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बोर्ड ने अदालत के फ़ैसले को चुनौती दी
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने महाराष्ट्र के क्रिकेटर अभिजीत काले का निलंबन वापस लिए जाने के अदालत के फ़ैसले को चुनौती दी है. पुणे की एक अदालत ने शुक्रवार को काले का निलंबन वापस लेने का आदेश देते हुए कहा था कि जाँच के बिना उन्हें निलंबित नहीं किया जा सकता. चयनकर्ताओं किरण मोरे और प्रणव रॉय ने आरोप लगाया था कि अभिजीत काले ने भारतीय टीम में शामिल करने के लिए उन्हें रिश्वत देने की पेशकश की थी. जिसके बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने अभिजीत काले को निलंबित करते हुए डीवी सुब्बाराव की अध्यक्षता में एक जाँच समिति गठित की थी. शनिवार को अभिजीत काले, किरण मोरे और प्रणव रॉय इस मामले की जाँच कर रहे डीवी सुब्बाराव के सामने विशाखापट्टनम में पेश हुए. आदेश समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सुब्बाराव ने एक अन्य चयनकर्ता संजय जगदाले को जाँच समिति के सामने पेश होने के आदेश दिया है.
विशाखापट्टनम में पत्रकारों से बात करते हुए सुब्बाराव ने कहा, "दोनों चयनकर्ताओं ने समिति को बताया है कि उन्होंने संजय जगदाले से रिश्वत की पेशकश के बारे में बात की थी. इसलिए मैंने संजय जगदाले को समिति के सामने पेश होने को कहा है." शुक्रवार को पुणे की अदालत से राहत मिलने के बाद अभिजीत काले शनिवार को विशाखापट्टनम पहुँचे, लेकिन उन्होंने पत्रकारों से कोई बात नहीं थी. लेकिन पुणे की अदालत के निलंबन वापस लेने के आदेश के बाद उन्होंने मुंबई में कहा था कि वे बोर्ड की जाँच में पूरा सहयोग करेंगे और उड़ीसा के ख़िलाफ़ रणजी ट्रॉफी का मैच खेलने के लिए भी तैयार हैं. |
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