वर्ल्ड कप: जब जडेजा की वजह से टूटा दिल बुमराह ने जोड़ा- क्रिकेट डायरी

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- Author, सिवाकुमार उलागनाथन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, साउथेम्प्टन से
हज़ारों लोगों की भीड़ का शोर. जहां तक नज़रें दौड़ाएं तो सिर्फ़ क्रिकेट फैंस ही फैंस नज़र आ रहे हैं. नज़र ऊपर करें तो कुछ बादल छाए हुए दिखते हैं.
लेकिन ये बादल इतने नहीं हैं कि बारिश लाकर मैच का मज़ा किरकिरा कर दें.
साउथेम्प्टन के इस स्टेडियम के अंदर जब बुधवार को भारत और साउथ अफ़्रीका की टीमें विश्व कप का मैच खेलने की ओर बढ़ रही थीं, वहीं स्टेडियम के बाहर खड़े एक सिक्योरिटी गार्ड मंद मुस्कान लिए कहते हैं, ''मुझे नहीं मालूम कि कौन-सी टीम खेल रही है लेकिन इस शोर से मुझे पता चल गया है कि कोई एशियाई टीम खेल रही है.''
ये शोर वर्ल्ड कप 2019 के अपने पहले ही मैच में साउथ अफ्रीका को छह विकेट से हराने वाली टीम इंडिया के फैंस का था.
लेकिन अपनी पसंदीदा टीम के लिए चीयर करने और शोर मचाने के लिए क्रिकेट फैंस को काफ़ी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ा.
इंग्लैंड के बाकी स्टेडियमों के मुक़ाबले यहां पहुंचने की सुविधाएं कम ही हैं. ये स्टेडियम साउथेम्प्टन सिटी सेंटर से 20 किलोमीटर दूर है. जहां न तो टैक्सी स्टैंड है, न ही दुकानें और न कोई रेस्त्रां. ज़्यादातर लोग निजी साधनों से स्टेडियम आए थे. इस जगह के आस-पास कोई रेलवे स्टेशन तक नहीं है.
स्टेडियम के रूट पर बहुत कम बसें चलती हैं और यहां आने के लिए बहुत कम टैक्सी मिलती हैं. लेकिन ये सब परेशानियां क्रिकेट प्रेमियों को यहां पहुंचने से नहीं रोक पाईं.
लंदन में रहने वाले विनीत सक्सेना बताते हैं, ''मैं ट्रेन से सुबह 8 बजे साउथेम्प्टन पहुंच गया था, लेकिन जब मुझे जल्दी टैक्सी नहीं मिली तो डर लगा कहीं मैं टॉस मिस न कर दूं''
स्टेडियम के आस-पास न तो कोई मॉल है और न ही ज़्यादा होटल. इसी वजह से लोग सुबह साढ़े दस बजे शुरू होने वाले मैच को देखने के लिए लोग तड़के ही स्टेडियम के आस-पास इकट्ठा होने लगे थे.

विवेक अपने परिवार के साथ ये मैच देखने के लिए आए थे.
वो बताते हैं, ''इस मैच को देखने के लिए हम सिंगापुर से आए हैं. हम इस मैच की एक बॉल भी मिस नहीं कर सकते थे. हमें पता था कि यहां बहुत भीड़ होने वाली है इसीलिए हम लंदन से पहली ही ट्रेन पकड़ कर आ गए.''
इनकी तरह कई लोग स्टेडियम जल्दी आना चाहते थे ताकि वो अपने पसंदीदा खिलाड़ी या टॉस मिस न कर दें.
अपनी पहचान छुपाने की शर्त रखते हुए एक दर्शक ने बताया, ''मेरे बॉस मुझे छुट्टी नहीं दे रहे थे तो मैंने बहाना बनाकर छुट्टी ले ली, मुझे मालूम है कि ये गलत है लेकिन धोनी के लिए कुछ भी! धोनी शायद इसके बाद अगला टूर्नामेंट न खेलें और ये मेरे लिए इमोश्नल है.''

