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मोबाइल फोन पर टीवी देखिए! | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आप अपने घर से बाहर कहीं घूमने गए हों और लौटने में देर हो जाए- अफसोस! आज आप फिर अपना पसंदीदा कार्यक्रम नहीं देख पाए. काश! कोई ऐसा तरीका होता कि आप जहाँ भी हों, बिना टेलीविज़न के समय पर अपने कार्यक्रम देख सकेंगे. अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं तो आपके लिए खुशख़बरी है - 2010 तक शायद आप टीवी अपने मोबाइल फोन पर देख पाएँगे. टेलीविज़न के ब्रॉडकास्ट सिग्नल मोबाइल फोन तक पहुँचाने की तकनीक वाले एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. इंस्टिंक्ट नाम का यह प्रोजेक्ट पश्चिम लंदन की ब्रूनेल यूनिवर्सिटी की अगुवाई में शुरू हुआ है. अगर इसमें सफलता मिलती है तो बढ़िया क्वालिटी का वीडियो काफी सस्ते में मोबाइल फोन पर भेजकर थ्री-जी फोनों को लोकप्रिय बनाया जा सकता है. प्रोजेक्ट संचालक डॉ थॉमस ऑवंस कहते हैं, "लोगों के बीच थ्री-जी को लोकप्रिय बनाने की तरफ ये पहला क़दम साबित हो सकता है." मुश्किलें इससे मूल रूप से दो मुश्किलें हल होती हैं - इंटरनेट और टीवी को एक साथ लाया जा सकेगा और थ्री-जी फोन को ग्राहकों के लिए आकर्षक बनाया जा सकेगा.
थ्री-जी यानी थर्ड जेनरेशन मोबाइल फोन तकनीक लोगों को कई सुविधाऐं उपलब्ध कराती है. इसमें वीडियो कॉलिंग और मैसेजिंग, ई-मेल, खेल, फोटो मैसेजिंग और ख़बरें जैसी सुविधाऐं शामिल हैं. इंस्टिंक्ट प्रोजेक्ट संचालक डॉ थॉमस ने बीबीसी को बताया, "फिलहाल ब्रॉडकास्ट और इंटरनेट के बीच आदान-प्रदान बहुत कम है. लेकिन इंस्टिंक्ट के ज़रिए इन दोनों के बीच फासले कम हो जाएँगे." उन्होंने बताया, "फिलहाल थ्री-जी उम्मीद के मुताब़िक काम नहीं कर पा रहा है और लोग उसे ज़्यादा पसंद नहीं कर रहे हैं." अगर इस प्रोजेक्ट में क़ामयाबी मिलती है तो समाचार, खेल और मौसम की जानकारी समेत कई कार्यक्रमों से भरपूर वीडियो क्लिप्स आपके मोबाइल फोन पर उपलब्ध होंगी. इसके अलावा होटलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की जानकारी के लिए भी इसे इस्तेमाल में लाया जा सकेगा. साथ ही, सेट-टॉप बॉक्स में रिकार्ड किए कार्यक्रमों को भी मोबाइल पर डाउनलोड करके अपनी सुविधा के मुताब़िक देख पाना संभव होगा. साथ ही, जिनके पास घर पर इंटरनेट नहीं है वे आवेदन फार्म भी फोन पर डाउनलोड कर सकेंगे. उपभोक्ताओं को ज़रूरत होगी तो केवल एक ब्लूटूथ वाले फोन की. मूल्य ख़ास बात ये है कि ये तकनीक उपभोक्ताओं के लिए काफी सस्ती होगी क्योंकि इसका सिग्नल एक फोन से दूसरे के पास भेजने की जगह एक ही समय में कई फ़ोनों पर भेजा जा सकेगा. लेकिन ये इतना आसान भी नहीं है. इसके लिए देश भर में कई ट्रांसमीटरों का जाल बिछाना होगा. फिर ये भी समस्या है कि कार या ट्रेन में सफ़र करने वाले लोगों के लिए बिना बैट्री का नुकसान किए ज़्यादा गति पर सही सिग्नल कैसे भेजा जाए. इस प्रोजेक्ट के लिए यूरोपियन यूनियन ने चौंसठ लाख पाउंड का अनुदान दिया है. इसमें ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, इसराइल, स्पेन और ब्राज़ील की भागीदारी है. |
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