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![]() कारोबार:2006 वर्ष 2006 में भारत दुनिया की दूसरी सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था के रूप में सामने आया है. अप्रैल से सितंबर के बीच भारत की आर्थिक विकास दर 9.1 फ़ीसदी आँकी गई है. इससे अधिक विकास दर सिर्फ़ चीन में दर्ज की जा रही है. जीडीपी की वृद्धि दर में मैनुफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र की अहम भूमिका रही लेकिन कृषि विकास दर अभी भी सुस्त बनी हुई है.आईटी और बीपीओ के मामले में भारत अग्रिम पंक्ति में खड़ा है. इस साल दूरसंचार के मामले में मोबाइल कनेक्शन की संख्या लैंडलाइन कनेक्शन से ज़्यादा हो गई. पहली बार निर्यात भी सौ अरब डॉलर के आँकड़े को पार कर गया. हाल ही में बोस्टन कंस्लटिंग ग्रुप ने 'ग्लोबल वेल्थ-2006' नाम से एक सूची तैयार की है जिसमें भारत पहली बार शीर्ष बीस देशों में शामिल है. वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने दिसंबर में अर्थव्यवस्था की मध्यावधि समीक्षा रिपोर्ट पेश की है जिसमें अर्थव्यवस्था की गुलाबी तस्वीर पेश की गई है. उधर योजना आयोग ने 11 वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान नौ फ़ीसदी विकास दर का लक्ष्य निर्धारित किया है. चुनौतियाँ विकास के इन दावों के बावजूद असमान विकास, किसानों की आत्महत्या और पिछले छह महीने से विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी एसईजेड पर जारी विवाद केंद्र सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन कर उभरे हैं. इस साल ऐसा लगा कि 19991 के बाद से शुरू हुई उदारीकरण और निजीकरण की प्रक्रिया जैसे धीमी पड़ गई है. केंद्र की यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने केंद्र सरकार के आर्थिक सुधारों से संबंधित कई प्रस्तावों को ठंडे बस्ते में डाल दिया. दूरसंचार और बीमा क्षेत्र में एफडीआई सीमा बढ़ाने का वामपंथी दल विरोध कर रहे हैं. उन्होंने बजट में सामाजिक क्षेत्र के लिए वित्तीय आवंटन बढ़ाने का दबाव बनाया और इसके परिणाम भी सामने आए. केंद्र सरकार ने रोजगार गारंटी योजना लागू कर दी है जिसे काफी अहम माना जा रहा है. अब हम अलग अलग क्षेत्रों के लिहाज से ये साल कैसा रहा, इसकी चर्चा करते हैं. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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