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विदेशी कोच ने साज़िश की: प्रतिमा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रतिबंधित दवा लेने की दोषी पाई गई भारतीय भारोत्तोलक प्रतिमा कुमारी ने पूरे मामले में बेलारूसी कोच तारानेन्को को दोषी ठहराया है. बीबीसी हिंदी सेवा से बातचीत में उन्होंने उस घटना का ज़िक्र किया जिसके बाद संभवत: उन्हें प्रतिबंधित दवा दी गई. प्रतिमा ने कहा, "बेलारूस में मैं दो स्थानीय लड़कियों के साथ प्रशिक्षण ले रही थी जो हमारे समान ही 63 किलोग्राम वर्ग की प्रतियोगी थीं." उन्होंने कहा, ''दोनों बेलारूसी लड़कियाँ कोच तारानेन्को की शिष्या हैं और 220 किलोग्राम उठा कर उनमें से एक ने कांस्य पदक जीता भी है, जबकि मैं 235 किलोग्राम उठाती थी.'' पीठ दर्द उन्होंने कहा, "जब मेरी पीठ में दर्द हुआ तो मैंने फ़िजयोथेरैपिक उपचार की माँग की लेकिन मेरे कोच ने मुझे एक इंजेक्शन दिलवा दिया. उसके बाद दर्द और बढ़ गया. फिर मेरी रीढ़ में एक-एक कर 10 इंजेक्शन लगाए गए."
उन्होंने कहा, "इसके बाद भी मुझे 10-15 और इंजेक्शन लगाए गए. भारत भिजवाने की मेरी बात भी नहीं मानी गई." प्रतिमा ने कहा कि उन्हें पता नहीं उन्हें कौन-सा इंजेक्शन दिया जाता था, क्योंकि उस पर सिर्फ़ रूसी भाषा में लिखा होता था. उन्होंने कहा कि बेलारूसी कोच लियोनिद तारानेन्को जब उन्हें अपने दोस्त डॉक्टर के पास इंजेक्शन दिलाने ले जाता था तो भारतीय कोच पाल सिंह संधू भी साथ होते थे. यह पूछे जाने पर कि एक महीना पहले दिल्ली में जाँच में डोपिंग की बात क्यों नहीं सामने आई, प्रतिमा ने कहा, "हो सकता है मेरे सैम्पल की जाँच नहीं की गई हो." उन्होंने कहा कि 10 साल के कैरियर में उन पर कभी प्रतिबंधित दवाओं के सेवन का आरोप नहीं लगा, इसलिए साजिश का पर्दाफाश करने के लिए वह खेल मंत्री से मिलेंगी. |
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