अवनि लेखरा: टोक्यो पैरालंपिक में गोल्ड जीतने की कहानी

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टोक्यो पैरालंपिक्स में भारत की शूटर अवनि लेखरा ने असाका शूटिंग रेंज में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफ़ल स्टैंडिंग एस1 स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर सोमवार को इतिहास रच दिया.
19 साल की अवनि पैरालंपिक खेलों में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं.
उनकी इस जीत पर पैरालंपिक कमिटी ऑफ़ इंडिया की अध्यक्ष दीपा मलिक ने उन्हें बधाई दी है.
उन्होंने कहा है कि वो अवनि लेखरा को भारत को पहला पैरा शूटिंग मेडल दिलाने के लिए बधाई देती हैं.
अवनि ने संयम बरक़रार रखते हुए 249.6 पॉइंट के साथ विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की और ये मेडल जीता है.

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अंतिम मुकाबले में अच्छी रफ़्तार
चीन की कुइपिंग झांग ने 248.9 पॉइंट हासिल करके रजत पदक जीता और यूक्रेन की इरियाना शेकेत्निक ने कांस्य पदक जीता है.
अवनि लेखरा ने अंतिम मुकाबले में अच्छी रफ़्तार के साथ शुरुआत की. उन्होंने लगातार 10 पॉइंट्स के साथ अपना बढ़िया प्रदर्शन बनाए रखा.
प्रतिस्पर्धा के पहले चरण में केवल दो मौके ऐसे आए जब उन्हें 10 पॉइंट से कम हासिल हुए. इस वजह से वो पहले चरण में दूसरे स्थान पर रहीं.
नॉक आउट राउंड में अवनि अव्वल रहीं और उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों पर अच्छी बढ़त बनाए रखी. आखिर में 249.6 पॉइंट्स के साथ उन्होंने अपना गेम ख़त्म किया.
इससे पहले क्वॉलीफ़िकेशन राउंड में 621.7 पॉइंट के स्कोर के साथ अवनि 7वें स्थान पर रही थीं.
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कौन हैं अवनि
मूलतः जयपुर शहर की रहने वाली अवनि ने क़ानून की पढ़ाई की है. साल 2012 में एक कार दुर्घटना के बाद से वे स्पाइनल कॉर्ड (रीढ़ की हड्डी) से जुड़ी तकलीफ़ का सामना कर रही हैं.
इसके बाद वो व्हीलचेयर के सहारे ही चल पाती थीं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और शूटिंग में अपनी किस्मत आज़माई जहां उन्होंने लगातार सफलताएं हासिल कीं.
उनकी जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए उन्हें बधाई दी है.
उन्होंने लिखा, "कड़ी मेहनत से स्वर्ण पदक जीतने के लिए बधाई. यह आपके मेहनती स्वभाव और शूटिंग के प्रति जुनून के कारण संभव हुआ है. यह वास्तव में भारतीय खेलों के लिए एक विशेष क्षण है. भविष्य के लिए आपको बहुत शुभकामनाएं."
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साल 2015 में जयपुर शहर में ही शूटिंग से उनकी नज़दीकी शुरू हुई और जगतपुरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में उन्होंने प्रैक्टिस शुरू कर दी.
अवनि के पिता ये चाहते थे कि वो खेलों में दिलचस्पी लें. शुरू में अवनि ने शूटिंग और तीरंदाज़ी दोनों में ही हाथ आज़माया. उन्हें शूटिंग में ज़्यादा दिलचस्पी महसूस हुई. अभिनव बिंद्रा की किताब से उन्हें काफी प्रेरणा मिली और वो आगे बढ़ती गईं.
टोक्यो पैरालंपिक गेम्स में गोल्ड जीतना उनकी तमन्ना थी जो अब पूरी हो गई है.

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साल 2020 में कोरोना महामारी को लेकर उन्होंने कहा था कि इस वजह से न केवल उनकी शूटिंग की ट्रेनिंग प्रभावित हुई थी बल्कि फिज़ियोथेरेपी के रूटीन सेशन पर कोरोना का असर पड़ा था.
उन्होंने कहा था, "स्पाइनल कॉर्ड की तकलीफ़ के कारण मैं कमर से नीचे के हिस्से में कुछ महसूस नहीं कर सकती हूं. लेकिन फिर भी मुझे हर दिन अपने पैर की कसरत करनी पड़ती है."
"मेरी एक फ़िजियोथेरेपिस्ट हुआ करती थीं जो हर रोज़ घर आकर मेरे पैर की एक्सरसाइज़ कराती थीं. मेरी फ़िजियोथेरेपिस्ट को जयपुर शहर पार करके मेरे पास आना होता था."
"उनके बाद मेरे अभिभावकों ने मेरी मदद की और वे जो कर सकते थे, उन्होंने किया. शूटिंग की ट्रेनिंग मैं घर पर नहीं कर सकती थी. मैंने बिना गोलियों की प्रैक्टिस शुरू की."
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