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गुरुवार, 03 फ़रवरी, 2005 को 01:06 GMT तक के समाचार
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तंत्रिका विज्ञान में भारत के बढ़ते क़दम

एनबीआरसी
एनबीआरसी मस्तिष्क से जुड़े शोध के क्षेत्र में अग्रणी है
मानव शरीर के सबसे जटिल अंग मस्तिष्क के अध्ययन से जुड़ा भारतीय संस्थान नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर(एनबीआरसी) तंत्रिका विज्ञान शोध के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है.

लगभग 50 साल पहले मशहूर न्यूरोसर्जन डॉ. बी राममूर्ति ने देश में तंत्रिका विज्ञान पर शोध के लिए एक स्वतंत्र संस्थान की बात पहली बार उठाई थी.

उनका यह सपना साकार हुआ नवंबर 1997 में जब सरकार ने एनबीआरसी शुरू करने की घोषणा की. हरियाणा के मानेसर में 38 एकड़ क्षेत्र में फैले इस संस्थान को जून 1999 में एक स्वायत्त संस्था का दर्जा मिला.

एनबीआरसी का ध्येय है मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के सभी स्तरों पर शोध करना. इनमें शामिल हैं- कोशिका, अणु, विभिन्न तंत्र (जैसे श्रवण तंत्र और चाक्षुष तंत्र), दिमागी गतिविधियाँ और बीमारियाँ.

एनबीआरसी के शोधकर्ता कई विधाओं से जुड़े हैं, जैसे- गणित, भौतिकी, जैविकी, कंप्यूटेशन और चिकित्सा.

संस्थान की निदेशक विजयलक्ष्मी रवींद्रनाथ कहती हैं, "भारत में इंटिग्रेटिव बायोलॉजी के क्षेत्र में हम एक रोल मॉडल हैं."

व्यापक सहयोग

एनबीआरसी का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ंडामेंटल रिसर्च और सेंटर फ़ॉर सेल्यूलर एंड मोलेक्यूलर बायोलॉजी समेत भारत के 45 प्रमुख शोध संस्थानों और विश्वविद्यालयों से तालमेल है.

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निदेशक वी रवींद्रनाथ एनबीआरसी को अपने क्षेत्र में एक रोल मॉडेल मानती हैं

रवींद्रनाथ ने बताया कि एनबीआरसी के अंतरराष्ट्रीय सहयोगी संस्थानों में अमरीका की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ न्यूरोलॉजिकल डिसॉडर्स एंड स्ट्रोक, जापान की रिकेन ब्रेन साइंस इंस्टीट्यूट और रूस की पैवलोव इंस्टीट्यूट शामिल हैं.

एनबीआरसी को मानित विश्वविद्यालय का ओहदा प्राप्त है और यहाँ शोधकर्ताओं को डिजिटल लाइब्रेरी और डीएनए अनुक्रमण उपकरण जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं.

एनबीआरसी में विभिन्न शोध संस्थानों के सहयोग से मस्तिष्काधात पर एक परियोजना चल रही है, और ऑटिज़्म पर ऐसी ही एक परियोजना शुरू करने का प्रस्ताव है.

इस समय संस्थान में जिन बीमारियों पर शोध चल रहा है उनमें नेत्रहीनता से जुड़े विकार, मनोभ्रंस और रीढ़ की हड्डी को पहुँची चोट से जुड़ी समस्याएँ शामिल हैं. बच्चों की बोलने-सुनने और भाषाएँ सीखने की क्षमता से जुड़े अध्ययन को भी प्रमुखता दी गई है.

रवींद्रनाथ ने बताया कि अगले साल तक एनबीआरसी परिसर में एक अत्याधुनिक फ़ंक्शनल एमआरआई यूनिट की स्थापना की जाएगी जिससे कई कठिन रहस्यों पर शोध संभव हो पाएगा, जैसे- माँ के शरीर से मिले पोषण का बच्चे के बोधशक्ति विकास पर असर. उन्होंने कहा कि अगले पाँच साल में एनबीआरसी का आकार दो से तीन गुना बढ़ जाएगा.

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