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कोलकाता में सुपर-सन्डे का मज़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सुपर सन्डे रविवार के दिन भारत-पाकिस्तान टेस्ट में दिलचस्प क्लायमेक्स की संभावना देखते हुए आख़िरी दिन को सुपर सन्डे कहा जा रहा था. मैच के शुरुआती चार दिन तो 60 हज़ार से ज़्यादा सीटें कभी नहीं भरीं लेकिन पाँचवें दिन रविवार की छुट्टी रहने और मैच के दिलचस्प मोड़ पर होने के चलते स्टेडियम के खचाखच रहने की उम्मीद थी. अब तक स्टेडियम के बाहर सुनाई देता था – दादा टिकट लगबे, यानि क्या आपको टिकट चाहिए. लेकिन अब हर कोई यही कहता मिल रहा था – दादा एक्स्ट्रा आचे, यानि क्या आपके पास एक्सट्रा टिकट है. राहुल ही राहुल मैच के चौथे दिन जब राहुल द्रविड ने दूसरी पारी में भी शतक लगाया तो दर्शकों ने ख़ूब तालियाँ पीटीं. लेकिन थोड़ी देर बाद अचानक बहुत से लोग वीआईपी दर्शक दीर्घा की तरफ़ देख कर राहुल-राहुल चिल्लाने लगे. सब सोचने लगे कि द्रविड ने शतक के बाद दोहरा शतक तो पूरा किया नहीं है तो फिर अचानक ये राहुल-राहुल क्यों, और वो भी दर्शक दीर्घा की तरफ़ देख कर. ग़ौर से देखा तो पता लगा कि फ़िल्म अभिनेता राहुल बोस मैच देखने आए हुए थे और कोलकाता में उनका ऐसा स्वागत होना तो स्वाभाविक ही है. सचिन की खेल भावना कोलकाता टेस्ट की दूसरी पारी में सचिन तेंदुलकर जब अंपायर स्टीव बकनर के विवादास्पद फ़ैसले का शिकार हुए तो पैवेलियन लौटते समय ग़ुस्सा और झुंझलाहट उनके चेहरे पर साफ़ देखा जा सकता था. हर परिस्थिति में संयम दिखाने वाले सचिन शायद एक बार फिर रिकॉर्ड 35वें शतक से चूँकने का दर्द छिपा नहीं पाए. लेकिन उनकी खेल भावना पर सवाल खड़ा करना सही नहीं होगा क्योंकि मैच के चौथे दिन जब उसी अंपायर को 100 टेस्ट मैच पूरे करने के लिए सम्मानित किया जा रहा था तो सचिन उन्हें मुबारकबाद देने वालों में सबसे आगे खड़े थे. सचिन, शुमाकर और कार्तिकेयन रफ़्तार और तेज़ गाड़ियों का सचिन का शौक़ किसी से छिपा नहीं है. ये भी सब जानते हैं कि सचिन फ़ॉर्मुला वन कार रेसिंग के दीवाने हैं और माइकल शुमाकर के साथ उनकी दोस्ती है. शुमाकर ने ही उन्हें फ़ेरारी कार भी तोहफ़े में दी थी. और अब जब भारत के ही नारायण कार्तिकेयन भी उसी फ़ॉर्मुला वन कार रेस में जॉर्डन की तरफ़ से हिस्सा ले रहे हैं तो सचिन अपने इन दोनों दोस्तों के अच्छे प्रदर्शन की कामना कर रहे हैं. हर बार की तरह अपने दोस्त शुमाकर को तो उन्होंने गुड लक कहा ही है, साथ ही हमवतन कार्तिकेयन को भी दबाव झेलने के लिए कुछ टिप्स दिए हैं. वैसे भी सचिन के लिए कोई धर्मसंकट तो होना नहीं चाहिए क्योंकि सभी जानते हैं इस रेस में शुमाकर कहाँ होंगे और कार्तिकेयन कहाँ. फिर भी दोनों ही के बारे में खुल कर बात करने से कतरा रहे हैं सचिन. |
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