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गुरुवार, 02 मार्च, 2006 को 15:33 GMT तक के समाचार
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चैपल को बयानबाज़ी से बचने का निर्देश
गांगुली-चैपल
छह महीने पहले शुरू हुआ था गांगुली-चैपल विवाद
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने भारतीय टीम के कोच ग्रेग चैपल को निर्देश दिया है कि वो पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी बंद करें.

गांगुली ने ब्रितानी अख़बार 'गार्डियन' में छपे चैपल के एक इंटरव्यू पर आपत्ति जताई थी.

चैपल ने इस इंटरव्यू में कहा कि गांगुली कप्तान इसलिए बने रहना चाहते थे क्योंकि ये उनकी ज़िंदगी और आर्थिक ज़रुरतों के लिए बेहद ज़रुरी है.

बीसीसीआई के सचिव निरंजन शाह ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि चैपल को इस तरह की बात प्रेस में नहीं कहनी चाहिए थी.

 हमने चैपल को पत्र लिख कर कहा है कि वो भविष्य में ऐसे बयान देने से बचें, और टीम और उसके प्रदर्शन के संबंध में ही टिप्पणी करें.
निरंजन शाह

उन्होंने कहा, "हमने चैपल को पत्र लिख कर कहा है कि वो भविष्य में ऐसे बयान देने से बचें, और टीम और उसके प्रदर्शन के संबंध में ही टिप्पणी करें."

शाह ने कहा, "हम समझते हैं भविष्य में इस तरह की बात नहीं होगी."

शाह ने ये भी कहा कि जिन बातों पर गांगुली ने आपत्ति जताई है उन बातों से वह भी सहमत हैं.

पुराना विवाद

गांगुली और चैपल के बीच टकराव पहली बार पिछले साल सितंबर में ज़िंबाव्वे दौरे के दौरान सामने आया. गांगुली ने तब बताया था कि पहले उन्हें कप्तान का पद छोड़ने को कहा गया था.

चैपल ने बोर्ड को ईमेल कर कहा कि गांगुली शारिरिक और मानसिक रुप से खेलने लायक नहीं हैं. बाद में ये ईमेल भारतीय प्रेस के हाथों में पड़ गई और मीडिया ने जमकर इसे उछाला.

 वो बस कप्तान बने रहना चाहते थे. मध्यम स्तर का प्रदर्शन उन्हें और टीम को थका रहा था. कप्तानी छोड़ना उनके निजी और टीम के हित में था.
ग्रेग चैपल

इस विवाद के तूल पकड़ने के बाद बीसीसीआई ने दोनों को मुंबई बुलाकर अपने मतभेदों को मिटाने को कहा. इस घटना के बाद गांगुली को कप्तानी से हाथ धोना पड़ा और कमान सौंप दी गई उप कप्तान राहुल द्राविड़ के हाथों में.

चैपल के नए बयान की बात करें तो उन्होंने यह भी माना है कि उन्हें कोच बनाने में गांगुली का भी हाथ रहा है. लेकिन उनका ये भी मानना है कि गांगुली ने यह सोचा था कि वह जॉन(राईट) की ही तरह उन्हें भी भगाने में कामयाब होंगें.

चैपल के अनुसार विवाद की जड़ में यह तथ्य था कि गांगुली को रन बनाने में मुश्किल हो रही थी और उनके लिए कप्तानी छोड़ना ही उचित था.

चैपल कहते हैं, "वो बस कप्तान बने रहना चाहते थे. मध्यम स्तर का प्रदर्शन उन्हें और टीम को थका रहा था. कप्तानी छोड़ना उनके निजी और टीम के हित में था."

गांगुली भारत के टेस्ट क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कप्तान रहे हैं. उनके कप्तान रहते हुए भारत ने सबसे ज़्यादा मैच जीते और उन्होंने 88 मैचों में 88 की औसत पर खेलते हुए 5,000 रन भी बनाए.

गांगुली ने 279 एकदिवसीय मैच खेलते हुए तीन साल पहले टीम को दक्षिण अफ्रीका में वर्ल्ड कप फाइनल में भी पहुँचाया.

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