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सोहन हलवा का शहर मुल्तान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सिन्धु नदी के तट से लगभग 35 किलोमीटर दूर बसा शहर मुल्तान दुनिया के प्राचीनतम शहरों में से एक है. कहते हैं कि पिछले साढ़े चार हज़ार वर्षों से यह शहर एक ही स्थान पर बसा हुआ है. सूती कपड़े और मीठे रसीले आमों का यह शहर मज़ारों का भी शहर है, ख़ास कर सूफ़ी सन्तों के मज़ारों का शहर. वैसे तो सैंकड़ो मज़ार हैं यहाँ लेकिन सबसे अधिक संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ दो सन्तों के मज़ारों पर ज़ियारत करने आती है- बहाउद्दीन ज़करिया के मज़ार पर और उनके पोते शाह रुक्ने आलम के मज़ार पर. दोनों मज़ार आसपास हैं और दोनों मज़ारों पर दक्षिण एशियाई वास्तुकला का प्रभाव है- सफेद गुम्बद और नीली चमकदार टाइल्स के साथ-साथ शीशे के टुकड़ों से सजी मीनार और दीवारें. मैं जब इन मज़ारों की तरफ़ बढ़ा तो मेरे टैक्सी वाले ने कहा- साहब आप बहुत किस्मत वाले हैं, बहाउद्दीन ज़करिया के उर्स मुबारक़ के मौक़े पर आए हैं. दुनिया भर से आए श्रद्धालुओं की भीड़ मज़ार की ओर बढ़ रही थी जिनमें से ज़्यादातर लोग पाकिस्तान के सिंध प्रांत थे और उनमें से अनेक हिन्दू धर्म के अनुयायी. मस्ती में नाचते-गाते, बाजे-गाजे के साथ अपने पीर को चढ़ाने वाली चादर को फैलाए मज़ार की ओर बढ़ते लोगों को देखकर मेरे मन में वसुधैव कुटुम्बकम की भावना मूर्त रूप ले रही थी. श्रद्धा, भक्ति, प्रेम और भाईचारे के प्रतीक सूफ़ियों का पड़ाव था मुल्तान शहर. ईरान और दक्षिण एशिया से भारत आने वाले सूफ़ी सन्त मुल्तान में पहली बार डेरा डालते थे. आज ज़ायरीन अपने मज़हबों को भूलकर ज़ियारत करने इस पवित्र शहर में जमा होते हैं. बहाउद्दीन ज़िकरिया के मज़ार से सटा हुआ एक छोटा-सा मन्दिर भी था- प्रहलाद का मन्दिर, जिसके भग्नावशेष अब भी देखे जा सकते हैं.
मुल्तान शहर के केंद्र में एक ऊँचे टीले पर बने इन मज़ारों से होता हुआ मैं पास के बाज़ार हुसैन अगाही पहुँचा और वहाँ पहुँचने पर पता चला कि मिठाईप्रेमियों के लिए बना सोहन हलवा मुल्तान की ही देन है. यहाँ सबसे मशहूर मिठाई की दुकान का नाम है- रेवाड़ी स्वीट्स, जिसके मालिक रेवाड़ी से आकर मुल्तान में बस गए थे. हुसैन अगाही बाज़ार के पास ही है चौक बाज़ार जहाँ कशीदाकारी वाले कपड़ों की भरमार है और साथ में है चूड़ियों का बाज़ार- चूड़ी सराय. जहाँ भी गया, लोगों ने यह सुनते ही गले से लगा लिया कि मैं भारत से आया हूँ. बाज़ार में रौनक बढ़ रही थी लेकिन मुझे भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों से मिलने उनके होटल पहुँचना था. ख़ैर, कल आपको ले चलेंगे मुल्तान के किसी दूसरे हिस्सों में. |
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