''बुमराह बुमराह'' से गूंज उठा स्टेडियम
सिक्योरिटी गार्ड्स के लिए भी ये मैच बाकी मैचों के मुकाबले काफी अलग था. आम मैचों के दौरान इस तरह की भीड़ देखने को नहीं मिलती है. इतनी भीड़ तब होती है जब भारत-पाकिस्तान के बीच मुक़ाबला होता है.
साउथ अफ्रीका ने टॉस भले ही जीता हो लेकिन वो भारत ही था जिसके लिए भारी संख्या में फैंस तालियां बजा रहे थे.
अगर अनुपात की बात करें तो वहां आने लाने 10 लोगों में से 9 लोग भारतीय थे. स्टेडियम में लोगों का शोर इतना था कि होटल में बैठे लोग भी भारत के नाम का शोर सुन पा रहे थे.
जिस खिलाड़ी के लिए सबसे ज़्यादा शोर हुआ वो न तो धोनी थे और न ही कोहली. वो थे बुमराह.
मैच जिताने वाले बुमराह जैसे ही बॉल डालने के लिए दौड़ते... पूरा स्टेडियम ''बुमराह बुमराह'' से गूंज उठता था.
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अच्छा खाना और ख़राब इंटरनेट
दीपक और उनके दोस्त अमरीका से कुछ मैच देखने के लिए आए थे. वो कहते हैं, ''हम गुजराती हैं जब हमें पता चला कि रवींद्र जडेजा खेलने वाले खिलाड़ियों में नहीं है तो हमें बहुत बुरा लगा था लेकिन बुमराह ने हमारा दिल खुश कर दिया. रोहित और चहल का खेल देख कर भी मज़ा आ गया.''
लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हर भारतीय फैन इस मैच से खुश था.
लंदन के एक होटल में काम करने वाले वरुण बताते हैं, ''पहले मैच में जीत हासिल करना अच्छी बात है. लेकिन मुझे नहीं लगता कि ये ज़्यादा बड़ी जीत है. साउथ अफ्रीका अपने पिछले दो मैच हार चुका था और वो इस मैच से पहले अपने दो मेन बॉलर भी खो चुका था. अगर साउथ अफ्रीका ने पहली पारी में अच्छा स्कोर बनाया होता तो ये मैच भारत के लिए ये एक चुनौती होता.''
कोहली और धवन के खराब प्रदर्शन पर भी कई लोगों ने चिंता जताई. लेकिन लोगों को आशा है कि अगले मैच में ऑस्ट्रलिया के खिलाफ कोहली अच्छा खेलेंगे.
जब मैच भारत की ओर झुका हुआ था तो स्टेडियम के अंदर खाने की चीज़ों की बिक्री भी बढ़ गई थी. वहां भारतीय खाने की 2-3 दुकानें थीं, जिनमें पनीर बटर मसाला, आलू टिक्का मिल रहा था.

भारतीयों का उत्साह
स्टेडियम में बहुत से लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे थे इसलिए वहां इंटरनेट ठीक से काम नहीं कर कहा था.
आनंद शिकायत करते हैं, ''मैं अपने भाई को स्काइप कॉल करना चाहता हूं लेकिन यहां इंटरनेट काम ही नहीं कर रहा.''
इसके अलावा वहां मौजूद पत्रकारों को भी इंटरनेट की वजह से लाइव करने में काफ़ी समस्या हुईं
भारतीय अपने लीडर्स और रोल मॉडल्स को लेकर हमेशा से ही उत्साहित रहते हैं.
पिछले दशकों में लोग अपने पसंदीदा लीडर्स, धर्म गुरूओं को सुनने के लिए आस-पास के शहरों तक चले जाते थे और आज भी अगर लोगों के पसंदीदा हीरो की फिल्म उनके शहर में रिलीज़ नहीं होती तो वो अपने पसंदीदा हीरो की एक झलक पाने के लिए दूसरे शहरों तक सफर तय कर के जाते हैं.
क्रिकेट को लेकर भी भारतीयों में ऐसा ही उत्साह है. बीबीसी से बात करने वाले कई लोग यूरोप, भारत, अमरीका और कई देशों के कोने-कोने से आए थे.
लेकिन इसकी वजह क्या थी? क्रिकेट या देश?

विशाल बताते हैं, ''हमारी संस्कृति, भोजन और भाषाएं अलग-अलग हैं लेकिन क्रिकेट दोस्त! क्रिकेट है जो हमें एकजुट रखता है''
जेशन सवाल करते हुए कहते हैं, '' आप खुद देख सकते हैं कि ये एक मिनी भारत की तरह लग रहा है. आप भारत के हर राज्य को लगभग यहां देख सकते हैं. हम हमेशा इस तरह एकजुट क्यों नहीं रह सकते हैं? ''
मैच खत्म होने के दो घंटे बाद जब सारे फैन्स स्टेडियम छोड़कर जा चुके थे उसके बाद भी इंडिया इंडिया इंडिया की आवाज़ हमारे कानों में गूंज रही थी
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