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खेल अधिकारियों पर बरसे बिंद्रा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ओलंपिक में भारत की ओर से एकमात्र स्वर्ण पदक जीतने वाले निशानेबाज़ अभिनव बिंद्रा ने खेल अधिकारियों और प्रशिक्षकों की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि उन्हें खेल के बारे में कुछ नहीं पता. बीजिंग ओलंपिक में अभिनव बिंद्रा ने 10 मीटर एयर राइफ़ल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया. उन्होंने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बातचीत में कहा- ज़्यादातर अधिकारियों के प्रति भारतीय एथलीटों के मन में कोई सम्मान नहीं है. अभिनव बिंद्रा ने कहा कि भारत को खेल शक्ति बनाने के लिए कोई जादुई हल नहीं है. उन्होंने कहा, "अगर हम ओलंपिक में दस या ज़्यादा पदक जीतना चाहते हैं तो हमें अभी से 2016 के ओलंपिक को ध्यान में रखना होगा और तैयारी आज से करनी पड़ेगी." लेकिन अभिनव खेल संघ के रवैए से नाराज़ हैं. उन्होंने कहा कि खेल संघों के पास कोई दूरदृष्टि नहीं है और उन्हें नहीं लगता कि वे बदलने वाला है. नाराज़गी अभिनव ने कहा कि ये भारतीय ओलंपिक संघ का काम है कि वो एथलीटों को तैयार करे लेकिन उसने कुछ नहीं किया है. बिंद्रा ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बातचीत में ये सारी बातें कही. अभिनव बिंद्रा को टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने अपने शुक्रवार के अंक का संपादन करने के लिए बुलाया. भारतीय खेल अधिकारियों और संघ से नाराज़ अभिनव ने यहाँ तक कहा कि खिलाड़ी अधिकारियों से अच्छा संबंध बना कर रखते हैं क्योंकि तभी वे बचे रह सकते हैं. उन्होंने कहा, "'टीम से साथ यात्रा करने वाले ज़्यादातर अधिकारी और कथित प्रशिक्षक खेल के बारे में कुछ नहीं जानते. खिलाड़ी इसके बारे में इसलिए बात नहीं करते क्योंकि उनका करियर दाँव पर लगा होता है." अभिनव ने यह भी बताया कि उन्हें जर्मनी स्थित ट्रेनिंग बेस से बीजिंग जाने के लिए ख़ुद ही पैसा देना पड़ा क्योंकि ओलंपिक अधिकारियों ने पैसे देने से इनकार कर दिया. अभिनव बिंद्रा ने क्रिकेट के पीछे पागल भारतीय मीडिया को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि ओलंपिक खेलों को उतना प्रचार नहीं मिलता जितना उन्हें मिलना चाहिए. |
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