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'ये मेरा हाथ है और मेरा करियर है'
भारत के स्पिनर हरभजन सिंह ने उन आलोचकों को करारा जवाब दिया है जो उन की चोट को लेकर हल्ला मचा रहे हैं. बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में भज्जी ने कहा कि उन्होंने वही किया जो उनके हाथ और उनके करियर के लिए ठीक था. एडिलेड टेस्ट में भारत की हालत ख़राब है और जानकारों का मानना है कि अब इस मैच में स्पिनर अहम भूमिका निभा सकते हैं. ऐसे में भारत को हरभजन सिंह की कमी खल सकती है जो चोट की वजह से बाहर हैं. विश्लेषक कह रहे हैं कि हरभजन को चोट लगी थी महीनों पहले वर्ल्ड कप के दौरान लेकिन ऑपरेशन के बजाय उन्होंने फ़िज़ियोथेरेपी को चुना. इसी वजह से उनकी चोट पूरी तरह ठीक नहीं हो पाई और उन्होंने दर्द के बावजूद खेलना जारी रखा.
इसका ख़ामियाज़ा अब टीम को भुगतना पड़ रहा है. लेकिन बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में हरभजन ने इस आरोप को ग़लत बताया और करारा जवाब दिया. उन्होंने कहा," ये मेरा हाथ है और मेरे करियर का सवाल है. इसलिए मैंने वही किया जो मुझे अपने लिए ठीक लगा." 'लोगों का काम है कहना' उनका कहना था,"लोग तो आरोप लगाएँगे ही क्योंकि उन्हें मसाला जो चाहिए." "मैंने यूँ ही ऑपरेशन नहीं करवाना चाहता था. उस समय इलाज के और भी विकल्प सामने थे. इसलिए मैंने पहले फ़िज़ियोथेरेपी कराने की सोची और ऑपरेशन को आख़िरी विकल्प के तौर पर रखा."
ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पहले टेस्ट में हरभजन पूरी तरह नाक़ाम रहे थे और उन्होंने 169 रन दे कर सिर्फ़ एक विकेट लिया था. इसके बाद उन्होंने उँगली में चोट की वजह से टीम से नाम वापस ले लिया. अपने इस फ़ैसले का बचाव करते हुए हरभजन कहते हैं," मैंने टीम से नाम वापस इसलिए लिया क्योंकि मैं अपनी टीम और देश को नीचा नहीं दिखाना चाहता था." "पहले टेस्ट के दौरान ही मेरी उँगली में दर्द दोबारा उठा जिससे मेरे प्रदर्शन पर असर पडा. इसलिए मैंने आगे खेलने से पहले डॉक्टरों को दिखा लेना उचित समझा. " हरभजन का कहना था कि अगर डॉक्टर किसी तरह उनके दर्द का इलाज कर पाते हैं तो वो इस सिरीज़ में वापसी भी आ सकते हैं. दूसरे टेस्ट में हरभजन की जगह अनिल कुंबले को मौक़ा दिया गया है. वैसे मुरली कार्तिक को ऑस्ट्रेलिया बुला लिया गया है, लेकिन दूसरे टेस्ट के लिए उन्हें टीम में नहीं चुना गया. |
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