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आने वाली पीढ़ियों के लिए ख़ास व्यवस्था | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नॉर्वे के पहाड़ो में एक ऐसा तहखाना बनाने पर काम शुरु हो गया है जिसमें दुनिया में पाई जाने वाली हर फ़सल के बीज, एक बीज बैंक के तौर पर रखे जाएँगे. इसका मकसद ये है कि यदि दुनिया में कोई बड़ी आपदा से महाविनाश होता है तब भी मनुष्यों की आने वाली पीढ़ियों के लिए ये बीज उपलब्ध रहें. इस परियोजना को लगभग सौ देशों का समर्थन हासिल है. इस तहखाने को स्वाबार्ड टापू के एक पहाड़ को खोदकर बनाया जा रहा है और ये जगह पूरी तरह बर्फ़ में जमी हुई है. ज़मीन से लगभग तीन सौ मीटर नीचे बनाया जाने वाला इस तहखान के दरवाजे बुलेट-प्रूफ़ यानि गोली इत्यादि से भेदे नहीं जा सकेंगे. इसमें दुनिया भर से लगभग तीस लाख बीजों की क़िस्में होंगी जो इस समय दुनिया में विभिन्न जगहों पर बीज बैंकों में रखी गई हैं. नॉर्वे के कृषि मंत्री का कहना था कि यदि पौधों की बीमारियों से, परमाणु युद्ध से या फिर जलवायु परिवर्तन के कारण खाद्य पदार्थों की फ़सलें पूरी तरह नष्ट भी हो जाती हैं तो ये आने वाली पीढ़ियों के लिए बीज बैंक का काम करेगा. संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन का अनुमान है कि अब तक कृषि की फ़सलों की 75 प्रतिशत जीन विविधता ख़त्म हो चुकी है. | इससे जुड़ी ख़बरें बीटी कपास से बढ़ी उपज07 फ़रवरी, 2003 | विज्ञान 'किसानों के लिए जानलेवा कीटनाशक'31 जुलाई, 2002 | पहला पन्ना जीन समृद्ध कपास को मंज़ूरी26 मार्च, 2002 | पहला पन्ना भारत में बिकेगी नई नस्ल की कपास07 दिसंबरजनवरी, 2001 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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