You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर: क्यों अहम है ये अवॉर्ड?
- Author, वंदना
- पदनाम, टीवी एडिटर, भारतीय भाषाएं
पिछले साल कोरोना लॉकडाउन के दौरान जब दुनिया और भारत की रफ़्तार लगभग थम सी गई थी, उसी दौरान भारतीय तलवारबाज़ भवानी देवी का एक वीडियो वायरल हुआ था.
वीडियो में भवानी देवी लॉकडाउन में घर की छत पर तलवारबाज़ी की प्रेक्टिस कर रही थी. खिलाड़ियों की ट्रेनिंग उस वक़्त बंद पड़ी थी, तलवारबाज़ी के लिए सामने असल पार्टनर नहीं था तो भवानी ईंटों और अपने किट बैग की मदद से नकली पार्टनर बनाकर ट्रेनिंग करती रहीं.
26 साल की भवानी देवी किसी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में गोल्ड पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं और फिलहाल टोक्यो ओलंपिक की तैयारी में जुटी हैं.
इसी तरह जब मैं युवा पहलवान दिव्या काकरान से मिलने गईं तो वो वीडियो कॉल के ज़रिए जॉर्जिया में अपने कोच से ट्रेनिंग ली रही थीं. कोरोना के कारण कोच भारत नहीं आ सकते थे.
कोरोना जैसे मुश्किल समय में भी भारतीय महिला खिलाड़ियों के हिम्मत और हौसले की ये छोटी सी मिसाल है. भले ही कुछ महीनों तक खेल प्रतियोगिताएँ नहीं हो पाईं लेकिन इसके बावजूद कई महिला खिलाड़ियों ने इस दौरान बेहतरीन प्रदर्शन किया है.
इसी पृष्ठभूमि में बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमेन ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड का दूसरा सीज़न आज से लॉन्च हो रहा है.
अपनी पसंदीदा भारतीय महिला खिलाड़ी को चुनने के लिए लोग बीबीसी हिंदी समेत छह भारतीय भाषाओं की वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आज से ऑनलाइन वोट डाल सकेंगे.
मकसद है भारतीय महिला खिलाड़ियों और उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करना, महिला खिलाड़ियों की चुनौतियों पर चर्चा करना और उनकी सुनी-अनसुनी कहानियों को दुनिया के सामने लेकर आना.
भारतीय महिला खिलाड़ियों का उदय
अभी सबकी निगाहें टोक्यो ओलंपिक पर हैं लेकिन अगर पिछले रियो ओलंपिक की बात करें तो भारत को जो दो मेडल मिले थे वो दोनों महिला खिलाड़ियों ने ही दिलवाए थे- पहलवानी में साक्षी मलिक और बैडमिंडन में पीवी सिंधु.
साल 2020 कोरोना के साए में बीत गया लेकिन 2020 में एक ख़ास वर्षगाँठ भी थी. 20 साल पहले यानी वर्ष 2000 में एक भारतीय महिला खिलाड़ी ने पहली बार कोई ओलंपिक मेडल जीत इतिहास रचा था.
वेटलिफ़्टर करनम मलेश्वरी ने सिडनी ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था. 19 सितंबर 2000, वो तारीख़ आज भी ज़हन में ताज़ा है. उसके बाद से तो साइना नेहवाल, मेरी कॉम समेत कई भारतीय महिला ओलंपिक पदक जीत चुकी हैं.
कैसे तय होगा विजेता का नाम?
अगर बात करें बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमेन ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड की, तो इसके तहत एक ज्यूरी ने मिलकर भारतीय महिला खिलाड़ियों की एक सूची तैयार की है. इस ज्यूरी में भारत के कई राज्यों के खेल पत्रकार और जानकार शामिल हैं.
जिन पाँच खिलाड़ियों को ज्यूरी की तरफ़ से सबसे ज़्यादा वोट मिले हैं, उनमें से कोई एक बनेगी बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमेन ऑफ़ द ईयर जिसे ऑनलाइन वोटिंग के ज़रिए लोग वोट कर सकते हैं. बीबीसी की छह भारतीय वेबसाइटों और सोशल मीडिया हैंडल पर ये वोटिंग लिंक उपल्बध होगा.
ज्यूरी बीबीसी इमरजिंग इंडियन स्पोर्ट्सवुमेन ऑफ़ द ईयर को भी चुनेगी और बीबीसी की ओर से लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी दिया जाएगा.
पहला बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमेन ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड पिछले साल पीवी सिंधु को दिया गया था जबकि पीटी ऊषा को लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था.
अगर वापस महिला खिलाड़ियों की बात करें तो आपको शायद ऑस्ट्रेलिया में पिछले साल हुआ महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप फ़ाइनल याद होगा जो भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया था.
दुनिया भर में किसी भी महिला खेल प्रतियोगिता को देखने आए लोगों की संख्या के हिसाब से मैच दूसरे नंबर पर रहा.
यानी लोग महिलाओं से जुड़ी प्रतियोगिताएँ लोग देख भी रहे हैं और महिलाएँ मेडल भी जीत रही हैं लेकिन फिर भी इंटरनेट की दुनिया पर महिला खिलाड़ियों की मौजदूगी पुरुषों को हिसाब से कम है.
बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमेन ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड के तहत बीबीसी 18 फ़रवरी को एक स्पोर्ट्स हैकेथॉन भी आयोजित कर रहा है. इसके तहत भारत के 12 कॉलेजों के छात्र 50 भारतीय महिला खिलाड़ियों की एंट्री विकीपीडिया पर नए सिरे से बनाएँगे या पहले से बनी एंट्री को और बेहतकर करेंगे.
मकसद यही है कि इंटरनेट पर महिला खिलाड़ियों की मौजूदगी को और मज़बूत करना.
बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमेन ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड आठ मार्च 2021 को वर्चुअल समारोह के ज़रिए दिए जाएँगे.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)