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अभिजीत काले पर 31 दिसंबर तक पाबंदी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अभिजीत काले को दो चयनकर्ताओं को रिश्वत देने की कोशिश करने का दोषी पाया है और उन पर 31 दिसंबर 2004 तक किसी भी टूर्नामेंट में खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया है. अभिजीत काले पर आरोप था कि उन्होंने भारतीय टीम में जगह पाने के लिए रिश्वत देने की कोशिश की थी और बाद में इस आरोप को ख़ुद स्वीकार कर लिया था. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने बुधवार को बोर्ड की एक बैठक के बाद कहा कि अभिजीत काले को चयनकर्ताओं प्रणव रॉय और किरण मोरे को पिछले साल रिश्वत देने की कोशिश करने का दोषी पाया गया है. उन्होंने कहा कि अभिजीत काले ने अपनी ग़लती स्वीकार कर ली थी और बोर्ड से रियायत बरतने की अपील की थी, क्योंकि उन पर पिछली जुलाई से ही प्रतिबंध लगा हुआ है. बीसीसीआई के अध्यक्ष डालमिया का कहना था कि इस दौरान उनके खेल जीवन पर वैसे भी असर पड़ा है. उन्होंने कहा, "चूँकि उन्हें अपने किए पर पछतावा है इसलिए बोर्ड उन पर जीवन भर के लिए प्रतिबंध नहीं लगा रहा है." 'सस्ते छूट गए' बोर्ड ने अभिजीत काले पर इस साल के अंत तक प्रतिबंध लगाया है लेकिन कुछ पूर्व क्रिकेट खिलाड़ियों का कहना है कि वे सस्ते छूट गए. पूर्व बल्लेबाज़ गोपाल बोस ने कहा, "अभिजीत काले पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए था क्योंकि इस तरह की सज़ा के बगैर बोर्ड इस तरह के भ्रष्टाचार को रोक नहीं पाएगा." पिछले साल जब यह मामला सामने आया था तो इसने मैच फ़िक्सिंग की तरह की तहलका मचाया था. |
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