वर्ल्ड कप 2019: धोनी के दस्तानों पर आईसीसी ने जताया ऐतराज़

महेंद्र सिंह धोनी

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क्रिकेट विश्व कप के पहले मैच में भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज़ महेंद्र सिंह धोनी के दस्ताने ख़ासे चर्चित रहे. इन दस्तानों पर इंडियन पैरा स्पेशल फ़ोर्सेज़ का प्रतीक चिह्न 'रेजिमेंटल डैगर' बना था.

भारत में उनके प्रशंसकों ने इसे धोनी का सेना प्रेम बताया था और इसके लिए उनकी सराहना की थी.

लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) चाहता है कि धोनी दोबारा ये दस्ताने न पहनें. आईसीसी ने गुरुवार को इस संबंध में बीसीसीआई से निवेदन किया है कि वह धोनी के दस्तानों से वह निशान हटवा दे.

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पहले उल्लंघन पर सज़ा नहीं

आईसीसी की जनरल मैनेजर, स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस क्लेयर फरलॉन्ग ने पीटीआई से इसकी पुष्टि की. उन्होंने कहा, "यह नियमों के ख़िलाफ़ है और हमने इसे हटाने का अनुरोध किया है."

जब उनसे पूछा गया कि क्या इस नियम के उल्लंघन पर कोई सज़ा भी हो सकती है, क्लेयर ने कहा, "पहले उल्लंघन के लिए, नहीं. सिर्फ उसे हटाने का निवेदन किया गया है."

भारत का अगला मैच 9 जून, रविवार को ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ है.

पहले मैच में धोनी के हरे दस्तानों पर जब बलिदान का यह प्रतीक दिखा और प्रशंसकों ने जब इसे पहचाना तो देश और सुरक्षाबलों के प्रति धोनी के प्रेम और प्रतिबद्धता की तारीफ़ होने लगी.

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महेंद्र सिंह धोनी

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महेंद्र सिंह धोनी को साल 2011 में पैराशूट रेजिमेंट में लेफ़्टिनेंट कर्नल का मानद रैंक दिया गया है. साल 2015 में उन्होंने पैरा ब्रिगेड के तहत ट्रेनिंग भी की थी.

इस निशान की चर्चा हुई तो सोशल मीडिया पर भारतीय टीम के पूर्व कप्तान के बारे में लिखना शुरू कर दिया.

जगदीश डांगी ने लिखा, ''महेंद्र सिंह धोनी को सलाम और उनका सम्मान, जिन्होंने अपने विकेटकीपिंग ग्लव्स पर बलिदान का इनसिग्निया प्रिंट कराया है. ये रेजिमेंटल डैगर इनसिग्निया पैरा एसएफ़, पैराशूट रेजिमेंट से जुड़ी हुई भारतीय सेना की स्पेशल ऑपरेशंस यूनिट की नुमाइंदगी करता है.''

महेंद्र सिंह धोनी

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विवेक सिंह ने लिखा है, ''अगर आपने धोनी के विकेटकीपिंग ग्लव्स को गौर से देखा है तो इन पर पैरा लोगो बना है. ये स्वैग का लीजेंडरी लेवल है.''

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राम ने ट्वीट किया है, ''इस वजह से दुनिया महेंद्र सिंह धोनी से मोहब्बत करती है. मिलिट्री पैरा एसएफ़ के प्रति प्यार और समर्थन जताने के लिए आपका धन्यवाद. गोले में आपको रेजिमेंटल डैगर इनसिग्निया दिख रहा है, जो भारतीय पैरा स्पेशल फ़ोर्सेज़ का है.''

भारतीय सेना की पैराशूट यूनिट, दुनिया की सबसे पुरानी एयरबोर्न यूनिट में से एक हैं. 50वीं भारतीय पैराशूट ब्रिगेड का गठन 27 अक्टूबर, 1941 में हुआ था. ये ब्रिटिश 151वीं पैराशूट बटालियन, ब्रिटिश इंडियन आर्मी 152वीं भारतीय पैराशूट बटालियन और 153वीं गोरखा पैराशूट बटालियन से मिलकर बनी थी.

साल 1952 में पैराशूट रेजिमेंट का गठन इनसे और दूसरी कई इकाइयों से मिलकर किया गया था.

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पैराशूट रेजिमेंट में फिलहाल नौ स्पेशल फ़ोर्सेज़, पांच एयरबोर्न, दो टेरीटोरियल आर्मी और एक काउंटर इंसरजेंसी (राष्ट्रीय राइफ़ल्स) बटालियन है.

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