कोरोना वायरस: घर से काम, क्या है सही तरीक़ा

- Author, जूलियन वाटर्स लिंच
- पदनाम, बीबीसी वर्कलाइफ़ के लिए
दुनिया भर की कंपनियों ने घर से काम यानी वर्क फ़रॉम होम को अनिवार्य कर दिया है. ऐसे में पहली बार वर्क फ़रॉम होम को अपनाने वाले कर्मचारियों से लेकर लंबे समय से इस तरह काम करने वालों, सभी को कुछ ख़ास मंत्र अपनाने की ज़रूरत है.
कोविड-19 के प्रसार के साथ ही गूगल, माइक्रोसॉफ़्ट, ट्वीटर, हिताची, एपल, सेल्सफोर्स, स्पोटिफ़ाई जैसी बड़ी कंपनियों से लेकर छोटी-छोटी कंपनियों ने दुनिया भर में वर्क फ़रॉम होम की अनिवार्य नीति अपना ली है.
दुनिया भर में इस महामारी के तेज़ी से फैलते जाने से अब यह तय-सा हो गया है कि अगले कुछ समय हममें से बहुतों को घर से ही दफ्तर का काम करना होगा. कई कर्मचारी पहली बार घर से काम कर रहे हैं, और उनके लिए इस नए माहौल में अपनी उत्पादकता बरक़रार रखना बेहद मुश्किल है. लेकिन कुछ ऐसे उपाय हैं जो इस नई स्थिति से निपटने में आपकी मदद कर सकते हैं.

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संवाद ज़रूरी है
सबसे पहली ज़रूरत है- बॉस से स्पष्ट संवाद. आपको यह मालूम होना चाहिए कि वे आपसे क्या चाहते हैं.
और इसके लिए ज़रूरी है आपसी संवाद के स्पष्ट मानक. नॉर्थ ईस्टर्न यूनिवर्सिटी, बोस्टन में मैनेजमेंट की प्रोफ़ेसर और दूरस्थ कामकाज (रिमोट वर्किंग) की अध्येता बारबरा लारसन का कहना है, "प्रतिदिन संवाद का तरीक़ा क्या होगा, इसके मानक तय होने चाहिए. अपने मैनेजर को सुझाव दें कि हर रोज़ दिन की शुरुआत और समाप्ति के लिए सबके साथ 10 मिनट की वर्चुअल बैठक करें. बहुत बार मैनेजरों ने इस बारे में कुछ नहीं सोचा होता".
असल में, आम दिनों में हममें से अधिकांश लोग अपने बॉस के निकट संपर्क में काम करते हैं, यानी बॉस से कुछ भी जानना या उनका हमें कुछ कहना बेहद आसान और सहज होता है. लेकिन रिमोट वर्किंग में ऐसा मुमकिन नहीं और अगर आपके ऑफ़िस में पहले से रिमोट वर्किंग न होती रही हो तो संवाद टूटने की दिक्क़त और भी बढ़ जाती है. ऐसा भी हो सकता है आपके मैनेजर को लोगों से वर्चुअल ढंग काम लेने की आदत ही न हो या आपकी कंपनी में रिमोट कर्मचारियों के लिए ज़रूरी साधन जैसे चैट एप स्लैक या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप स्काइप या ज़ूम आदि न हों. ऐसे में पहली बार घर से काम कर रहे लोगों के लिए यह काफ़ी मुश्किल और हताशा भरा हो सकता है.
यहाँ तक कि लगातार घर से काम करने वाले कर्मचारियों को भी कई बार हताशा और अकेलापन महसूस होता है. पिछले वर्ष ऑनलाइन ब्रांड डेवलपमेंट एजेंसी बफ़र ने 2500 रिमोट कर्मचारियों का अध्ययन किया और पाया कि दफ्तर के माहौल से अलग-थलग काम करने में अकेलापन दूसरी सबसे बड़ी चुनौती है, 19% उत्तरदाताओं ने इसका अनुभव किया था. इससे काम करने की प्रेरणा और उत्पादकता में कमी आ सकती है.
इसलिए अपने बॉस और टीम के साथ घर से बात करते समय फेस टू फेस संवाद ज़्यादा मददगार है, इसके लिए वीडियो कॉल, स्काइप या ज़ूम का इस्तेमाल करते रहें.
रिमोट जॉब दिलवाने वाली वैबसाइट फ़्लेक्स जॉब्स की सीईओ और संस्थापक सारा सट्टन कहती हैं, "रिमोट कर्मचारियों के लिए नज़रों से दूर तो दिमाग़ से दूर, एक असली समस्या हो सकती है. इसलिए अच्छा रिमोट वर्कर वही है जो अलग-अलग माध्यमों से अपने सहयोगियों और बॉस के लगातार संपर्क में रहे".

