BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
सोमवार, 29 मार्च, 2004 को 09:16 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
नई ऊँचाई पर पहुँचे सहवाग

सहवाग
धमाकेदार बल्लेबाज़ी सहवाग का शौक है
वे जब पिच पर होते हैं तो रन पानी की तरह बहते हैं. उनके सामने गेंदबाज़ों का दीन-हीन बना रहना समझ में आता है.

कहा जाता है कि धैर्य से खेलना उनकी रूह में नहीं. ज़्यादा देर तक गेंदबाज़ों को सम्मान देने में उनका भरोसा नहीं.

सहवाग चाहे टेस्ट खेल रहे हों या वनडे उनका बल्ला आग उगलता है और रनों की जैसे बारिश होती है.

पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक मुल्तान टेस्ट में फटाफट क्रिकेट की पौध कहे जाने वाले इस खिलाड़ी ने भारत के लिए एक नया मुकाम हासिल किया.

वे भारत की ओर से पहला तिहरा शतक बनाने वाले खिलाड़ी बने.

लंबा अंतराल

1932 से भारत ने टेस्ट खेलना शुरू किया था लेकिन सहवाग से पहले 300 रनों को पार पाने में कोई भी भारतीय खिलाड़ी सक्षम नहीं हो पाया था.

News image
सचिन और सहवाग की जोड़ी मैदान पर दर्शनीय

भारत ने टेस्ट क्रिकेट की दुनिया को कई महान बल्लेबाज़ दिए हैं. लाला अमरनाथ, विजय हज़ारे और विजय मर्चेंट से लेकर सुनील गावसकर और गुंडप्पा विश्वनाथ तक और फिर आज के सुपर बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर और धैर्य से खेलने में माहिर वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़.

लेकिन कोई भी बल्लेबाज़ मुल्तान टेस्ट से पहले 300 रनों के लक्ष्य को पार नहीं कर पाया था.

भारतीय बल्लेबाज़ी का लोहा मानने वाली दुनिया ने कई तिहरे शतक देखे. पाकिस्तान और श्रीलंका के बल्लेबाज़ों तक ने इस स्कोर को पार कर लिया था लेकिन भारत के लिए वह सपना ही बना रहा था.

लेकिन नज़फ़गढ़ के तेंदुलकर कहे जाने वाले विस्फोटक वीरेंदर सहवाग ने अपने आदर्श सचिन तेंदुलकर की मौजूदगी में भारत के लिए नई ऊँचाई हासिल की.

क्रिकेट जीवन

20 अक्तूबर 1978 को दिल्ली में जन्में वीरेंदर सहवाग ने पढ़ाई से ज़्यादा जब क्रिकेट पर ध्यान देना शुरू किया तो यह घर वालों को भी नागवार नहीं गुजरा.

News image
टीम में उनकी मौजूदगी सुखद

दरअसल अपने घर वालों और दोस्तों की मदद से ही सहवाग ने क्रिकेट को अपना करियर बनाने में सफलता पाई.

उनके क़रीबी बताते हैं कि शुरू से ही सहवाग की बल्लेबाज़ी का अंदाज़ धमाकेदार था यानी गेंदबाज़ों को कोई राहत नहीं.

दिल्ली की ओर से रणजी खेलने का मौक़ा उन्हें मिला और फिर जल्द ही राष्ट्रीय टीम में भी उन्हें जगह मिल गई.

1998-99 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मोहाली वनडे में उन्हें भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने का मौक़ा मिला.

उन्होंने अपनी धमाकेदार बल्लेबाज़ी से दिखा दिया कि वनडे मैचों के लिए वे उपयुक्त खिलाड़ी हैं यानी बल्लेबाज़ी के साथ-साथ बढ़िया फ़ील्डिंग और कभी-कभी उपयोगी गेंदबाज़ी भी.

पहले टेस्ट में शतक

शुरु के एक-दो वर्षों में उन पर जैसे वनडे स्पेशलिस्ट का ठप्पा सा लग गया. उन्हें दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ 2001-02 की सिरीज़ में टेस्ट खेलने का मौक़ा मिला और पहले ही टेस्ट में शतक लगाकर उन्होंने जता दिया कि यहाँ भी उनकी ज़रूरत है.

News image
सहवाग ने अपने पहले टेस्ट में ही शतक लगाया था

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पिछले साल ही उन्होंने 195 रनों की धमाकेदार पारी खेली थी.

और एक दिवसीय मैचों में उनकी इतनी यादगार पारी है कि पूछिए मत. एक दिवसीय मैचों में सहवाग और सचिन ने मिलकर भारत को कई धमाकेदार शुरुआत दिलाई है और कई मैचों में ये दोनों भारत की जीत के आधार रहे हैं.

अब टेस्ट मैच में भी सहवाग ने आकाश चोपड़ा के साथ मिलकर भारत के लिए अच्छी सलामी जोड़ी बना ली है.

अपनी 309 रनों की बेमिसाल पारी के बाद सहवाग से उम्मीदें बढ़ी हैं. अब उनकी नज़रें मैथ्यू हेडन के 380 रनों पर ज़रूर होंगी.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>