
सचिन का प्रदर्शन न्यूज़ीलैंड के खिलाफ दोनों टेस्ट मैचों में खराब रहा है
बंगलौर टेस्ट की दूसरी पारी में भी सचिन तेंदुलकर क्लीन बोल्ड हो गए. ये लगातार तीसरी बार है जब सचिन बोल्ड आउट हुए हैं.
न्यूज़ीलैंड के खिलाफ पहली पारी में सचिन के बोल्ड होने के बाद सुनिल गावस्कर ने सचिन के फुटवर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन पर उम्र का असर होने लगा हैं और उसके बाद एक लंबी बहस शुरु हो गई कि गावस्कर की आलोचना जायज़ है या नहीं.
जब हमने यही सवाल वरिष्ठ पत्रकार अयाज़ मेमन से पूछा तो उन्होंने कहा, जब एक महान खिलाड़ी इस तरह से असफल होते हैं तो आलोचना तो होगी ही. सचिन तेंदुलकर की ये पहली श्रंखला नहीं हैं जहां वो कुछ धीमें दिखाई दिए हैं.
'धीमापन नहीं, लय से बाहर'
मेमन कहते हैं कि उनके नज़रिए से सचिन उन्हें धीमें से ज्यादा लय से बाहर नज़र आए.
अयाज़ कहते हैं, सचिन तेंदुलकर ने फर्स्ट क्लास मुकाबले नहीं खेलें हैं, एकदिवसीय मुकाबले नहीं खेलें हैं और वो आउट ऑफ टच नज़र आ रहे हैं और लय में ना होना साफ नज़र आ रहा है लेकिन उम्र के हिसाब से जो धीमापन आता हैं ये वो नहीं है.
"देखिए उम्र के साथ धीमापन आता हैं. उम्र बढती है तो आप जल्दी से गेंद को देख नहीं पाते, जज नहीं कर पाते. लेकिन मैं ये अभी भी दावे के साथ नहीं कह सकता कि ये सचिन के खेल में ये धीमापन उम्र की वजह से है. ये कहना मेरे लिए मुश्किल है"
अयाज़ मेमन
तो क्या सचिन के फुटवर्क या किसी कमी को सीधे तौर पर उम्र के साथ जोड़ना ठीक है, वो कहते हैं, देखिए उम्र के साथ धीमापन आता हैं. उम्र बढती है तो आप जल्दी से गेंद को देख नहीं पाते, जज नहीं कर पाते. लेकिन मैं ये अभी भी दावे के साथ नहीं कह सकता कि ये सचिन के खेल में ये धीमापन उम्र की वजह से है. ये कहना मेरे लिए मुश्किल है.
बहस इस बात पर भी हो रही है कि सुनिल गावस्कर कैसे सचिन की आलोचना कर सकते हैं. सवाल उठता हैं कि क्या सचिन का कद इतना बड़ा हैं कि उन्हें आलोचना से परे होना चाहिए.
अयाज़ मेमन कहते हैं, अगर खिलाड़ी अच्छा ना खेले तो आलोचना तो होगी ही. चाहे वो सचिन हों या फिर कोई ओर.लेकिन भारत में ये होता हैं कि सचिन जैसे खिलाड़ी से ग़लती हो तो लोग मानने के लिए तैयार ही नहीं होते की वो भी ग़लत हो सकते हैं. ये ग़लत हैं. सचिन भी ये मानेंगे की आलोचना अच्छी चीज़ है.
फेसबुक पर भी बहस
बीबीसी हिंदी के फेसबुक पन्ने पर भी सचिन को लेकर बहस छिड़ी हुई है.
जहां दीपक सिंह कहते हैं कि सचिन के बारे में जो बेतुकी बाते करते हैं उन्हें शर्म आनी चाहिए. दीपक तो यहां तक कहते हैं कि उम्र गावस्कर पर हावी हो रही है.
वहीं मुकुंद सिंह ये मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि सचिन पर उम्र का असर होने लगा है. वो कहते हैं कि खेल में हर दिन एक जैसा नहीं होता और उतार चढ़ाव चलते रहते हैं. वो कहते हैं कि जब सचिन आगे के मुकाबलों में शतक लगाएंगे तो फिर कहा जाएगा की ओल्ड इज़ गोल्ड.
विमल शर्मा कहते हैं, जब से सचिन ने खेलना शुरु किया हैं तब से क्या वो कभी बोल्ड ही नहीं हुए हैं. बोल्ड होना खेल का हिस्सा है. सच्चे खिलाड़ी का हौसला माईने रखता है ना कि उम्र.
राजीव रंजन कहते हैं कि सचिन सांसद हो गए हैं और उन्हें खेल का मैदान भी संसद नज़र आता है. थोड़ी देर के लिए आना और फिर संसद स्थगित करके वापस चले जाना.








