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शरापोवा ने विंबलडन जीतकर इतिहास रचा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूस की 17 वर्षीय मारिया शरापोवा ने पिछली चैंपियन अमरीका की सरीना विलियम्स को सीधे सेटों में 6-1, 6-4 से हराकर विंबलडन में इतिहास बनाया. मारिया शरापोवा विंबलडन का ख़िताब जीतने वाली रूस की पहली महिला खिलाड़ी बनीं और दूसरी सबसे कम उम्र की खिलाड़ी. उनसे पहले स्विट्ज़रलैंड की मार्टिना हिंगिस ने 1997 में सिर्फ़ 16 साल की उम्र में विंबलडन का ख़िताब जीता था. फ़ाइनल में लगा ही नहीं कि शरापोवा के सामने पिछले साल की चैंपियन और शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी सरीना विलियम्स हैं. लगातार तीसरी बार विंबलडन का ख़िताब जीतने का सरीना का सपना चकनाचूर हो गया और ऐसा हुआ शरापोवा के शक्तिशाली खेल की बदौलत. हर क्षेत्र में मात कोर्ट पर दौड़ हो, क्रॉस कोर्ट शॉट हो, रिटर्न शॉट हो, बैंक हैंड हो या फिर ड्रॉप शॉट- शरापोवा ने हर क्षेत्र में सरीना को पीछे छोड़ दिया.
पहले सेट से ही शरापोवा के सामने बौनी साबित होने लगीं थीं सरीना. पहले सेट में सरीना की सर्विस दो बार ब्रेक हुई और स्कोर हो गया 5-1. अपनी सर्विस पर सेट जीतने को तैयार शरापोवा ने तीन मैच प्वाइंट गँवाए लेकिन आख़िरकार जीत उनकी ही हुई स्कोर रहा 6-1. पहले सेट में क़रारी हार के बाद सरीना का मनोबल दूसरे सेट में थोड़ा संभला ज़रूर लेकिन वह उनकी जीत के लिए काफ़ी नहीं था. एक बार तो सरीना शरापोवा की सर्विस ब्रेक करके 4-2 से आगे थीं. लेकिन शरापोवा ने अगले गेम में सरीना की सर्विस ब्रेक की और फिर अपनी सर्विस पर गेम जीतकर स्कोर 4-4 कर दिया. शरापोवा के इस शानदार खेल की सरीना ने भी प्रशंसा की. 4-4 पर एक बार फिर सरीना की सर्विस ब्रेक हुई और दर्शकों को तो इसका भरोसा ही नहीं हो रहा था कि वे सरीना विलियम्स का खेल देख रहे हैं. अगले सेट में वही हुआ जिसका ख़्वाब सालों पहले देखा था शरापोवा ने. यानी प्रतिष्ठित विंबलडन प्रतियोगिता का ख़िताब जीतना और वो भी शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी को मात देकर. शरापोवा का सपना तो सच हो ही गया. |
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