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सुइयाँ चुभो कर माइग्रेन का इलाज | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जर्मनी में हुए एक अध्ययन के अनुसार एक्यूपंक्चर माइग्रेन यानि सिरदर्द में दवा के जैसा असर करता है. जर्मन विशेषज्ञों ने बार-बार होने वाले सिरदर्द से परेशान 900 रोगियों पर प्रयोग कर पाया कि सूई से उपचार की चीनी विधि एक्यूपंक्चर से बड़ी तादाद में माइग्रेन के रोगियों को फ़ायदा होता है. यहाँ तक कि एक्यूपंक्चर का नाटक करने भर से भी बहुत से रोगियों को लाभ हुआ. ताज़ा अध्ययन की रिपोर्ट मेडिकल जर्नल लांसेट में छपी है. यदि ब्रिटेन की बात करें तो यहाँ की 15 फ़ीसदी आबादी माइग्रेन से प्रभावित है. इनमें से दो तिहाई हिस्सा महिलाओं का है. माइग्रेन का दौर एक बार में 72 घंटे तक रह सकता है. और प्रभावित लोगों को साल में औसत 13 बार माइग्रेन के दौर से गुजरना पड़ता है. अध्ययन जर्मनी में अध्ययन के दौरान पाया गया कि तीनों विधियों से उपचार का सकारात्मक असर देखा गया, यानि सामान्य दवाओं से उपचार, एक्यूपंक्चर विधि से उपचार और एक्यूपंक्चर के नियमों से अलग हट कर सूइयाँ चुभो कर किया गया उपचार. अध्ययन में शामिल रोगियों का छह सप्ताह तक इलाज किया गया, और 23 से 26 सप्ताह बाद उनकी दोबारा जाँच की गई. एक्यूपंक्चर उपचार कराने वालों में से 47 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें इलाज से फ़ायदा हुआ है. सामान्य दवाओं से उपचार कराने वालों में से 40 प्रतिशत ने फ़ायदा होने की बात की, जबकि सूइयाँ चुभो कर एक्यूपंक्चर के एहसास के साथ इलाज कराने वालों में से 39 प्रतिशत ने उपचार का लाभ होने की बात की. लांसेट न्यूरोलॉजि में अनुसंधान रिपोर्ट लिखते हुए डॉ. हांस क्रिस्टोफ़ डाइनर कहते हैं कि परिणामों की स्पष्ट व्याख्या संभव नहीं हो पा रही है कि तीनों तरह के इलाज किस तरह असर करते हैं. उन्होंने कहा कि डॉक्टर माइग्रेन के इलाज में एक्यूपंक्चर को शामिल करते हैं या नहीं, यह उन्हीं पर छोड़ देना चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें सर्जरी से माइग्रेन का इलाज18 अगस्त, 2003 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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