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गांगुली ने प्रतिबंध को चुनौती दी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरभ गांगुली ने टीम की धीमी गेंदबाज़ी के कारण उन पर लगे छह मैचों के प्रतिबंध को चुनौती दी है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद(आईसीसी) ने इस बात की पुष्टि की है. आईसीसी दो दिनों के भीतर यह मामला अपने आचार संहिता आयोग के किसी सदस्य को सौंपेगी जो प्रतिबंध को और सख़्त बनाने या फिर उसमें रियायत देन के बारे में निर्णय करेगा. यह फ़ैसला सात दिनों के भीतर किया जाएगा. चूंकि मामला देखने वाला परिषद का अधिकारी भारत या पाकिस्तान का नहीं होकर किसी तीसरे देश का होना चाहिए, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर और ब्रॉडकॉस्टर रिची बेनो को ये ज़िम्मेदारी सौंपी जाएगी. उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अहमदाबाद एकदिवसीय मैच के दौरान मैच रेफ़री क्रिस ब्रोड ने गांगुली के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों की घोषणा की थी. दरअसल भारतीय टीम ने 48 ओवर फेंकने में 236 मिनट लगाए थे जोकि निर्धारित समय से 26 मिनट ज़्यादा था. सख़्त सजा पिछले पाँच महीनों के दौरान यह तीसरा मौक़ा था जब टीम की धीमी गेंदबाज़ी के कारण गांगुली को दंडित किया गया. लेकिन इस बार मैच रेफ़री इंग्लैंड के पूर्व बल्लेबाज़ ब्रॉड ने कुछ ज़्यादा ही सख़्ती दिखाई और उन्हें मौजूदा सिरीज़ के दौ मैचों समेत कुल छह मैचों के लिए प्रतिबंधित कर दिया. गांगुली पर आईसीसी के दिशानिर्देशों के उल्लंघन के लिए आठ मैचों का प्रतिबंध तक लगाया जा सकता था. हालांकि भारतीय क्रिकेट बोर्ड इस क़दर सख़्त सजा से सहमत नहीं है. बोर्ड की क़ानूनी सलाहकार उषा नाथ बनर्जी ने कहा, "धीमी गेंदबाज़ी को आईसीसी की आचार संहिता में तीसरे दर्ज़े का अपराध मानना मैच रेफ़री के 'मेकेनिकल ऑपरेशन' से ज़्यादा कुछ नहीं है." उन्होंने कहा, "वास्तव में यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है." |
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