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मानें कि आप ऑफ़िस में हैं
वर्क फ़रॉम होम के कुछ ऐसे शाश्वत मंत्र हैं जो कोविड-19 के इस दौर में भी आपके बहुत काम आ सकते हैं. जैसे घर पर काम करने के लिए भी वैसे ही तैयार हों जैसे आप ऑफ़िस जाने के लिए तैयार होते हैं. सिर्फ़ इसलिए कि आप घर के कपड़ों में बिस्तर पर अधलेटे काम कर सकते हैं, ऐसा न करें. लारसन की सलाह है, "नहा धोकर तैयार हों और तभी काम शुरू करें. ऑफ़िस का काम यही मानकर करें कि आप ऑफ़िस में ही हैं".
दूसरी ज़रूरी चीज़ है ऑफ़िस के काम के लिए एक तय जगह. घर के किसी एक कोने को ऑफ़िस का रूप दें, वहाँ से आलतू-फालतू सामान हटाएँ और मेज पर अपना कंप्यूटर और ज़रूरी दफ्तरी सामान रखें. चूंकि अब लंबे समय तक वर्क फ़रॉम होम की स्थिति बनी रहने वाली है, इसलिए यह और भी ज़रूरी हो गया है. वैसे ही कुर्सी पर सीधे बैठकर काम करें जैसे आप ऑफ़िस में काम करते हैं (हाँ बैठे बैठे काम करने से जुड़ी दिक्क़तों के लिए ज़रूरी व्यायाम भी बीच-बीच में करते रहें).
इससे आप भी अपने काम के प्रति समर्पित महसूस करेंगे और बाक़ी घरवालों के लिए भी यह संकेत होगा कि आप काम कर रहे हैं. जॉर्जिया विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर क्रिस्टन शॉकले कहते हैं, "घर के भीतर सीमाएं तय करें और अपने परिवार वालों को उनके बारे में बता दें. जैसे उनसे कहें कि अगर कमरे का दरवाज़ा बंद है तो उन्हें यह मान कर चलना है कि आप घर पर हैं ही नहीं".
रिमोट वर्किंग के सभी फ़ायदों का लाभ उठाने के लिए अलग वर्कस्पेस बेहद ज़रूरी है. फ्लेक्स जॉब्स द्वारा पिछले वर्ष 7000 कर्मचारियों के बीच किए गए एक सर्वेक्षण में 65% ने कहा कि वे घर से काम करने में अपनी क्षमता का अधिक उपयोग कर पाते हैं, क्योंकि साथी कर्मचारियों का दख़ल बहुत कम हो जाता हैं, दफ्तर की राजनीति से न्यूनतम लेना-देना रहता है और ऑफ़िस आने-जाने से पैदा होने वाला तनाव नहीं रहता.
अगला ज़रूरी क़दम है अपने कामकाजी दिन को समाप्त करना. ऊपर जिस बफ़र सर्वेक्षण का ज़िक्र हुआ है, उसमें घर से काम करने वालों की सबसे बड़ी शिकायत यही थी कि वे काम को छोड़ नहीं पाते. जब आप ऑफ़िस जाते हैं तो वहाँ प्रवेश करने पर आपका कामकाजी दिन शुरू होता है और दफ्तर से निकलने पर समाप्त, यानि दफ्तर के काम की एक सीमा तय होती है. लेकिन वर्क फ़रॉम होम करते हुए तो आप लगातार घर में ही रहते हैं, इसलिए कामकाजी दिन की शुरुआत और समाप्ति के लिए कोई स्पष्ट मनोवैज्ञानिक विभाजक रेखा होनी चाहिए. जैसे दिन का काम कॉफी के साथ शुरू करें और काम खत्म होते ही व्यायाम करें. शॉकले की सलाह है, "काम समाप्त करते ही कुछ भी ऐसा करें जिसका आपके काम से कोई लेना देना न हो, आप काम के फ़ौरन बाद व्यायाम कर सकते हैं, कपड़े धो सकते हैं या बच्चों से बात कर सकते हैं और इसे अपने रूटीन में शामिल करें. आपको घर में भी ऐसे ही काम करना है जैसे आप दफ्तर जाने पर करते".

