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'फ़्लिंटफ़ का दावा अजीबोगरीब' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय क्रिकेट अधिकारियों ने इंग्लैंड के खिलाड़ी एंड्रयू फ्लिंटफ़ के इस दावे को 'अजीबोगरीब' बताया है कि उन पर तीन वर्ष पहले एक मैच के दौरान गोली चलाई गई थी. दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सीके खन्ना कहते हैं, "अगर सचमुच ऐसा कुछ हुआ था तो फ्लिंटफ़ इस बारे में चुप क्यों रहे? उन्हें अब उस घटना की याद कहाँ से आ गई? हमसे कभी किसी ने इसका ज़िक्र तक नहीं किया, वे मज़ाक कर रहे हैं." एंड्रयू फ्लिंटफ़ ने अपनी आत्मकथा 'बीइंग फ्रेडी' में रहस्य खोला है कि उन पर गोली चलने की घटना के बाद इंग्लैंड के क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों ने मामले को दबा दिया. फ्लिंटॉफ़ की आत्मकथा को ब्रिटेन के दो लोकप्रिय अख़बारों ने सिलसिलेवार प्रकाशित किया है, ये अख़बार हैं 'द सन' और 'द टाइम'. फ्लिंटफ़ ने कहा, "अब मुड़कर देखता हूँ तो मुझे लगता है कि इस मामले पर मुझे स्टैंड लेना चाहिए था, मैं क्रिकेट खेलने गया था, गोली खाने नहीं." फ्लिंटफ़ का कहना है कि यह घटना दिल्ली में खेले गए एक मैच के दौरान वर्ष 2002 में हुई, इस रोमांचक मैच में फ्लिंटफ़ ने 52 रन बनाए और उनकी टीम दो रन से मैच जीत गई थी. उन्होंने आत्मकथा में लिखा है, "मुझे किसी चीज़ से चोट लगने का एहसास हुआ, मैंने मैदान पर देखा कि गोली के छर्रे पड़े हुए हैं." फ्लिंटफ़ कहते हैं, "भारत-पाकिस्तान में लोग मैच के दौरान आपके ऊपर प्लास्टिक की बोतलें फेंक सकते हैं लेकिन आप ये उम्मीद तो नहीं करते कि कोई आपके ऊपर गोली चलाएगा." दिल्ली पुलिस ने इस दावे पर आश्चर्य प्रकट किया है, दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता रवि पवार ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "अगर ऐसी कोई घटना हुई होती तो हमें उसका पता ज़रूर चलता और कार्रवाई की जाती." वे कहते हैं, "इतने लंबे समय बाद इस मामले को उठाने का क्या मतलब है, दिल्ली पुलिस के पास इस बारे में कोई जानकारी नहीं है." इंग्लैंड की टीम वर्ष 2002 में क्रिकेट श्रृंखला के लिए भारत गई थी, शुरू में ग्यारह सितंबर की घटना को लेकर ऐसा लग रहा था कि दौरे पर असर पड़ सकता है लेकिन सभी मैच तय कार्यक्रम के अनुसार खेले गए थे. |
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