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'घायल ह्यूज़ को बचाया नहीं जा सकता था'
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट खिलाड़ी फ़िलिप ह्यूज़ को जिस समय गेंद से चोट लगी थी, उनकी मौत उस समय से ही तय थी.
उनकी मौत की वजहों का पता लगाने के लिए बनी जांच समिति के सामने ये बात रखी गई है.
सिडनी में 25 नवंबर 2014 को खेले गए एक घरेलू मैच में बैटिंग करते वक़्त गेंद इस 25 साल के खिलाड़ी की गर्दन पर लगी थी जिसके बाद उनके दिमाग में रक्तस्त्राव हुआ और दो दिन बाद उनकी मौत हो गई थी.
पांच दिनों तक चलने वाली सुनवाई में यह पता लगाया जाएगा कि क्या ह्यूज़ को बचाना मुमकिन था.
जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि इमरजेंसी की स्थिति में कितनी तेज़ी से काम होता है.
क्रिस्टीना स्टर्न ने जांच समिति को बताया कि "ऐसा लगता है कि ह्यूज़ की मौत उसी समय से तय थी, जब उन्हें चोट लगी थी."
उन्होंने कहा "न्यूरोसर्जन डॉ ब्रायन ओलर की राय में कितनी भी जल्दी से किए गए किसी भी उपाय से फ़िलिप ह्यूज़ को नहीं बचाया जा सकता था."
जांच समिति उस दिन खेलने वाले दूसरे खिलाड़ियों की भी बात सुनेगी. इन खिलाड़ियों में डो बॉलिंगर, ब्रैड हैडिन और डेव वॉर्नर भी शामिल हैं.
न्यू साउथ वेल्स के जांचकर्ता माइकल बार्नेस ने कहा कि क्रिकेट में ख़तरा बना ही रहता है और "इस खिलाड़ी की मौत चौंकाने वाले ढंगे से हुई."
बार्नेस ने कहा, "यह बिल्कुल साफ़ है कि मौत एक भयानक हादसा थी. पर इसका मतलब यह नहीं कि क्रिकेट को और सुरक्षित नहीं बनाया जा सकता है."