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अकेला महसूस न करें
लेकिन शायद इन सभी उपायों के बावजूद वर्क फ़रॉम होम के इस लंबे दौर में कई बार अकेलापन और हताशा घेर सकती है. असल में वर्क फ़रॉम होम का यह दौर इतना अचानक शुरू हो गया है, लोगों को बिना किसी तैयारी और इच्छा के ऑफ़िस के बजाय घरों से काम करना पड रहा है कि उनके लिए तालमेल बिठाना मुश्किल हो रहा है.
स्टैनफोर्ड यूनिवेर्सिटी, कैलीफोर्निया में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर निकोलस ब्लूम कहते हैं, "कोरोनावायरस के कारण हर किसी को वर्क फ़रॉम होम करना पड़ रहा है. वर्क फ़रॉम होम दो तरह के होते हैं, अल्पावधि या कभी-कभार किया जाने वर्क फ़रॉम होम और स्थायी वर्क फ़रॉम होम. इन दोनों में इतना ही अंतर है जितना हल्के-फुल्के व्यायाम और मैराथन के प्रशिक्षण में".
स्थायी रूप से घर से काम करने के मामले बहुत कम हैं. अमरीका में केवल 5% लोग ही खुद को पूर्णकालिक रिमोट कर्मी कहते हैं. लेकिन अब कोरोना वायरस के कारण पता नहीं कब तक घर से काम करना पड़े. ऐसे में नित नई समस्याएं आ रही हैं. जैसे बच्चों के स्कूल बंद हैं, वे घर पर हैं तो माता-पिता के लिए घर से काम करना मुश्किल हो रहा है.
फिर जो लोग परिवार से दूर रहते हैं, उनके लिए घर से काम करना और भी अकेलापन बढ़ाता है. लंबे समय तक अकेले काम करने से उत्साह और उत्पादकता पर भी असर पड़ता है. ऐसे में लारसन सामान्य माहौल और मित्रभाव बनाए रखने के लिए गैर-पारंपरिक तरीक़ों को अपनाने की सलाह देते हैं. जैसे टीम के सदस्य वर्चुअल पार्टियां कर सकते हैं, एक ही समय पर लॉगिन कर एक साथ अनौपचारिक समय बिता सकते हैं.
लारसन के मुताबिक़ आपस में सबंध विकसित करने का यह बहुत अच्छा तरीक़ा है- कुछ अजीब ज़रूर है लेकिन आजकल सभी अजीब महसूस कर रहे हैं, इसलिए ऐसा करना मजेदार है. यह एहसास कि हम सब साथ हैं, मुश्किल हालात को कुछ हल्का बना देता है.
सट्टन भी ऑफिस में होने वाले सामाजिक कार्यकलापों को ऑनलाइन मंचों पर करने की सलाह से सहमत हैं. वे कहती हैं, "ऑनलाइन जन्मदिन मनाएँ, हासिल लक्ष्यों और पूरी की गयी परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करें और अनौपचारिक बातचीत के लिए समय निकालें".

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उत्साह बनाए रखें
इसमें कोई शक नहीं कि आजकल हालात बेहद तनावपूर्ण हैं. नकारात्मक ख़बरों, अपने बीमार और बूढ़े परिजनों की चिंता और ताबड़तोड़ ख़रीदी की अपनी इच्छा पर क़ाबू पाने की कोशिश में कई बार ऑफ़िस की ईमेल का जवाब देना हमें ध्यान नहीं रहता. लेकिन आप अपने सहयोगियों से संवाद के लिए जितना अधिक प्रयास करेंगे, उतना ही अकेलेपन और अवसाद की भावनाएं आपको कम परेशान करेंगी.
ब्लूम कहते हैं, "दो या चार हफ्ते घर से काम करना आर्थिक और व्यक्तिगत रूप से नुक़सानदेह है, लेकिन फिर भी इसे झेला जा सकता है. लेकिन तीन-चार महीने लगातार घर से काम करने की क़ीमत आर्थिक और स्वास्थ्य के मोर्चे पर बहुत अधिक होगी".
उनका भी यही मानना है कि इसका समाधान वीडियो काल्स के ज़रिये ज़्यादा से ज़्यादा फ़ेस टु फ़ेस ऑनलाइन संवाद है. मैनेजर लगातार अपने अधीनस्थों -ख़ासकर अकेले रहने वाले कर्मचारियों की खोज ख़बर लेते रहें- और बिना किसी एजेंडे के केवल अनौपचारिक चर्चा या साथ कॉफ़ी पीने के लिए ऑनलाइन बैठकें नियमित रूप से आयोजित करते रहें.
इस मुश्किल दौर में मैनेजर का दायित्व है कि वह अपने अधीन काम करने वालों से स्पष्ट संवाद रखे और उनका उत्साह बढ़ाता रहे. लारसन कहती हैं, "मैनेजरों को समझना होगा कि माहौल बेहद कठिन और तनावपूर्ण है. ऐसे में अपनी टीम का मनोबल बनाए रखने के लिए उन्हें चीयरलीडर की भूमिका निभानी होगी".

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