बेहद ख़तरनाक होता है.
दिन-रात एटमी पावर प्लांट या एटॉमिक मैटीरियल के साथ रहने पर इन पुलिसकर्मियों के रेडिएशन का शिकार होने का डर होता है. इसलिए हर पुलिसकर्मी अपने साथ डोसीमीटर लेकर चलता है. जिससे वक़्त-वक़्त पर रेडिएशन की जांच की जा सके.
सिविल न्यूक्लियर कॉन्टेबुलरी के लोगों को तनख़्वाह वो कंपनियां देती हैं, जिनके पावर प्लांट की वो निगरानी करते हैं. इसका सालाना बजट क़रीब दस करोड़ पाउंड या एक हज़ार करोड़ रुपए का है. इन पुलिस फ़ोर्स के रख-रखाव में सरकार पैसे नहीं ख़र्च करती.
दुनिया में बढ़ते आतंकवादी हमलों को देखते हुए ब्रिटेन की एटमी पुलिस की ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है. ये सिर्फ़ एटमी प्लांट की निगरानी नहीं करते. ये लोग एटमी पदार्थ को विदेश ले जाने या लाने के दौरान भी सुरक्षा के लिए तैनात किए जाते हैं.
हाल के दिनों में इस पुलिस फोर्स में काम करने की उम्र को लेकर मामला अदालत पहुंचा था. अदालत ने कहा कि इस पुलिस फोर्स के लोगों को 65 से 68 साल की उम्र तक काम करना होगा. क्योंकि ये आम पुलिस फोर्स नहीं.
ये सीधे विदेश विभाग की निगरानी में काम करती है, गृह मंत्रालय के अंदर नहीं आती.
एटमी पुलिस के ज़्यादातर कर्मचारी, दूसरी नौकरियों से यहां आते हैं. कोई आर्मी से आता है तो कोई फायर ब्रिगेड से.
सबका यही कहना है कि उन्हें सबसे ज़्यादा मज़ा ट्रेनिंग के दौरान आता है, जो अक्सर होती रहती है. क्योंकि इन्हें हर वक़्त चौकन्ना रहना पड़ता है. इसलिए इनकी तैयारी की पड़ताल के लिए साल में कई बार ट्रेनिंग सेशन चलते हैं.
ब्रिटिश एटमी पुलिस को पता है कि वो कितनी बड़ी ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं. इसीलिए वो इसका तनाव लेने के बजाय ये काम हंसते-खेलते और लोगों से बतियाते हुए करना चाहते हैं.
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