टोक्यो 2020: ओलंपिक को एक साल टालने में इतनी देर क्यों हुई

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कोरोना वायरस के कारण पैदा हुए हालात के चलते जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे 2020 टोक्यो ओलंपिक को एक साल के लिए टालने को तैयार हो गए हैं.

आबे ने कहा है कि इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) के अध्यक्ष थॉमस बाक से चर्चा के बाद इसे लेकर सहमति बन गई है.

बीबीसी स्पोर्ट्स के एडिटर डैन रोआन का कहना है कि इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी का एग्ज़िक्यूटिव बोर्ड आज ही इस फ़ैसले को मंज़ूरी देगा.

जिस तरह से कोरोना का असर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा था, उससे ओलंपिक भी अछूता नहीं दिख रहा था. यह तकरीबन निश्चित दिखाई दे रहा था कि टोक्यो 2020 को आगे बढ़ा दिया जाएगा.

फिर भी, दुनिया में जब अन्य कई बड़े स्पोर्ट्स इवेंट टाले या रद्द कर दिए गए, तब ओलंपिक खेलों को टालने में इतनी देर क्यों लग गई?

आईओसी ने पहले ख़ुद को चार और हफ्तों का वक्त दिया था ताकि ओलंपिक को टालने संबंधी फैसला लिया जा सके. दुनिया के कई एथलीटों ने इसके लिए आईओसी की आलोचना भी की थी.

अब, चूंकि खेलों को टालने का फ़ैसला ले लिया गया है, ऐसे में इस प्रश्न पर भी बात हो रही है कि इसके परिणाम क्या होंगे?

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टालने में देर क्यों

पूरी दुनिया की कई नेशनल ओलंपिक कमेटियां (एनओसी) पहले ही इस आयोजन को टालने का अनुरोध कर चुकी थीं.

कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने तो कहा था कि अगर ओलंपिक को इस साल कराया जाता है तो वे अपने एथलीटों को इसमें नहीं भेजेंगे.

इस बारे में उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना था कि आईओसी और टोक्यो 2020 के ऑर्गनाइज़र्स चाह रहे थे कि गेम को टालने की पहल उनकी ओर से न हो.

ऐसा इसलिए, क्योंकि ओलंपिक को टालने का फ़ैसला लेने के कमर्शियल और कानूनी दुष्परिणाम होंगे और कोई भी इसकी ज़िम्मेदारी नहीं लेना चाहता था.

कनाडा

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इमेज कैप्शन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया का कहना था कि वे अपने खिलाड़ियों को नहीं भेजेंगे

बड़े स्पोर्ट्स लॉयर जॉन मेहरज़ाद क्यूसी का कहना था कि अगर कोई यह फ़ैसला एकतरफ़ा ले लेता तो वह होस्ट-सिटी कॉन्ट्रैक्ट को तोड़ने के संभावित आरोपों के दायरे में आ सकता था.

उन्होंने कहा, 'यह कॉन्ट्रैक्ट कहता है कि जो पार्टी (पक्ष) दूसरे पक्ष के साथ आपसी सहमति के बगैर इस एग्रीमेंट को कैंसिल या पोस्टपोन करेगी, वह कॉन्ट्रैक्ट को तोड़ने का आरोप झेलेगी और खुद को भारी (अरबों डॉलर) के डैमेज (मुआवजों) दावों के दायरे में ले आएगी.'

यह स्थिति इसलिए भी बनी रही क्योंकि मौजूदा वक्त में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का ऐसा कोई आदेश नहीं आया है जिसमें कहा गया हो कि ओलंपिक को नहीं कराया जा सकता.

आईओसी के पास सेफ्टी आधार पर खेलों को कैंसल करने का अधिकार है और मेज़बान शहर ऐसे किसी निर्णय पर कोई डैमेज क्लेम नहीं कर सकता.

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अभूतपूर्व और बेहद बड़ा क़दम

टोक्यो ओलंपिक को टालना एक अभूतपूर्व और बड़ा क़दम है. आज तक कोई भी ओलंपिक रीशेड्यूल नहीं किया गया. युद्ध के दौरान केवल इन गेम्स को कैंसि किया गया है.

आईओसी और टोक्यो 2020 ऑर्गनाइजर्स दोनों का कहना था कि 10.8 अरब पौंड या 12.6 अरब डॉलर या 1.35 लाख करोड़ येन के बजट वाले इन गेम्स को टाले जाने के साथ बहुत बड़ी चुनौतियां जुड़ी हुई हैं.

एक बयान में टोक्यो 2020 ने कहा था, 'चूंकि हम इस असाधारण परिस्थिति से निबट रहे हैं, ऐसे में हमारे लिए टोक्यो मेट्रोपोलिटन गवर्नमेंट, जापान सरकार, टोक्यो 2020 मार्केटिंग पार्टनर्स, ब्रॉडकास्टर्स, सप्लायर्स और कॉन्ट्रैक्टर्स जैसे कई पार्टनर्स के साथ नजदीकी सहयोग जरूरी हो गया है.'

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दूसरी ओर, आईओसी ने कहा था कि होटलों में 'लाखों रातें' पहले ही बुक हो चुकी हैं जो कि गेम्स को टाले जाने की स्थिति में फिर से उपलब्ध नहीं होंगी.

लेकिन अब चूंकि गेम्स को टालने का फ़ैसला हो चुका है, इसलिए सवाल यह है कि एथलीट विलेज और बाकी जगहें क्या अगले साल के लिए ख़ाली रहेंगी?

साथ ही आईओसी को अब अपने बड़े खज़ाने को हाथ लगाना होगा ताकि वह अपने ऊपर निर्भर कई अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट फेडरेशंस की आर्थिक मदद कर सके.

हर ओलंपिक साइकिल में आईओसी 5 अरब पाउंड की रकम जुटाती है. कुछ फ़ेडरेंशंस ने बीमा करवाया है लेकिन बाक़ियों के सामने मुश्किल हालात पैदा हो सकते हैं.

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व्यावहारिक दिक्कत

हर खेल का अपना एक कैलेंडर होता है. साथ ही कोरोना वायरस की महामारी कब खत्म होगी इसको लेकर भी चीजें अभी साफ नहीं हैं.

कोरोना के कारण अन्य कई बड़े स्पोर्ट्स इवेंट टालने या रद्द करने पड़े हैं. अब टोक्यो गेम्स टलने के कारण कई अरब पाउंड के करार और दूसरी आर्थिक गतिविधियां लटक जाएंगी.

इससे यह समझना मुश्किल नहीं है कि क्यों इस आयोजन से जुड़े लोगों के लिए इसे टालने का फैसला लेना मुश्किल हो रहा था.

हर पार्टी फैसला लेने के लिए दूसरे का इंतजार कर रही थी. साथ ही वे इस बात के भी प्रयास कर रहे थे कि किस तरह से सेफ्टी के साथ और कम से कम वित्तीय नुकसान के साथ इससे निबटा जा सकता है.

मगर आख़िर में जापान के प्रधानमंत्री ने कह दिया कि उनकी आईओसी के अध्यक्ष से मंगलवार को हुई चर्चाओं के बाद मिलकर खेलों को एक साल के लिए टालने पर सहमति बनाई है.

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