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मंगलवार, 24 अक्तूबर, 2006 को 16:14 GMT तक के समाचार
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खिलाड़ियों ने परदेस में मनाई ईद

पाकिस्तानी खिलाड़ी
पाकिस्तानी खिलाड़ियों को देखने के लिए भारी भीड़ जमा थीं
सरहद के पार क्रिकेट खेलने आए पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने ईद का त्योहार चंडीगढ़ में मनाया.

पाकिस्तानी खिलाड़ियों का कहना है कि ईद के मौक़े पर घर, दोस्तों और रिश्तेदारों की याद तो आ रही है लेकिन हिन्दुस्तान में अपनी ज़मीन से दूर होने का अहसास ही नहीं होता.

वैसे तो पाकिस्तानी क्रिकेटर पिछले कई दिनों से ईद मना रहे हैं, इफ़्तार पार्टियाँ होती रही हैं, शॉपिंग करने और फ़िल्में देखने का सिलसिला भी चला.

लेकिन मंगलवार को अपने बोलिंग कोच वक़ार यूनुस के साथ पूरी टीम चंडीगढ़ की जामा मस्जिद गई और ईद की नमाज़ अदा की.

पाकिस्तानी खिलाड़ी जब वहाँ पहुँचे तो हरियाणा के गवर्नर ए आर क़िदवई के अलावा सैकड़ों मुसलमान नमाज़ पढ़ रहे थे.

पाकिस्तानी खिलाड़ियों की एक झलक पाने के लिए, उनसे हाथ मिलाने के लिए लोगों में होड़ लग गई.

लेकिन कड़े सुरक्षा इंतज़ामों की वजह से सब को ये मौक़ा नहीं मिल पाया.

ईद और दीवाली

 इस बार भारत में हमने दीवाली भी देखी और ईद भी, और ये देख कर अच्छा लगा कि किस तरह यहाँ हर त्योहार उसी जोश के साथ मनाया जाता है. इस मामले में यहाँ के लोग अच्छे हैं
यूनुस खान

नमाज़ के बाद टीम के कप्तान यूनुस ख़ान ने कहा, "हिन्दुस्तान और पाकिस्तान में सब को ईद मुबारक़. ये भारत में हमारी दूसरी ईद है, पिछली बार भी हम यहीं कोलकाता में थे."

उन्होंने कहा," इस बार भारत में हमने दीवाली भी देखी और ईद भी, और ये देख कर अच्छा लगा कि किस तरह यहाँ हर त्योहार उसी जोश के साथ मनाया जाता है. इस मामले में यहाँ के लोग अच्छे हैं."

नमाज़ के बाद यूनुस ख़ान कोच बॉब वूल्मर के साथ उस प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में गए जहाँ बात तो होनी थी बुधवार को न्यूज़ीलैंड के साथ होने वाले मैच की लेकिन टीम में मज़हब के रोल को लेकर भी सवाल उठे.

आम तौर पर ख़ुश मिज़ाज रहने वाले यूनुस थोड़े परेशान हुए जब उनका ध्यान पीसीबी के चैयरमैन नसीम अशरफ़ के बयान की तरफ़ दिलाया गया.

इस बयान में उन्होंने कहा था कि क्रिकेट और मज़हब में एक संतुलन होना चाहिए और किसी भी खिलाड़ी पर कुछ थोपा नहीं जाना चाहिए.

इस पर यूनुस बोले," हमारी टीम में तो सब मुसलमान हैं इसलिए मज़हब तो कोई मुद्दा ही नहीं है. सिर्फ़ दानिश कनेरिया हिन्दू हैं लेकिन वो भी यहाँ नहीं हैं."

सोमवार को ही इंज़माम उल हक़ ने भी बीबीसी से बात करते हुए कुछ ऐसी ही बात कही थी.

उन्होंने कहा था कि टीम में किसी भी खिलाड़ी को न तो नमाज़ पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता है और न ही दाढ़ी बढ़ाने के लिए, और न ही उन्होंने टीम के चयन को कभी मज़हब से जोड़ा है.

सेवइयाँ और मिठाई...

पिछले साल से पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने मिल कर एक साथ नमाज़ पढ़ना शुरू किया है चाहे वो मैदान पर हों या फिर होटल में.

कहा जाता है कि इंज़माम, पिछले साल ईसाई से मुसलमान बने मोहम्मद यूसुफ़, हाल तक टीम के बोलिंग कोच रहे मुश्ताक़ अहमद और अपने ज़माने के मशहूर सलामी बल्लेबाज़ सईद अनवर ही पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को मज़हब के क़रीब लाए हैं.

यही क़रीबी अब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन डॉ नसीम अशरफ़ और देश के मज़हबी लोगों के बीच तकरार की वजह बन गई है.

ख़ैर, उस सब से दूर यहाँ मोहाली में जिस होटल में पाकिस्तानी टीम ठहरी हुई है, वहाँ के ख़ानसामों ने खिलाड़ियों के लिए ख़ास तौर पर सेवइयाँ और ईद की दूसरी मिठाइयाँ बनाई हैं.

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