BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मित्र को भेजेंकहानी छापें
पुरुष परिवार नियोजन के लिए इंजेक्शन

इंजेक्शन
पुरुषों के लिए इंजेक्शन तैयार किया गया है
परिवार नियोजन अब आसान हो जाएगा. महज एक इंजेक्शन से पुरुष दस वर्षों तक के लिए बिना मर्जी पिता बनने से बच सकते हैं.

इतना ही नहीं, जब चाहें इस इंजेक्शन के प्रभाव को ख़त्म भी किया जा सकता है और पिता बना जा सकता है.

दुनिया के इस पहले परिवार नियोजक इंजेक्शन को खोज निकाला है आईआईटी खड्गपुर के वैज्ञानिकों ने जिनका दावा है कि इस इंजेक्शन को इस्तेमाल करने पर पुरुष के शुक्राणु निष्क्रिय हो जाते हैं.

इंजेक्शन की एक ख़ुराक का असर 10 वर्षों तक रहेगा और इस बीच अगर आप फिर पिता बनना चाहें तो एक दूसरे इंजेक्शन से इसका असर ख़त्म किया जा सकता है.

इंजेक्शन कई परीक्षणों के बाद अब तैयार हो चुका है और अगले साल की शुरुआत तक यह बाज़ार में उपलब्ध भी हो जाएगा.

तीन दशकों की मेहनत

आईआईटी खड्गपुर के स्कूल ऑफ़ मेडिकल साइंस एंड टेक्नॉलॉजी के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर एसके गुहा ने बीबीसी को बताया कि इस इंजेक्शन को विकसित करने का काम 1972 में शुरू किया गया था.

अरविंद कुमार
अरविंद कुमार पर इस इंजेक्शन का सफल परीक्षण किया गया

वो बताते हैं, “उस समय केवल नसबंदी ऑपरेशन ही पुरुषों में परिवार नियोजन का एकमात्र ज़रिया था. हालांकि शुरुआत में हम इंजेक्शन बनाने पर काम नहीं कर रहे थे पर वक्त के साथ-साथ इसकी ज़रूरत महसूस हुई और हमने इंजेक्शन तैयार कर दिया.”

वैज्ञानिकों ने इस इंजेक्शन का नाम ‘रिवर्सेबल इनहिबिशन ऑफ़ स्पर्म अंडर गाइडेंस’ रखा है.

यह शोध स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और इंडियन काउंसिल फ़ॉर मेडिकल रिसर्च की मदद से किया गया.

राजधानी दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल के पुरुष परिवार नियोजन विभाग के डॉक्टर एचसी दत्ता ने बताया कि शोध के दौरान इंजेक्शन का 100 पुरुषों पर परीक्षण किया जा चुका है.

बीबीसी ने जब इन पुरुषों में से एक, अरविंद कुमार से बातचीत की तो उन्होंने बताया, “मैंने छह जुलाई, 2000 को यह टीका लगवाया था पर अभी तक मुझे किसी भी तरह की कोई शिकायत नहीं है.”

कैसे करेगा काम

ये बात और है कि इस इंजेक्शन को लगाना इतना आसान काम नहीं होगा. वजह यह है कि इंजेक्शन उसी नस में लगता है जिससे शुक्राणु निकलते हैं.

पुरुषों में नसबंदी के ऑपरेशन में इस नस को काट दिया जाता है पर अब इसमें इस इंजेक्शन को लगाकर शुक्राणुओं को निष्क्रिय किया जा सकेगा जिससे वे अपनी निषेचन क्षमता खो देंगे.

दवा का असर चार से पाँच दिनों में शुरू हो जाता है और लगभग 10 वर्षों तक रहता है.

इस बीच अगर बच्चे जनने की इच्छा हो तो एक दूसरे इंजेक्शन से इसके प्रभाव को खत्म किया जा सकता है और शुक्राणुओं को फिर से सक्रिय किया जा सकता है.

प्रोफ़ेसर गुहा बताते हैं कि इस इंजेक्शन को लगाने की विधि काफ़ी अलग है और इसके लिए इंजेक्शन लगाने वाले डॉक्टर को दो-तीन हफ़्तों का प्रशिक्षण देना पड़ेगा.

उन्होंने बताया कि बाज़ार में आने के बाद इस इंजेक्शन की कीमत 40-50 रूपए हो सकती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती जनसंख्या भारत की सबसे बड़ी चुनौती है और ऐसे में यह इंजेक्शन काफ़ी फ़ायदेमंद साबित हो सकता है.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>