पैसों की कमी से टेनिस खेलना बंद कर चुके सुमित नागल कैसे पहुंचे यूएस ओपन

    • Author, सूर्यांशी पांडेय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

''कोर्ट पर जाते ही मैं बहुत बेचैन था. लेकिन स्टेडियम में बैठे भारतीय फ़ैन्स ने मेरा बहुत हौसला बढ़ाया. इतने लोग कभी मुझे प्रोत्साहित करने स्टेडियम में नहीं आए. दुनिया के सबसे बड़े टेनिस स्टेडियम, आर्थर स्टेडियम में मेरा मैच वो भी रोजर फ़ेडरर के ख़िलाफ़, इससे अच्छा ग्रैंड स्लैम डेब्यू नहीं हो सकता था.''

बीबीसी हिंदी से ख़ास बातचीत करते हुए सुमित नागल की आवाज़ में जिस तरह का जोश था मुझे सुनकर ऐसा लगा मानो वो हार कर भी जीत का स्वाद चख रहे हैं.

यहां जीत के मायने सिर्फ़ ग्रैंड स्लैम में डेब्यू करना नहीं है बल्कि पहले दौर का मुक़ाबला रोजर फ़ेडरर के साथ होना किसी ट्रॉफ़ी हासिल से करने से कम नहीं रहा.

लेकिन हरियाणा के झज्जर ज़िले के रहने वाले सुमित नागल न्यूयॉर्क के आर्थर स्टेडियम तक कैसे पहुंचे और अब आगे क्या इरादा है, उन्होंने इस ख़ास बातचीत में बीबीसी से साझा किया:

रोजर फ़ेडरर के ख़िलाफ़ जब आपने पहला सेट जीता तो क्या अनुभव रहा?

सबसे पहले तो मैं उनके सामने खेलते हुए नर्वस था लेकिन दिमाग़ में यह था कि इस खेल का बस आनंद लेना है और फ़ोकस सिर्फ़ अपने खेल की रणनीति पर रखना है. मैं पहले सेट में सर्विस अच्छी दे रहा था, रोजर फ़ेडरर को ज़्यादा मौके नहीं दे रहा था. जब पहला सेट जीता तो मनोबल बहुत बढ़ गया. स्टेडियम में बैठे भारतीय फ़ैन्स ने भी बहुत प्रोत्साहन दिया. रोजर फ़ेडरर बेहतरीन खिलाड़ी हैं. पहली बार इतने बड़े स्टेडियम में खेलने का मौक़ा मिला वो भी उनके ख़िलाफ़.

रोजर फ़ेडरर के खेल की कौन सी तक़नीक आपको बेहद पसंद आई और उनके साथ खेलने के बाद अपने खेल में क्या कमी लगी?

रोजर फ़ेडरर टेनिस के भगवान हैं. उनकी सर्विस कमाल की है. मुझे उनके साथ खेलकर यह समझ आया कि वो विरोधी खिलाड़ी पर दबाव डालते हैं, उसे थकाने में विश्वास रखते हैं, फुर्तीला खेलते हैं. पहले सेट के बाद उन्होंने अपने खेल की रणनीति ही बदल दी थी.

उनके साथ खेलकर मुझे समझ आया कि मुझे अपनी सर्विस पर काम करना होगा और नेट प्रैक्टिस की ज़रूरत है.

क्वालिफ़ायर्स के दौरान किस खिलाड़ी के साथ खेलना ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहा?

मैं अपने क्वालिफ़ायर के पहले मुक़ाबले को लेकर परेशान था. मेरा मुक़ाबला जापान के खिलाड़ी तत्सुमा इटो से था जिससे मैं पहले हार चुका था. जब वो मुक़ाबला जीता तो आगे की राह उतनी मुश्किल नहीं लगी.

यहां तक पहुंचने में किसका सबसे बड़ा योगदान रहा?

माता-पिता के अलावा अगर किसी का मैं हमेशा शुक्र-गुज़ार रहूंगा तो वह हैं महेश भूपति.

