BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 15 अप्रैल, 2004 को 20:18 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
बीच ऑपरेशन जागने से बचाव का उपाय
सर्जरी
ऑपरेशन के दौरान मरीज चेतन अवस्था में आ सकते हैं.
ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा मॉनिटर विकसित किया है जिससे ऑपरेशन के दौरान मरीज के जागने का पता चल सकेगा.

मेलबोर्न शहर के विशेषज्ञों की इस तकनीक में दिमाग़ी तरंगो के सहारे ये पता किया जाता है कि मरीज़ में एनेस्थीसिया(बेहोश करनेवाली दवा) का असर कैसा है और ये असर ख़त्म तो नहीं हो रहा.

न्यू साइंटिस्ट पत्रिका में प्रकाशित खोज के अनुसार इस तकनीक से सर्जरी के दौरान दर्द होने के मामलों में 80 प्रतिशत तक कमी आ सकती है.

एक अनुमान के अनुसार हर 1000 में से एक मरीज़ अपने ऑपरेशन के दौरान चेतन अवस्था में आ जाता है.

ऐसे में एनीस्थीसिया के असर से असहाय स्थिति में होने के कारण वे अपने दर्द के बारे में डॉक्टर को नहीं बता पाते.

 मुझे अपने शरीर के काटे जाने का अहसास हो रहा था. ऐसा लग रहा था कि वो हिस्सा जल रहा है.
लिंडा मैकडुगाल, जिन्हें ऑपरेशन के दौरान जगने का अहसास हुआ.

एक सिज़ेरियन ऑपरेशन के दौरान अचानक जगने वाली लिंडा मैकडुगाल का कहना है," मुझे अपने शरीर के काटे जाने का अहसास हो रहा था. ऐसा लग रहा था कि वो हिस्सा जल रहा है. बहुत दर्द महसूस हुआ. लेकिन मैं अपने शरीर का कोई भी हिस्सा हिला पाने में असमर्थ थी. हाँ, मेरा दिल इतने ज़ोर से धड़क रहा था कि मुझे लगा कि मुझे दिल का दौरा पड़ जाएगा."

वो बताती हैं कि जब उनके बच्चे को बाहर निकाला गया तो उन्होंने डॉक्टर को कहते सुना, " हर जन्म एक चमत्कार होता है. ये बच्चा कितना खूबसूरत है."

लिंडा का ये ऑपरेशन मेलबर्न में 17 साल पहले हुआ था. आज भी उसे याद कर वो भयभीत हो जाती हैं और उनकी आँखों में आंसू आ जाते हैं.

ऐसे में इस तकनीक से इस तरह के मरीज़ों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है.

इस बीआईएस मॉनिटर में एक तरह का इलैक्ट्रोएनसीफैलोग्राम है, जो एक इलैक्ट्रोड के ज़रिए दिमागी तरंगों की जाँच कर किसी भी तरह की हरक़त की सूचना देती है.

ये जाँच मरीज़ के मेटाबॉलिज्म, स्मृति की प्रणाली और होश में रहने की उन अवस्थाओं पर आधारित होती है, जिस पर एनेस्थीसिया का असर पड़ता है.

ये मॉनिटर दिमागी तरंगों को जाँचकर मरीज़ के जागने की सूचना देता है.

मिसाल के लिए 100 के स्कोर का मतलब होगा मरीज़ होश में आ गया है, जबकि एनेस्थीसिया का असर 40 से 60 के बीच पूरा माना जाएगा.

अमरीका में लाईसेंस मिलने के बाद इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो चुका है.

प्रयोग

इससे पहले इस तकनीक को ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, ब्रिटेन और हॉंगकाँग के 24 अस्पतालों के 2500 लोगों पर आज़माया गया.

इनमें से ज़्यादातर या तो पहले ऑपरेशन के दौरान चेतन होने की अवस्था का शिकार हो चुके थे या फिर सिज़ेरियन और दिल की बीमारी का ऑपरेशन करा रहे थे, जिसमें कम एनीस्थीसिया दिया जाता है.

इनमें से कुछ लोगों पर बीआईएस मॉनिटर आज़माया गया और बाक़ी के पसीना आने, किसी तरह की हरक़त, रक्तचाप या दिल की धड़कन बढ़ने जैसे संकेतों पर ध्यान दिया गया.

फिर पहले चार घंटे बाद, एक दिन बाद और 30 दिन बाद इन सभी लोगों से बातचीत कर ये पता लगाने की कोशिश की गई कि उन्हें सर्जरी की कोई बात याद है या नहीं.

बीआईएस पर रखे गये लोगों में से केवल दो ऑपरेशन के दौरान होश में आए, जबकि बाक़ी में से 11 को ऑपरेशन की याद रही.

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं का मानना है कि डॉक्टरों को ख़ासतौर पर ज़्यादा ज़ोखिम वाले मरीज़ों के लिए इस मॉनिटर का उपयोग करना चाहिए.

उधर ग्लास्गो यूनीवर्सिटी की एनेस्थीसिया यूनिट के प्रोफेसर गैविन केनी ने `ऑडिटरी इवोक्ड पोटेंशियल सिस्टम' नाम की एक दूसरी तकनीक की खोज की है.

ये दिमाग में `क्लिक ' की ध्वनि छेड़ती है, जो दिमाग में एक तरह की प्रक्रिया शुरू करती है. इस प्रक्रिया का एनीस्थीसीया की दवा पर असर पड़ता है, जो जाँच में पकड़ में आ जाता है.

प्रोफेसर केनी का कहना है कि ये तकनीक बीआईएस मॉनिटर से ज़्यादा प्रभावी है.

उनके अनुसार," एनीस्थीसीया की कुछ दवाऐं बीआईएस में बढ़ोत्तरी दर्ज कर देती हैं, जबकि असल में मरीज़ की अवस्था गिर रही होती है."

`न्यू साईंटिस्ट' में स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के रॉल्फ सांडिन कहते हैं,"हम भविष्य में इस तरह की तकनीकों के ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल की सलाह देंगे."

लेकिन उन्होंने कहा कि इस तकनीक को हर मरीज़ के लिए इस्तेमाल करने से पहले इसका और विकास करना होगा.

सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>