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दमदार भारत और छुपे रुस्तम पाकिस्तान के बीच महा मुक़ाबला
- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
दुनिया के किसी भी कोने में अगर किसी क्रिकेट टूर्नामेंट का फ़ाइनल भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जाए, क्रिकेट के चाहने वालों को इससे अधिक और क्या चाहिए?
और फिर भारत और पाकिस्तान एक ही टूर्नामेंट में दो बार टकराएँ, यह तो सोने पर सुहागे जैसा है.
अब रविवार को यही दोनों टीमें आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में टकराने जा रही हैं.
पिछले चैंपियन भारत ने ग्रुप मैच में श्रीलंका के हाथों सात विकेट से हारने के बाद दमदार खेल दिखाते हुए फ़ाइनल में जगह बनाई है.
वहीं पाकिस्तानी टीम तो इस चैंपियंस ट्रॉफ़ी में छुपा रुस्तम साबित हुई.
भारत तो चैंपियन के रूप में पहले से ही दावेदार था लेकिन शायद ही किसी ने सोचा था कि नए कप्तान के साथ पाकिस्तान फाइनल में पहुंचेगा.
भारत के हाथों पहले ही मैच में डकवर्थ-लूइस नियम के आधार पर 124 रनों से करारी मात के बाद पाकिस्तान ने ज़बरदस्त वापसी की है.
पाकिस्तान की दमदार वापसी
पाकिस्तान ने अगले ही मैच मे डकवर्थ-लूइस नियम के आधार पर दक्षिण अफ़्रीका को 19 रन से और उसके बाद श्रीलंका को तीन विकेट से हराकर अपना खोया आत्मविश्वास हासिल किया.
सेमीफ़ाइनल में तो इंग्लैंड कहीं भी पाकिस्तान के सामने नहीं थी. उसे 211 रनों पर समेटने के बाद पाकिस्तान आसानी से आठ विकेट से जीता.
दूसरी तरफ भारत ने भी सेमीफाइनल में बांग्लादेश को नौ विकेट से हराया.
ग्रुप मैच में भारत श्रीलंका से सात विकेट से हारा.
फ़ाइनल तक के सफर में भारत की सलामी जोड़ी शिखर धवन और रोहित शर्मा जमकर चमकी है.
भारत की सलामी जोड़ी का कमाल
शिखर ने पाकिस्तान के ख़िलाफ 68, श्रीलंका के ख़िलाफ 125, दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ 78 और सेमीफ़ाइनल में बांग्लादेश के ख़िलाफ 46 रन बनाए.
रोहित शर्मा ने भी पाकिस्तान के ख़िलाफ 91, श्रीलंका के ख़िलाफ 78 और सेमीफ़ाइनल में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ नाबाद 123 रनों की शतकीय पारी खेली.
कप्तान विराट कोहली ने भी सेमीफ़ाइनल में बांग्लादेश के ख़िलाफ नाबाद 96 रन बनाए.
दरअसल वह केवल श्रीलंका के ख़िलाफ़ बिना खाता खोले आउट हुए वर्ना दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ उन्होंने नाबाद 76 और पाकिस्तान के ख़िलाफ भी नाबाद 81 रन बनाए.
सरफ़राज़ की बेहतरीन कप्तानी
युवराज सिंह ने भी पाकिस्तान के ख़िलाफ 53 और महेंद्र सिंह धोनी ने श्रीलंका के ख़िलाफ 63 रन बनाकर अपना दमख़म दिखाया.
अगर यह कहा जाए कि चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय बल्लेबाज़ी की असली परीक्षा हुई ही नहीं है तो ग़लत नहीं होगा.
रही बात पाकिस्तान की तो उसके कप्तान सरफ़राज़ अहमद ने श्रीलंका के ख़िलाफ़ नाबाद 61 रन की पारी खेलकर लगभग हारा हुआ मैच जीत में बदला. और इसी जीत से पाकिस्तान के सितारे बदले.
भारत के ख़िलाफ उनके गेंदबाज़ बेहद साधारण नज़र आए लेकिन बाकी टीमों के बल्लेबाज़ उनका सामना नहीं कर सके. कप्तान सरफ़राज़ अहमद ने भी गेंदबाज़ों का इस्तेमाल बखूबी किया.
गेंदबाज़ी पाकिस्तान की ताक़त
सलामी बल्लेबाज़ फख्र ज़मॉ भी अभी तक इंग्लैंड के ख़िलाफ 57, श्रीलंका के ख़िलाफ 50 और दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ 31 रन की ज़ोरदार पारी खेल चुके हैं.
उनके जोड़ीदार अज़हर अली भी सेमीफाइनल में इंग्लैंड के ख़िलाफ 76 रन ठोक चुके हैं.
बाबर आज़म ने भी छोटी-छोटी मगर उपयोगी पारी खेली है, लेकिन बेहद अनुभवी शोएब मलिक का बल्ला चुप है.
ऐसे में पाकिस्तान के सबसे अधिक उम्मीद अपने गेंदबाज़ों से ही होंगी.
तेज़ गेंदबाज़ जोड़ी जुनैद ख़ान और रुम्मान रईस के साथ हसन अली की तिकड़ी कुछ कमाल कर सकती है.
भारत का दावा मज़बूत
भारतीय गेंदबाज़ों ने भी निराश नहीं किया है.
भुवनेश्वर कुमार, जसप्रीत बुमराह, आर अश्विन और रविंद्र जडेजा ने हर महत्वपूर्ण अवसर पर विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की है.
वहीं केदार जाधव ने बांग्लादेश के ख़िलाफ़ दो विकेट झटक कर मैच का रुख भारत की ओर तब पलटा, जब बाकी गेंदबाज़ बेअसर साबित हो रहे थे.
भारत के कप्तान विराट कोहली पहले ही कह चुके हैं कि टीम में शायद ही कोई परिवर्तन हो.
मैच के परिणाम को लेकर भी वह दबाव महसूस नहीं करते. वो साफ कर चुके हैं कि उनका ध्यान सिर्फ खेल पर है.
रिकार्ड के पन्नों में दोनो टीमें अभी तक 10 एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय फ़ाइनल खेल चुकी है.
भारत हैट्रिक लगाने उतरेगा
इनमें से सात पाकिस्तान ने और तीन भारत ने जीते हैं.
पिछले पांच एकदिवसीय मैचों में भारत चार बार और पाकिस्तान एक बार जीता है. चैंपियंस ट्रॉफी के इतिहास में भारत और पाकिस्तान पहली भार फ़ाइनल में भिड़ने जा रहे हैं.
दोनो टीमों ने चैंपियंस ट्रॉफी में दो-दो मुक़ाबले जीते हैं.
भारत तीसरी बार चैंपियन बनने उतरेगा, जबकि पहली बार फ़ाइनल खेलने जा रहे पाकिस्तान के पास खोने के लिए कुछ नहीं है लेकिन अगर जीते तो बहुत कुछ हासिल होगा.
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