2007 में दिल्ली में महेश भूपति की अकेडमी में एडमिशन के लिए बहुत-से बच्चे आए थे. लेकिन तब चुने गए कुछ बच्चों में से में भी था. फिर मैं उनके साथ बेंगलुरू गया. अकेडमी में एक प्रोग्राम के तहत मैंने दो साल ट्रेनिंग ली लेकिन फिर वो अचानक ख़त्म हो गया. 2009 में जब मैं दिल्ली वापस आया तो महसूस हुआ कि इस खेल में बहुत पैसों की ज़रूरत है, शायद आगे जाना मुमकिन ना हो तो मैंने टेनिस खेलना बंद कर दिया.

लेकिन दो या तीन महीने बाद महेश भूपति सर का फ़ोन आया और उन्होंने कहा कि तुम बेंगलुरू वापस आओ, मैं तुम्हें ट्रेन करूंगा. उसके बाद मैं ट्रेनिंग के लिए कनाडा गया और फिर जर्मनी. इस दौरान, यात्रा से लेकर रहने-खाने का जो भी ख़र्च था वो महेश भूपति सर ने उठाया. अगर वो ना होते तो शायद मैं यहां तक ना पहुंच पाता.

क्या विराट कोहली भी आपको फंड करते हैं?

हां, उनकी विराट कोहली फॉउंडेशन मुझे दो साल से फंड कर रही है. जब मैं जूनियर्स में था तो मैं ज़्यादा मुकाबले नहीं खेल पाया था क्योंकि इतने फंड नहीं थे. लेकिन मेरे खेल को जबसे स्पॉन्सर किया जा रहा है तो मैं ज़्यादा से ज़्यादा टूर्नामेंट्स खेल पा रहा हूं. एक बात ज़रूर कहना चाहूंगा कि इस खेल में पैसे ज़रूरी है लेकिन अगर आपको सनक है तो कुछ भी मुमकिन है.

टेनिस से आपकी दोस्ती कब शुरू हुई ?

मेरे पिता पेशे से टीचर हैं (सुरेश नागल) और मां (कृष्णा देवी) हॉउसवाइफ़ हैं. जब हम लोग हरियाणा से दिल्ली आए थे तब मैंने अपने घर के पास डीडीए अकेडमी के टेनिस ग्राउंड में खेलना शुरू किया. उस वक्त मैं साढ़े सात साल का था.

लेकिन शुरू में, मैं क्रिकेटर बनना चाहता था, फिर पिता जी ने मुझे टेनिस की ओर भेजा. टेनिस में मुझे मज़ा आने लगा, फिर मैं इस रास्ते पर ही चल पड़ा.

आप अपने घर में किसके सबसे क़रीब हैं?

मेरे घर में माता-पिता और एक बहन हैं जिसकी शादी हो गई है. मैं सबसे ज़्यादा अपनी मां के क़रीब हूं. जितना उन्होंने मेरे लिए किया मुझे नहीं लगता कि कोई और कर सकता था. हर सुबह टेनिस कोर्ट पर जाने से पहले मेरे लिए नाश्ता बनाना. मुझे सुबह 6 बजे पहुंचना होता था, वो मुझसे भी जल्दी उठकर सब तैयार करती थीं. आज भी वो मेरा सबसे ज़्यादा ध्यान रखती हैं.

आपका सबसे पसंदीदा खिलाड़ी कौन है?

टेनिस में मेरे सबसे पसंदीदा खिलाड़ी राफ़ेल नडाल है. मुझे उनका कोर्ट पर खेलने का अंदाज़ बहुत पसंद हैं. क्रिकेट में मुझे विराट कोहली पसंद है. मैं गुस्सैल हूं इसलिए मुझे आक्रामक खिलाड़ी बहुत पसंद आते हैं.

कोई पसंदीदा बॉलीवुड कलाकार?

दीपिका पादुकोण

अब आगे की रणनीति क्या है?

मैं यहीं पर रुकने वाला नहीं हूं, इस हार को अब जीत में बदलने की तैयारी होगी. मैं अपने ऊपर अब और मेहनत करूंगा. यहां से मेरी शुरुआत हुई है.

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