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गुरुवार, 29 जनवरी, 2004 को 11:37 GMT तक के समाचार
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मरी व्हेल में धमाके से चिथड़े फ़ैले
व्हेल मछली

ताइवान में एक मरी हुई व्हेल मछली को ले जाते समय उसमें धमाका हो गया और उसके चिथड़े आस-पास के इलाक़े में फैल गए.

ताइनान शहर में हुई इस घटना में आस-पास से गुज़र रहे लोग व्हेल के ख़ून से सराबोर हो गए और पास ही खड़ी कारों की भी कुछ ऐसी ही हालत थी.

मछली को एक ट्रेलर पर ले जा रहे थे और उसी समय उसमें विस्फोट हुआ जिसके बाद मछली के टुकड़े सड़क तक फैल गए.

इससे पहले वह व्हेल मछली समुद्र तट तक आ जाने की वजह से जान गँवा बैठी थी. इसी वजह से उसे अध्ययन के लिए परीक्षण केंद्र भेजा जा रहा था.

समुद्र जैविकी के एक वैज्ञानिक का कहना है कि ऐसा मछली की मौत के बाद उसके पेट में बन रही गैसों की वजह से हुआ होगा.

वह मछली मौत के बाद ही आकर्षण का केंद्र बन गई थी और लोग उसे घेरकर देख रहे थे. इसी वजह से जब मछली का पेट फटने का धमाका हुआ तो आस पास खड़े लोग और गाड़ियाँ मछली के ख़ून से नहा गए.

फिर शुरू हुआ साफ़-सफ़ाई का दौर जिसके लिए लोगों ने मास्क पहनकर काम किया.

एक नागरिक का कहना था कि चिथड़ों और ख़ून के फैल जाने की वजह से अजीब सा दृश्य हो गया है और दुर्गंध भी आ रही है.

ताइनान के नेशनल चेंग कुंग विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर वांग चिएन-पिंग ने ही मछली को शि-ताओ प्राकृतिक संग्रहालय में ले जाने का आदेश दिया था क्योंकि उनके संस्थान ने मछली का पोस्ट-मॉर्टम अपने परिसर में करने से इनकार कर दिया था.

उन्होंने बताया कि जब मछली को समुद्र तट पर देखा गया तब वह मरने ही वाली थी और जब तक मदद पहुँचती उसने दम तोड़ दिया.

प्रोफ़ेसर वांग का कहना था कि मछली में भीतर ही भीतर नष्ट होने की प्रक्रिया शुरू हो गई जिसकी वजह से गैस बनने लगी और इतनी गैस बनी की उसका पेट फट गया.

उनका कहना था कि विस्फोट के बावजूद अब भी इतना अवशेष बचा है कि उसका अध्ययन किया जा सके.

उन्होंने लगभग 17 मीटर की लंबाई और 50 टन के वजन वाली इस मछली को ताइवान में पाई गई अब तक की सबसे बड़ी मछली बताया.

इतनी बड़ी होने की वजह से ही उसे ट्रेलर पर रखने में 13 घंटे का समय, तीन बड़ी क्रेनें और 50 मज़दूर लगे.

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