|
यूँ ही अच्छी नहीं लगती हैं हस्तियाँ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अक्सर ये देखा जाता है कि युवा कभी खेल तो कभी सिनेमा या फिर किसी और क्षेत्र की प्रतिभा को ज़रूरत से ज़्यादा पसंद करने लगते हैं. कहा जा सकता है कि वे दीवाने बन जाते हैं इन प्रतिभाओं के. अब विशेषज्ञों की राय है कि हो सकता है कि इस चाहत के तार किसी मनोवैज्ञानिक समस्या से जुड़े हों. उनका कहना है कि हो सकता है कि ऐसे लोग ख़ुद को अकेला समझते हों, असुरक्षित हों या फिर उनके पास किसी तरह का कोई गुण ना हो. ऐसा भी हो सकता है कि उनकी अपने माता-पिता से नहीं बनती हो. शोध ये अध्ययन किया गया है ब्रिटेन की लेस्टर युनिवर्सिटी में. इसमें 11 साल से 16 साल के 191 बच्चों के बारे में जानकारी जुटाई गई. शोधकर्ताओं का कहना है कि प्रतिभाओं की पूजा दो तरह की होती है. पहले प्रकार में बच्चे या युवा अपने हीरो के जीवन और उसके काम के बारे में चर्चा करते हैं. दूसरे प्रकार में बच्चे उस हीरो को अपना साथी मान लेते हैं और उनसे कुछ अतिरिक्त प्रभावित रहते हैं. शोध से जुड़े डॉक्टर जॉन माल्ट्बी कहते हैं,"ऐसे लोगों को लगता है कि प्रतिभाओं के साथ उनका एक व्यक्तिगत संबंध है जिससे दूसरे लोगों के साथ उनके संबंध पर असर पड़ सकता है". असर शोध से पता चला है कि हर 10 में से एक बच्चा इस तरह की प्रतिभा पूजा के असर में है. उन्होंने ये भी पाया कि ऐसे बच्चों को अपने आम जीवन में समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है. जॉन माल्ट्बी ने कहा,"ऐसे लोगों में असुरक्षा की भावना पाई गई. प्रतिभाओं से बहुत ज़्यादा प्रभावित रहने से ये संकेत मिल सकता है कि ऐसे लोगों के कुछ लोगों से रिश्ते ठीक नहीं हैं". शोधकर्ताओं का कहना है कि ये पता लगाने के लिए और शोध किया जाना ज़रूरी है कि बच्चे क्यों प्रतिभाओं से इस क़दर प्रभावित हो जाते हैं. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||